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Sunday, October 18, 2026, 10:26 am

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Lifestyle

युवा कवयित्री शुचि गुप्ता की कविताएं

कवयित्री : शुचि गुप्ता, जोधपुर

कलम किसी की चल न पाई मेरे अथक प्रयासों पर….

गजले कविता खूब लिखी है, मेरे गालों बालों पर,

पर कलम किसी की चल न पाई, मेरे अथक प्रयासों पर।

खूब सजी हैं कविताएं, मेरे झुमकों, झंकार पर,

कौन लिखेगा ऐ कविराज! मेरी तपती रातों पर?

नयन न छोड़े, अधर न छोड़े, सब पर कविता लिख डालीं,

पर मौन रही है दुनिया अब तक, स्त्री के अधिकारों पर।

कौन सा घर है ढूँढ रही है, मायके का या शौहर का,

क्यों मकान ना नाम कर दिया, मेरे ब्याहे है जाने पर।

कविराज! श्रृंगार लिख चुके, अब जरा अस्तित्व लिखो,

झुमका छोड़ो, चूड़ी छोड़ो, स्त्री का तुम दर्द लिखो!

जो रूह को उसकी चैन मिले, एक हक का ऐसा द्वार लिखो,

कागज पर मत गहने गढ़ना, अब उसका घर बार लिखो।

000

हल निकाल लेंगे हम

हल निकाल लेंगे हम, रिश्ते संभाल लेंगे हम।

देखो तुम चिल्लाना नहीं।

हालात कुछ देर के लिए टाल लेंगे हम।

टूटता सा हो जब तुमसे कहीं, बताना मुझे।

वक्त में उलझा समय निकाल लेंगे हम।

मिलकर वो मुश्किल घड़ी काट लेंगे हम।

हर बार हल निकाल लेंगे हम।

अधिकारों से परे विषमताओं में घिरे।

रास्ता नया निकाल लेंगे हम।

धैर्य से सारा मंजर टाल लेंगे हम।

पर रिश्ते संभाल लेंगे हम।

हर बार हल निकाल लेगे हम।

000

स्त्रियां

सशक्त हैं, सरल हैं, सफल हैं स्त्रियां।

सृजन हैं, साहसी हैं, सृदृढ़ हैं स्त्रियां।

सम्मान हैं, शक्ति हैं, श्रद्धा हैं स्त्रियां।

संकल्प हैं, सजग हैं, सक्षम हैं स्त्रियां।

साधना हैं, सिद्धि हैं, सत्य हैं स्त्रियां।

समर्पण हैं, स्नेह हैं, संस्कार हैं स्त्रियां।

सृष्टि हैं, सुंदर हैं, स्वाभिमानी हैं स्त्रियां।

सार्थक हैं, सौम्य हैं, संबल हैं स्त्रियां।

साक्षी हैं, सवेरा हैं, संवेदना हैं स्त्रियां।

सुर हैं, संगम हैं, शुचि हैं स्त्रियां।

संघर्ष हैं, संतोष हैं, सौभाग्य हैं स्त्रियां।

सिंधु हैं, सरिता हैं, सामर्थ्य हैं स्त्रियां।

सहज हैं, संपूर्ण हैं, सर्वस्व हैं स्त्रियां।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor