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Thursday, July 9, 2026, 4:41 am

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इस ब्रह्मांड में ऐसे भी ग्रह हैं जहां केवल या तो स्त्रियां हैं या केवल पुरुष, वहां स्त्रियों के बच्चे स्त्री ही होते हैं या पुरुषों के केवल पुरुष ही संतान होती है

ब्रह्मांड के रहस्यों को पूरी तरह कोई नहीं जान सका है, केबी व्यास का यह आलेख भी ब्रह्मांड के रहस्यों पर प्रकाश डालता है वहीं अमेरिका की क्लोनिंग टेक्नोलॉजी और एडवांस साइंस की ओर इशारा करता है। साथ ही समाज में स्त्री-पुरुष के आपसी रिश्तों का भावनात्मक चित्रण भी करता है।

केबी व्यास. दुबई

आप कोई भी हों स्त्री या पुरुष। जीवन के धरातल पर एक हैं। ना कोई कम ना कोई ज्यादा। बस एक अलग पहचान है दोनों की।अलग अलग गुणधर्म हैं दोनों के। जीवन में दोनों रूप समाए हुए हैं। एक रूप जब उभर कर आता है तो उसी व्यक्ति में दूसरा रूप छुपा रहता है। इसीलिए अगले जन्म में हम किसी दूसरे लिंग के रूप में जन्म ले सकते हैं। जीवन का लिंग चुनने के लिए हम स्वतंत्र हैं। इसलिए हम कुछ भी बन सकते हैं स्त्री या पुरुष।

यदि हम एक तरह से हम स्वतंत्र नहीं होते अपना लिंग चुनने के लिए तो वो केवल कर्मों के फलस्वरूप होता है। हम पुरुष हो कर स्त्री को तुच्छ समझते हों या स्त्री होकर पुरुष को तुच्छ समझते हों। तब हम स्वतंत्र नहीं होते। तब हम बंध जाते हैं। हममें व्यवधान आ जाता है। हमारे कर्मों की गति में बाधा आ जाती है। तब हमें कर्मों के फलस्वरूप जो हमने किया है वही भोगना भी पड़ता है। यह प्रकृति का नियम है। इसलिए पुरुष एवं स्त्री को समान दृष्टि से देखना चाहिये। ना कोई कम ना कोई ज्यादा। दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं। यदि हम ऐसा करते हैं तब हम मुक्त होते हैं। स्वतंत्र होते हैं अगले जन्म में अपना लिंग चुनने के लिए।
स्त्री स्वभावतः कोमल मानी जाती है। लेकिन कोमल का अर्थ यह नहीं है कि उसमें जोश नहीं है। पुरुष स्वभावतः इसके विपरीत पाए जाते है। कठोर होते हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनमें प्रेम की धारा नहीं बहती। दोनों अलग अलग तरीकों से अपने गुणों का प्रदर्शन करते हैं। स्त्री की भीतर की शक्ति बहुत मजबूत होती है और पुरुष की बाहर की शक्ति बहुत मजबूत होती है। दोनों के मेल से संतति की उत्पति हुआ करती है। लेकिन चूंकि स्त्री की भीतर की शक्ति मजबूत होती है वह गर्भ धारण करती है। वो नौ महीने तक एक नया जीवन अपने में समेटे रहती है इसलिए वो महान कहलाती है। परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि पुरुष की कोई कद्र ही नहीं। जहां पुरुष नहीं हैं वहां एकल परिवार चलाने के लिए भी बहुत पेचीदगियां होती हैं। परिवार माता और पिता दोनों के आपसी सामंजस्य से चलता है।

पृथ्वी और ब्रह्मांड में स्त्री-पुरुष : एक अवलोकन

हमारी पृथ्वी में हर जीवित वस्तु का स्त्रीलिंग और पुल्लिंग है। नर और मादा है।  जानवरों में। पशु पक्षियों में यहां तक कि फूलों में भी । हर एक जो जीवित है उसमें स्त्रीलिंग और पुल्लिंग है। परन्तु इस ब्रह्मांड में ऐसे भी ग्रह हैं जहां केवल या तो स्त्रियां हैं या केवल पुरुष। वहां स्त्रियों के बच्चे स्त्री ही होते हैं या पुरुषों के केवल पुरुष ही संतान होती है। अब आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि ये कैसे हो सकता है। ये तो संभव ही नहीं है। लेकिन ऐसा होता है। उन ग्रहों पर विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है कि ये संभव है। हमारी धरती पर अभी 20 वीं शताब्दी में ही विज्ञान ने क्लोनिंग के बारे में बताया है। इसमें वैज्ञानिक शरीर का एक ऊतक लेकर इंसान बना सकते हैं। ऐसा अभी जानवरों में हुआ है। जिसमें आपस में क्रॉस करवाने के लिए नर और मादा दोनों की जरूरत नहीं पड़ती। किसी भी एक का। वो चाहे नर हो या मादा का एक ऊतक लिया। उसे प्रक्रम में डाला और वही नया जानवर बन गया।

अमेरिका ने मानव क्लोन बना लिया है, दुनिया से छुपा कर रखा है

कहते हैं कि अमेरिका में गुप्त रूप से मनुष्यों में भी हुआ है और मनुष्यों से इस तरह जो मनुष्य पैदा हुए हैं। उनमें स्त्री या पुरुष का इस्तेमाल नहीं किया गया। उसमें स्त्री या पुरुष में से एक का उत्तक को ले कर आगे प्रक्रम में डाल कर मानव का बच्चा बना लिया गया। इसे मानव क्लोन का नाम दिया गया है। लेकिन उन्हें तमाम दुनिया से छुपा कर रखा हुआ है और कहते हैं करीब 20.25 वर्षों से इस पर शोध चल रहा है। अमेरिका दुनिया से पांच सौ वर्ष आगे है। मगर विज्ञान का विस्तार इतना बड़ा है कि हम पृथ्वीवासी अभी इसमें बहुत पीछे हैं। बहरहाल पुनः पृथ्वी पर आते हैं। यहां विपरीत लिंग से प्रेम हो जाना स्वाभाविक माना गया है। यहां स्त्री और पुरुष दोनों का मेल जोल है। भारत के कई समाज में स्त्री शादी के बाद पुरुष के घर जाती है और दक्षिण में कई समाज में शादी के बाद पुरुष स्त्री के घर जाता है। यानी सब कुछ होता है। यदि ऐसे में कोई स्त्री या पुरुष को कम आंके तो स्वयं पाप का भागी बनता है। स्त्री और पुरुष केवल पृथ्वी पर खूबसूरत रंग भरने के लिए अलग अलग जन्म लेते हैं। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। ना कोई बड़ा ना कोई छोटा। दोनों एक समान हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor