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Sunday, August 23, 2026, 5:57 am

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Lifestyle

नीलम व्यास स्वयं सिद्धा की कविताएं

भारत माता

भारत माता के चरणों में
नित नित शीश झुकाते है।

तन मन अर्पण करके हम तो,
देश भक्ति नित दिखलाते है।

उत्तर में हिमाला साजे है इसके,
चरणों कों गंगा पखारे है इसके।

मातृ भूमि पे बलि बलि जावे हम,
कटा शीश भेंट कों चढ़ाते है हम।

शस्य श्यामला धरणी सजी हमारी,
खिले नित फल फूलों की फुलवारी।

हे भारत माता हम तेरे सपूत है,
नित स्तुति गान हम करतें है।

नव पीढ़ी नव कोंपल से बच्चें हैं,
देश भक्ति भाव नित दिखलाते है।

कोटि कोटि नमन भारत माता कों,
शोणित धार अर्पित तव पद कों।

दुश्मनों कों मार गिराते हैं सैनिक,
सीमा पर तैनात सजग हैं सैनिक।

जय जय का जयकारा नित करतें,
भारत माता का गौरव गान करतें।

नीलम व्यास स्वयंसिद्धा

पर्यावरण दिवस संकल्प

धरती है कराहती,
बोझ अधिक सहती,
प्रकृति सँवार कर,
पर्यावरण साधिए।

पेड़ उगाओ जी अब,
हरियाली पाओ तब,
शुद्ध हवा पानी फिर,
सब लोग पाइए।

प्राण वायु ऑक्सीजन,
वृक्ष से ही पाते जन,
शोषण दोहन बन्द,
सब कर जाइए।

नदियां पहाड़ सूने
चाँद तारे दुख डूबे,
धरा जार जार रोती,
उद्धार ना पाइए।

हरियाली फल फूल,वि

कसाओ कंद मूल,

खेती हरी भरी करो,
अन्न उपजाइए।

ताजा हवा पानी होगा,
प्रदूषण दूर होगा,
शुद्ध आबो हवा मिले,
धरा को सुधारिए।

पर्यावरण सुधारों,
संरक्षण सब करो,
महामारी संकट को,
अब तो भगाइए।

करो संकल्प मिल के,
वृक्ष उगाओ खिल के,
जीवन को हरा भरा,
स्वर्ग भी बनाइए।

नीलम व्यास स्वयमसिद्धा

किताब

वे किताबें जो हमारे साथ को चाहे सदा ही।
वो कहानी जो हमारे प्यार को दे दे वफ़ा ही।

कौन जाने ये किताबे है समेटे राज सारे।
शब्द सारे है विचारे जो लिखाते प्रेम को ही।

आपकी आहे सजाती जो किताबें हैं बताती।
रूह को छू ले हमारी वो कहानी आपकी ही।

जान मेरी हो बतानी आज प्यासी हूँ दिवानी।
होश छीने आपके नैना निहारू यार को ही।

हो दिवानी गीत गाती प्यार मेरा आशिकाना।
छेड़ दो वो राग मीठा जो लुभाता आपको ही।

*नील*चाहे वो किताबे प्रेम पाती जो सिखाती।
शब्द मेरे है किताबी मोह लेते हैं सदा ही।

नीलम व्यास *स्वयमसिद्धा*

गीत

प्यार का गीत लिखूँ

रीत जगत की प्रीत लिखूँ मैं,
तुमको अपना मीत लिखूँ ।
साँसों की लय पर जो गूँजे,
ऐसा प्यारा गीत लिखूँ ।

धड़कन धड़कन कहती प्रीतम,
तुम ही हो प्यार सुहाने।
तड़पन तड़पन सहती रहती ,
तुम हो दिल बर दीवाने।
पल पल में जो याद सताती,
ऐसा जिया सुजीत लिखूँ।
साँसों की लय पर जो गूँजें ,
ऐसा प्यारा गीत लिखूँ।।

वसंत बन कर आये साथी,
हृदय कोंपल को खिलाते।
कुसुमित मन आँगन कर देते
भानु रश्मि उजली लाते।
महक बहक रही कली प्रियतम ,
वो मधुमास पुनीत लिखूँ।
साँसों की लय पर जो गूँजे,
ऐसा प्यारा गीत लिखूँ।।

रोज लिखती पाती लहू से,
दिल का हाल बतला रही।
कैसे बीते तुम बिन जीवन ,
मन की घुटन जतला रही।
फ़ागुन की मस्ती हैं छाई,
रंगीला सनम को लिखूँ।
साँसों की लय पर जो गूँजें,
ऐसा प्यारा गीत लिखूँ।

विरहन जलती पल पल रोती,
प्यार की फुहार चाहती
अंग अंग को रंग लगें,
मान मनुहार हूँ प्रिय रति।
सतरंगी सपनें मन देखें,
प्रिय छवि पर दिल हार लिखूँ।
साँसों की लय पर जो गूँजे,
ऐसा प्यारा गीत लिखूँ।

रीत जगत की प्रीत लिखूँ मैं,

तुमको अपना मीत लिखूँ।

साँसों की लय पर जो गूँजे,

ऐसा प्यारा गीत लिखूँ ।।।

नीलम व्यास स्वयमसिद्धा

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor