लोभ, लालच व मोह का त्याग कर भगवान के प्रति समर्पण भाव से भक्ति करनी चाहिए : कथावाचक दिव्या उज्जैन
पंकज जांगिड़. जोधपुर
आषाढ़ सुदी गुप्त नवरात्रि के उपलक्ष्य में रातानाडा स्थित शिव मंदिर में रातानाडा महिला एवं भक्त मंडल की ओर से मंदिर की वयोवृद्ध सेविका नारायणी देवी के सानिध्य में आयोजित चार दिवसीय ‘नानी बाई का मायरा’ कथा का सोमवार को पूर्णारती के साथ विराम हुआ। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही। इस मौके मंदिर ट्रस्टीगण, क्षेत्रीय पार्षद ललित गहलोत, महिला मंडल की प्रेम चौधरी, आशा बाहेती, भादू प्रजापत, कविता सोनी, सुरज कंवर आदि उपस्थित रहे और व्यवस्था में सहयोग व सेवाएं प्रदान की।
कथावाचक सुश्री दिव्या उज्जैन ने कहा कि यह कथा सेवा, सहयोग और समर्पण की सीख देती है। कथा में सहयोग की भावना होनी चाहिए। क्योंकि सनातन धर्म को जीवित रखना है तो हमें एकजुट होकर ऐसे धार्मिक अनुष्ठान करना जरूरी है। नरसी मेहता में भगवान के प्रति सहयोग व समर्पण की भावना थी।
कथावाचक ने नरसी मेहता व श्रीकृष्ण के बीच हुए रोचक संवाद को प्रस्तुत करते हुए श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त नरसी मेहता की पुत्री नानी बाई के लालची ससुराल में आयोजित कार्यक्रम में मायरा भरने स्वयं श्रीहरि द्वारा उपस्थित होकर अपने भक्त की लाज रखने और करोड़ों रुपए का मायरा भरने की कथा का संगीतमय वर्णन किया गया और रस्म निभाई गई। नरसी भक्त ने भी कड़ी तपस्या कर भगवान को याद किया तो उनको आना पड़ा और मायरा भरना पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त नरसी मेहता ने जब अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया तब उन्हें भगवान का साक्षात्कार हुआ। हमें भी लोभ, लालच व मोह का त्याग कर भगवान के प्रति समर्पण भाव से भक्ति करनी चाहिए। मनुष्य की तृष्णा कभी शांत नहीं होती, तृष्णा शांत हो जाए, तब ही प्रभु मिलन संभव है।
कथा के दौरान मंजू डागा, विकास वैष्णव व भुवनेश वैष्णव द्वारा प्रसंग से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति पर सुदामा की झांकी बने सवाई राम चौधरी सहित नन्हे मुन्ने बच्चें, महिलाएं व भक्त झूमते हुए भक्ति में सराबोर नजर आए।




