राइजिंग भास्कर. जोधपुर
राजस्थान उच्च न्यायलय जोधपुर मे दायर रामूराम विरुद्ध सीताराम वगौरह आपराधिक पुनरिक्षण याचिका न. 904/2025 में रिपोर्टबल निर्णय माननीय न्यायाधीश श्री फ़रजंद अली द्वारा दिया गया।
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 146 के अंतर्गत दी गई शक्ति का प्रयोग कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मनमानी या स्वेच्छा से नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसका उद्देश्य कब्जे के अधिकारों का निर्णय करना है, जो स्पष्ट रूप से दीवानी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। अधिकार, स्वामित्व, कब्ज़ा और हित से संबंधित प्रश्न पूर्णतया सक्षम सिविल न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और केवल ऐसा न्यायालय ही इन पर निर्णय देने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत है। संपत्ति, जो किसी व्यक्ति की मेहनत से अर्जित पूंजी और मूल्यवान परिसंपत्ति होती है, उसमें लापरवाही से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
पक्षों के अधिकारों, स्वामित्व और हितों का निर्धारण किए बिना ऐसी संपत्ति का कब्ज़ा किसी तीसरे व्यक्ति को सौंपना कानूनन पूरी तरह से अस्वीकार्य है, विशेषकर शांति भंग या रक्तपात की किसी भी आसन्न आशंका के अभाव में। ऐसा असाधारण हस्तक्षेप केवल ऐसी स्थिति में ही उचित ठहराया जा सकता है जहाँ दोनों प्रतिद्वंद्वी दावेदार मौके पर मौजूद हों, प्रत्येक अपने-अपने अधिकारों का दावा कर रहा हो, और परिस्थितियाँ ऐसी हों कि हिंसा या रक्तपात का वास्तविक और तत्काल खतरा मंडरा रहा हो। माननीय न्यायाधीश ने कार्यपालक मजिस्ट्रेशट द्वारा की गई कार्यवाही को निरस्त कर दिया । अप्रार्थी के तरफ से एड. विमल प्रकाश छंगाणी ने व राज्य की तरफ से श्री एन. एस.चान्दावत डिप्टी. जी.ए. ने पैरवी की।








