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Friday, July 10, 2026, 6:41 pm

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विनय, विवेक व जयणा धर्म का प्राण है : जगतपूज्य विजय

राखी पुरोहित. जोधपुर

क्रिया भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए जगतपूज्य विजय महाराज ने कहा कि विनय, विवेक व जयणा धर्म का प्राण है। उन्होंने कहा कि यथाशक्ति चार माह तक तपस्या कर आत्म कल्याण का लक्ष्य रखना चाहिए। तप तपस्या पर बोलते हुए मुनि ने कहा चार माह चातुर्मासिक तप ऐकासना 45 आगम तप व 25 दिन का ईंद्रीय जप तप आदि तपों पर विस्तार से प्रकाश डाला व कहा विभिन्न तप तपस्या अवश्यमेव करनी चाहिए तप तपस्या से कर्मो का क्षय होता है।
संघ प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने बताया जैनाचार्य रामचन्द्र सुरीश्वर के समुदायवर्ती आचार्य तपोरत्नसुरीश्वर के शिष्य रत्न अध्यात्मक प्रवचनकारक जगतरत्नविजय महाराज एवं साध्वी क्षीणमोहाश्री के सानिध्य में सामायिक आराधना परमात्मा पूजन सामायिक स्वाध्याय तप जप आराधना साधना की गई। संघ अध्यक्ष हनुमानचंद तातेड, सचिव उम्मेदराज रांका व संयोजक रिकबराज बोहरा विनायकिया ने बताया गुरु भगवंत का आत्म कल्याणकारी प्रवचन क्रिया भवन में नियमित प्रातः 9:15 बजे से 10:15 तक रहेगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor