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Thursday, February 26, 2026, 3:23 am

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‘30 रुपये में राहत’: गोल्फ कार्ट टैक्सी से टूटी पुरानी मोनोपॉली, पर्यटकों को मिली नई आज़ादी

स्वर्णनगरी में नगर परिषद की पहल से बदले हालात; मनमानी किराया वसूली और कथित ‘लूट तंत्र’ पर लगा ब्रेक

दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी जैसलमेर में नगर परिषद द्वारा शुरू की गई गोल्फ कार्ट टैक्सी सेवा ने शहर की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला दिया है। मात्र 30 रुपये प्रति व्यक्ति के शुल्क पर उपलब्ध यह सुविधा आमजन और पर्यटकों—दोनों के लिए राहत बनकर सामने आई है। वर्षों से किले के आसपास व्याप्त अव्यवस्था, मनमानी किराया वसूली और कथित मोनोपॉली की शिकायतों के बीच यह कदम एक निर्णायक हस्तक्षेप माना जा रहा है।

अखेप्रोल के बाहर से शुरू होता था ‘मोलभाव’

स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना रहा है कि किले की अखेप्रोल के बाहर वर्षों से कुछ टैक्सी चालकों का दबदबा रहा। आरोप रहे कि तय रूट से बाहर जाने से मना करना, दूरी के अनुपात में तीन-तीन गुना किराया बताना और बुजुर्ग/बीमार यात्रियों को असुविधा में डालना आम बात थी।

रिपोर्टर के स्वयं के अनुभव सहित कई शिकायतें बताती हैं कि कई बार पर्यटकों को विकल्पहीन स्थिति में ऊंचा किराया देना पड़ा। ऐसे माहौल में गोल्फ कार्ट सेवा का आगमन प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता का संकेत देता है।

30 रुपये में तय किराया, पारदर्शी व्यवस्था

नगर परिषद की इस सेवा का सबसे बड़ा लाभ तय और सार्वजनिक किराया है। प्रति व्यक्ति 30 रुपये की दर से गोल्फ कार्ट टैक्सी उपलब्ध है, जिससे यात्रियों को पहले से लागत का अंदाजा रहता है।

यह मॉडल—

  • मनमाने मोलभाव को कम करता है,

  • कतार और अव्यवस्था घटाता है,

  • बुजुर्गों व दिव्यांगों को सुविधा देता है,

  • और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाता है।

पर्यटन शहरों में “लास्ट-माइल कनेक्टिविटी” सबसे बड़ी चुनौती होती है। कम दूरी के लिए सुलभ, स्वच्छ और किफायती विकल्प शहर की छवि को मजबूत करते हैं।

तीन दशक की कथित मोनोपॉली पर सवाल

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चर्चा रही कि सीमित समूह का वर्चस्व बना रहा। यदि वर्षों से कोई असंतुलन था, तो उसे सुधारना प्रशासन का दायित्व है। प्रतिस्पर्धा से ही सेवा की गुणवत्ता बढ़ती है।

अब जब नगर परिषद ने वैकल्पिक सेवा शुरू की है, तो इसे “रोजगार छीनने” के बजाय “व्यवस्था सुधार” के रूप में देखा जाना चाहिए। सार्वजनिक नीति का उद्देश्य उपभोक्ता हित और सुगम परिवहन है—न कि किसी एक समूह की स्थायी बढ़त।

विरोध और वेतन की मांग: क्या है तर्क?

टैक्सी यूनियन के नेता विक्रम चूरा ने मांग रखी है कि स्थानीय टैक्सी चालकों को गोल्फ कार्ट सेवा में चालक के रूप में शामिल कर 7–8 घंटे ड्यूटी के साथ 20–25 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए।

रोजगार की मांग अपने आप में अनुचित नहीं, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि—

  • क्या नगर परिषद की सेवा सार्वजनिक-हित मॉडल पर आधारित है?

  • क्या सभी इच्छुक चालकों के लिए समान अवसर की पारदर्शी प्रक्रिया होगी?

  • क्या वेतन संरचना वित्तीय रूप से टिकाऊ है?

यदि रोजगार सृजन की बात है, तो खुली भर्ती, प्रशिक्षण और योग्यता आधारित चयन ही न्यायसंगत रास्ता है—न कि दबाव या आंदोलन की चेतावनी।

बुजुर्ग और बीमार यात्रियों को राहत

पहले किले तक पहुंचना कई बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए कठिन था। तय और सुलभ गोल्फ कार्ट सेवा से उन्हें सीधी, सुरक्षित और किफायती सवारी मिल रही है। यह पर्यटन-हित के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

पर्यटन का अर्थ केवल स्मारक नहीं, बल्कि आगंतुक का समग्र अनुभव है—आगमन से प्रस्थान तक।

‘लूट तंत्र’ पर ब्रेक या नई शुरुआत?

आरोपों की सच्चाई का निर्धारण जांच का विषय हो सकता है, परंतु यदि लंबे समय से शिकायतें थीं, तो नई सेवा स्वाभाविक रूप से स्वागत योग्य है। प्रतिस्पर्धी विकल्प उपलब्ध होने पर—

  • किराये स्वतः संतुलित होते हैं,

  • सेवा का व्यवहार सुधरता है,

  • और जवाबदेही बढ़ती है।

यह किसी समूह के खिलाफ कदम नहीं, बल्कि उपभोक्ता के पक्ष में कदम है।

प्रशासन के लिए सुझाव: स्थानीय बनाम पर्यटक दर

योजना को और न्यायपूर्ण बनाने के लिए एक व्यवहारिक सुझाव यह हो सकता है कि—

  • स्थानीय निवासियों के लिए प्रति व्यक्ति 10 रुपये,

  • और पर्यटकों के लिए 30 रुपये का शुल्क रखा जाए।

इससे स्थानीय नागरिकों को अतिरिक्त राहत मिलेगी, जबकि सेवा आर्थिक रूप से टिकाऊ भी रहेगी। कई पर्यटन शहरों में “लोकल-डिस्काउंट” मॉडल अपनाया जाता है।

पारदर्शिता और नियमन जरूरी

योजना की सफलता के लिए कुछ कदम अहम होंगे—

  1. स्पष्ट रूट और स्टॉपेज की घोषणा

  2. ऑनलाइन/डिजिटल टिकटिंग की व्यवस्था

  3. शिकायत निवारण हेल्पलाइन

  4. जीपीएस ट्रैकिंग और सुरक्षा मानक

  5. समय-समय पर किराया और सेवा समीक्षा

यदि यह ढांचा मजबूत रहेगा, तो गोल्फ कार्ट सेवा स्थायी समाधान बन सकती है।

पर्यटन छवि पर सकारात्मक असर

जैसलमेर की पहचान उसकी स्वर्णिम विरासत से है। एक सुव्यवस्थित, सस्ती और सुलभ परिवहन सेवा शहर की छवि को और सुदृढ़ करेगी। पर्यटक जब बिना तनाव, बिना मोलभाव और बिना असुविधा के किले तक पहुंचेंगे, तो वे सकारात्मक अनुभव लेकर लौटेंगे। यही शहर के दीर्घकालिक हित में है।

उपभोक्ता हित सर्वोपरि

नगर परिषद की गोल्फ कार्ट टैक्सी पहल उपभोक्ता-हित में उठाया गया कदम है। यदि पहले व्यवस्था में असंतुलन था, तो सुधार आवश्यक था। विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक सुविधा को बाधित करना समाधान नहीं।

रोजगार की मांग हो तो वह पारदर्शी प्रक्रिया से पूरी हो; पर किसी भी सूरत में मनमानी किराया वसूली या कथित मोनोपॉली की वापसी नहीं होनी चाहिए। जैसलमेर जैसे विश्व-प्रसिद्ध शहर में परिवहन सेवा का उद्देश्य साफ है—सुविधा, पारदर्शिता और सम्मान। गोल्फ कार्ट टैक्सी इसी दिशा में एक मजबूत कदम है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor