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Sunday, August 23, 2026, 8:46 am

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जोधपुर के साहित्य गौरव डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ को राष्ट्रीय स्तर पर ‘शब्द साधक सम्मान 2025’ मिलेगा

राखी पुरोहित. जोधपुर 

चिकित्सा क्षेत्र में प्रतिष्ठित सेवा देने के बाद साहित्य की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ को उनकी साहित्यिक रचनाओं के लिए ‘शब्द साधक सम्मान 2025’ हेतु चयनित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद स्थित काव्य कला सेवा संस्थान (पंजीकृत) मोहनिया द्वारा उनकी चर्चित पुस्तक ‘अनुभूति से अभिव्यक्ति’ के लिए प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें संभावित रूप से नवंबर 2025 में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा।

डॉ. आर्य जो पूर्व में राजकीय सैटेलाइट चिकित्सालय जोधपुर में 9 वर्षों तक पीएमओ व अतिरिक्त अधीक्षक के रूप में कार्यरत रहे, सेवानिवृत्ति के बाद साहित्य सेवा में सक्रिय हुए। उन्होंने लेख, कविताएं और चार पुस्तकें लिखकर राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर के साहित्य जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

साहित्यिक योगदान और सम्मान
डॉ. आर्य की साहित्यिक यात्रा को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहना मिली है। उन्हें उदयपुर में ‘राष्ट्रीय अदबी उड़ान बहुआयामी हिंदी साहित्य सम्मान’, हरियाणा में ‘निर्मला अंतर्राष्ट्रीय हिंदी साहित्य गौरव सम्मान 2024’, और मध्यप्रदेश गाडरवारा से ‘चेतना साहित्य सम्मान 2025’ से नवाजा जा चुका है। उनके काव्य संग्रहों में राष्ट्र प्रेम, संविधानसम्मत चेतना, समानता और सामाजिक न्याय की मुखर अभिव्यक्ति मिलती है।

बाल साहित्य के क्षेत्र में भी डॉ. आर्य ने उल्लेखनीय कार्य किया है। उनकी कविताएं राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘मधुमति’ में चार बार प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने जापानी हाइकु विधा पर दो पुस्तकें भी लिखी हैं, जो साहित्य के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप से उनके जुड़ाव को दर्शाती हैं।

समाज में सम्मान और उत्सव का माहौल
इस प्रतिष्ठित सम्मान की घोषणा के बाद डॉ. आर्य के परिवार और जोधपुर समाज में हर्ष की लहर है। कुर्ड़िया कुटुंब के सचिव एडवोकेट प्रशांत, डॉ. विकास, सुरेश कुमार, गगन और साईनाथ हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक मुकेश प्रजापत ने उन्हें साफा पहनाकर और माल्यार्पण कर सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. भारती, एडवोकेट एम.एल. परिहार और मध्यप्रदेश के साहित्यकार विजय नामदेव बेशर्म ने भी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

साहित्य: समाज का दर्पण
डॉ. आर्य का मानना है कि साहित्य केवल सम्मान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के संस्कारों का संवर्धन, मार्गदर्शन और समाज का आईना होता है। उनकी लेखनी में यही प्रतिबिंबित होता है— न्याय, अधिकार, जागरूकता और राष्ट्र सेवा का भाव।

जोधपुर और राजस्थान के लिए गौरव का क्षण
डॉ. हस्तीमल आर्य ‘हस्ती’ की यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे जोधपुर और राजस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्हें कोटि-कोटि बधाइयां और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor