शहर में कई संस्थाएं नशामुक्ति के पवित्र कार्य में जुटी हुई हैं। इसी कड़ी में गुरुकृपा नशामुक्ति सेवा संस्था के माध्यम से युवाओं के नशामुक्ति और उनके पुनर्वास के साथ-साथ मानव सेवा के महत्वपूर्ण कार्य से जुड़े हैं गिरधारी सिंह…प्रस्तुत है उनसे लिया विशेष साक्षात्कार।
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
स्वस्थ शरीर में ही जीवन की खुशियां हैं। शरीर स्वस्थ तभी रहता है जब व्यक्ति नशे से दूर रहता है। नशा करने से आदमी बीमारियों को आमंत्रण दे देता है। साथ ही उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है और आर्थिक रूप से भी टूट जाता है। ऐसे में शहर में कई संस्थाएं नशामुक्ति के पवित्र कार्य में जुटी हुई है। इसी कड़ी में शहर में एक ऐसा शख्स है जो गुरुकृपा नशामुक्ति सेवा संस्था के माध्यम से युवाओं के नशामुक्ति और उनके पुनर्वास के साथ-साथ मानव सेवा के महत्वपूर्ण कार्य से जुड़ा हुआ है। राइजिंग भास्कर ने संस्था के संचालक गिरधारीसिंह का साक्षात्कार लिया। यह प्रस्तुत है संपादित अंश-
राइजिंग भास्कर : गुरुकृपा नशामुक्ति सेवा संस्था की स्थापना कब और किस उद्देश्य से हुई?
गिरधारी सिंह: गुरुकृपा नशामुक्ति सेवा संस्था की स्थापना वर्ष 2015 में इस संकल्प के साथ की गई थी कि समाज में बढ़ते नशे के दुष्प्रभावों को कम किया जाए और नशा पीड़ित लोगों को सही दिशा देकर उन्हें एक सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जाए।
हमारा उद्देश्य है—“लोगों को नशे से दूर रखना, नशे में फंसे लोगों को बाहर निकालना और उन्हें फिर से समाज से जोड़ना।”
राइजिंग भास्कर : संस्था के तहत कौन-कौन सी सेवाएं संचालित की जाती हैं?
गिरधारी सिंह: संस्था के तत्वावधान में नशा मुक्ति परामर्श एवं पुनर्वास केंद्र संचालित किया जा रहा है।
यहां हम—
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नशा पीड़ितों को काउंसलिंग
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चिकित्सकीय सहायता
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नशा छुड़ाने का चिकित्सीय और मानसिक उपचार
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पुनर्वास
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जीवन में फिर से नई शुरुआत करने की प्रेरणा
जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं।
हमारी पूरी टीम इस कार्य को एक सामाजिक जिम्मेदारी की तरह निभाती है, न कि एक औपचारिक नौकरी की तरह।
राइजिंग भास्कर : नशा मुक्त भारत अभियान की वर्षगांठ पर संस्था ने क्या आयोजन किए?
गिरधारी सिंह: 18 नवंबर को नशा मुक्त भारत अभियान की 6वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हमने एक विशाल नशामुक्ति रैली का आयोजन किया। यह रैली हमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल व्यास की प्रेरणा से आयोजित करने का सौभाग्य मिला।
हमारी मंशा यह थी कि—युवाओं के बीच नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाई जाए और उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित किया जाए। रैली की शुरुआत मैंने हरी झंडी दिखाकर की। रैली में शामिल युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों को नशा न करने की शपथ दिलाई गई। यह क्षण वाकई प्रेरणादायक था।
राइजिंग भास्कर : नशामुक्ति रैली में किन-किन लोगों ने सहभागिता की?
गिरधारी सिंह: हमारी पूरी टीम इस अभियान में सक्रिय रही।
रैली में प्रमुख रूप से—
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सेंटर इंचार्ज भागीरथ विश्नोई
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नर्सिंग स्टाफ – महेंद्रसिंह, सुरेश ढाका, अजय सिंह, राहुल शर्मा, हिम्मत सिंह, राकेश राव, मुरली, सागर
ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
इन सभी साथियों का सहयोग हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।
राइजिंग भास्कर : आपका केंद्र मुख्य रूप से किस प्रकार नशा छोड़ने में लोगों की सहायता करता है?
गिरधारी सिंह: हमारे केंद्र में नशा छुड़ाने की प्रक्रिया को तीन चरणों में पूरा किया जाता है—
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परामर्श (Counseling):
मरीजों को समझाया जाता है कि नशा कैसे जीवन को नुकसान पहुंचा रहा है। उनकी मानसिक स्थिति को समझकर व्यक्तिगत परामर्श दिया जाता है। -
उपचार (Treatment):
अनुभवी चिकित्सकों और नर्सिंग टीम की सहायता से मरीजों को निर्धारित मेडिकल प्रक्रिया के तहत नशा छुड़ाया जाता है। -
पुनर्वास (Rehabilitation):
यह सबसे महत्त्वपूर्ण चरण है। मरीजों को नशा छोड़ने के बाद एक नया जीवन जीने की प्रेरणा दी जाती है, उन्हें रोजमर्रा की दिनचर्या में लौटने में मदद की जाती है।
हम मानते हैं कि—नशा छुड़ाना सिर्फ दवा से नहीं, बल्कि प्रेम, धैर्य और निरंतर सहयोग से होता है।
राइजिंग भास्कर : जरूरतमंदों के लिए आप लोग और कौन-कौन से सामाजिक कार्य करते हैं?
गिरधारी सिंह: नशामुक्ति के साथ-साथ हम समाज सेवा से भी जुड़े हैं। समय-समय पर—
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भोजन पैकेट
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चप्पल
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कंबल
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ऊनी कपड़े
जरूरतमंद परिवारों और बेघर लोगों में वितरित किए जाते हैं। हम मानते हैं कि समाज में कोई भी व्यक्ति भूखा, ठंडा या असहाय न रहे।
राइजिंग भास्कर : युवाओं में संस्कार और जागरूकता विकसित करने के लिए आप क्या करते हैं?
गिरधारी सिंह: हमारी युवा पीढ़ी ही देश का भविष्य है। उन्हें नशे से दूर रखने और मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हम—
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यज्ञ
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सत्संग
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योग
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ध्यान
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संस्कार कार्यक्रम
का आयोजन करते हैं। इन कार्यक्रमों से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। हम चाहते हैं कि युवा सिर्फ नशे से दूर न रहें, बल्कि सनातन संस्कृति के मूल्यों से भी जुड़े रहें।
राइजिंग भास्कर : आपके हिसाब से नशा मुक्त समाज बनाने के लिए किन बातों पर सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है?
गिरधारी सिंह: मेरे अनुसार—
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परिवार को सजग रहना चाहिए
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स्कूलों और कॉलेजों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम होने चाहिए
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युवा को खेल, कला और योग से जोड़ना चाहिए
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सरकार, समाज और संस्थाओं का संयुक्त प्रयास होना चाहिए
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नशा करने वालों को तिरस्कार नहीं, सहायता की जरूरत होती है
अगर हम इन दिशा में काम करें, तो नशे का दुष्चक्र बहुत तेजी से टूट सकता है। मैं सभी युवाओं और अभिभावकों से यही कहना चाहता हूं—“नशा जीवन को बर्बाद कर देता है, लेकिन सही समय पर उठाया गया कदम जीवन को बदल भी सकता है।” हमारी संस्था हर उस व्यक्ति के लिए हमेशा तैयार है जो नशे से बाहर निकलकर एक नई शुरुआत करना चाहता है। हमारा उद्देश्य सिर्फ नशा छुड़ाना नहीं, बल्कि लोगों को फिर से सामान्य, सम्मानजनक और खुशहाल जीवन देना है।
Author: Dilip Purohit
Group Editor












