एक आइडिया जो क्रांति का वाहक होता है..जैसलमेर के पंकज भाटिया का ऐसा ही एक आइडिया क्रांति का वाहक बन गया है। आने वाले समय में राशन वितरण व्यवस्था को आधुनिक और भी पारदर्शी बनाने की दिशा में यह सुझाव मील का पत्थर साबित होगा…मगर अफसोस केंद्र सरकार ने इस सुझाव का क्रेडिट पंकज भाटिया को नहीं दिया…। ऐसे ही जागरूक नागरिकों की वजह से ही नीति निर्धारण में मदद मिलती है…।
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
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देश में राशन वितरण व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब लाभार्थियों को मुफ्त राशन पाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होने या बार-बार अंगूठा लगाने की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। डिजिटल फूड कूपन और “अन्नपूर्ति एटीएम” जैसी नई व्यवस्था के माध्यम से राशन वितरण प्रणाली में तकनीकी क्रांति लाई जा रही है।
इस परिवर्तनकारी पहल के पीछे जो सोच और सुझाव सबसे पहले सामने आया, उसका श्रेय पंकज भाटिया को दिया जा रहा है। जैसलमेर के जागरूक नागरिक और एलआईसी विभाग में कार्यरत पंकज भाटिया ने 2 मई 2023 को नीति आयोग सहित तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अन्य संबंधित विभागों को विस्तृत सुझाव भेजा था। उनके सुझाव में राशन वितरण प्रणाली को डिजिटल और एटीएम आधारित बनाने की परिकल्पना स्पष्ट रूप से रखी गई थी।
क्या है सरकार का डिजिटल फूड कूपन प्लान?
सरकार अगले महीने चंडीगढ़, पुडुचेरी और गुजरात के तीन जिलों में डिजिटल फूड करेंसी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। इसके तहत लाभार्थियों को मोबाइल फोन पर डिजिटल कूपन प्राप्त होंगे।
इन कूपनों को राशन की दुकानों पर QR कोड स्कैन कर रिडीम किया जा सकेगा। इससे अंगूठा लगाने या बार-बार बायोमेट्रिक फेल होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्वरित होगी।
यह वही अवधारणा है जिसे पंकज भाटिया ने दो वर्ष पूर्व अपने सुझाव में रखा था—कि राशन कार्ड को डिजिटल बनाया जाए और लाभार्थी को उसके हिस्से का अनाज डिजिटल रूप से उपलब्ध कराया जाए।
“अन्नपूर्ति एटीएम” – राशन वितरण का नया युग
पंकज भाटिया ने अपने सुझाव में यह भी प्रस्ताव रखा था कि क्या गरीब परिवारों को गेहूं, चावल और बाजरा एटीएम की तर्ज पर मशीनों के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकता है?
उन्होंने सुझाव दिया था कि लाभार्थी अपनी जरूरत के अनुसार अनाज निकालें और शेष मात्रा उनके कार्ड में बैलेंस के रूप में दर्ज रहे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी को 10 किलो चावल का अधिकार है और वह केवल 2 किलो निकालता है, तो शेष 8 किलो उसके डिजिटल खाते में सुरक्षित रहे, जिसे वह बाद में अपनी सुविधा अनुसार प्राप्त कर सके।
अब सरकार ने “अन्नपूर्ति एटीएम” के रूप में इस मॉडल को अमल में लाने का निर्णय लिया है। इन मशीनों के माध्यम से 24 घंटे सातों दिन राशन उपलब्ध रहेगा। मशीन का संचालन एटीएम की तरह होगा—बायोमेट्रिक पहचान या डिजिटल सत्यापन के बाद उपभोक्ता गेहूं, चावल या बाजरा निकाल सकेंगे।
बताया जा रहा है कि एक मशीन 5 मिनट में 50 किलो तक अनाज वितरित कर सकती है। इससे प्रतीक्षा समय में लगभग 70 प्रतिशत तक कमी आएगी। लंबी कतारों की समस्या खत्म होगी और वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी।
राजस्थान में पायलट की तैयारी
राजस्थान के भरतपुर, जयपुर और बीकानेर में भी जल्द पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की तैयारी है। यह व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ता 24 घंटे में किसी भी समय राशन ले सकेंगे।
यह प्रणाली न केवल सुविधा देगी बल्कि भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की संभावनाओं को भी कम करेगी। मशीनें सटीक माप के साथ अनाज वितरण करेंगी, जिससे घटतौली की शिकायतें समाप्त होंगी।
पंकज भाटिया का दूरदर्शी सुझाव
पंकज भाटिया ने 2 मई 2023 को भेजे अपने पत्र में राशन वितरण को पूरी तरह डिजिटल करने और एटीएम आधारित मॉडल अपनाने का स्पष्ट खाका प्रस्तुत किया था। उन्होंने यह भी लिखा था कि इससे गरीब व्यक्ति को सम्मानजनक तरीके से, अपनी सुविधा के अनुसार, अनाज प्राप्त करने की स्वतंत्रता मिलेगी।
उनके सुझाव में पारदर्शिता, तकनीकी उपयोग और लाभार्थी की सुविधा को केंद्र में रखा गया था। यही कारण है कि आज जब नीति आयोग और केंद्र सरकार डिजिटल फूड करेंसी और ग्रेन एटीएम की दिशा में कदम बढ़ा रही है, तो इसे पंकज भाटिया के विजन का प्रतिफल माना जा रहा है। लेकिन अफसोस केंद्र सरकार की ओर से ऐसे सुझाव देने वालों की पीठ नहीं थपथपाई जाती, अगर ऐसा ही सिलसिला जारी रहा तो लोग सुझाव देने से कतराएंगे और देश में बदलाव को संबल नहीं मिल पाएगा।
वितरण व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव
नई प्रणाली से निम्नलिखित लाभ होंगे:
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24×7 अनाज उपलब्धता
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लंबी कतारों से मुक्ति
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सटीक माप और पारदर्शिता
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बायोमेट्रिक या डिजिटल सत्यापन
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आंशिक निकासी की सुविधा
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भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर रोक
डिजिटल फूड कूपन और अन्नपूर्ति एटीएम मिलकर राशन वितरण को आधुनिक, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाएंगे।
जैसलमेर से राष्ट्रीय स्तर तक
यह गौरव का विषय है कि देशव्यापी बदलाव की यह अवधारणा जैसलमेर के एक जागरूक नागरिक के सुझाव से प्रारंभ हुई। पंकज भाटिया का यह प्रयास दर्शाता है कि यदि आम नागरिक भी सकारात्मक सोच और नवाचार के साथ सुझाव दें, तो वे राष्ट्रीय नीति निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
आज जब सरकार ने डिजिटल राशन वितरण और ग्रेन एटीएम की दिशा में ठोस निर्णय लिए हैं, तो यह स्पष्ट है कि पंकज भाटिया की दूरदर्शी सोच ने इस परिवर्तन की नींव रखी।
राशन वितरण प्रणाली में यह बदलाव केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के सम्मान और सुविधा का नया अध्याय है। आने वाले समय में जब यह व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी, तो इसे उस सोच के रूप में याद किया जाएगा जिसने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को डिजिटल युग में प्रवेश कराया—और जिसकी प्रेरणा जैसलमेर से उठी।
Author: Dilip Purohit
Group Editor








