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Sunday, August 23, 2026, 5:17 am

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शिवम नाट्यालय द्वारा 64 बालिकाओं को दिया “शिवम् नृत्य श्री” अवार्ड

भगवान पंवार. जोधपुर 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शिवम नाट्यालय द्वारा संस्था से अरंगेत्रम की हुई 64 बालिकाओं को “शिवम नृत्य-श्री” अवार्ड से सम्मानित किया गया। लघु उद्योग भारती बासनी में आयोजित सम्मान समारोह मे भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी जागरूकता दिखाते हुए 9 से 10 वर्षों तक अपनी बालिकाओं को आज के पश्चात संस्कृति के बढ़ते हुए दौर में भारतीय संस्कृति के साथ जुड़े रहने का और बालिकाओं को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक रहने का जो बीड़ा माताओं ने उठाया है, उसके लिए उन सभी महिलाओं को संस्था द्वारा सम्मानित किया गया।

संस्था की संचालिका गुरु डॉक्टर मंजूषा चंद्रभूषण सक्सेना ने बताया कि मरुधरा की धरती पर रहकर तमिलनाडु की नृत्य कला “भरतनाट्यम” को अपनाकर जोधपुर की उन महिलाओं ने अपने कला की समझ को समाज के आगे रखकर, परिवार से विरोध सहकर अपनी बालिकाओं को भरतनाट्यम नृत्य कला के प्रति जागरूक रखते हुए अपने कला पारखी होने का जो प्रमाण दिया है, उसके लिए शिवम नाट्यालय द्वारा उन महिलाओं को “कला-पारखी” सम्मान से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में आईपीएस ऑफिसर (डी सी पी,जोधपुर ईस्ट) मैडम पी डी नित्या, वरिष्ठ लेखिका डॉ.पद्मजा शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर म्यूजिक डिपार्मेंट जेएनवीयू डॉ. स्वाति शर्मा उपस्थित थे।

डीसीपी नित्या ने संस्था की सराहना करते हुए भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता दिखाने व जोधपुर की बालिकाओं में कला को बारीकी से पिरोने के लिए डॉक्टर मंजूषा की सराहना की। डॉ पद्मजा ने कहा कि प्रतिष्ठित महिलाओं का सम्मान तो हर जगह होता है लेकिन ऐसी महिलाएं जो अपने बच्चों के अंदर भारतीय संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रही हैं। और 9 से 10 साल लगातार भरतनाट्यम की इस कठिन विद्या को सिखाने में अपना योगदान दे रही हैं, उनको सम्मानित करते हुए मैं बहुत गौरव का अनुभव कर रही हूं। डॉ स्वाति शर्मा ने सभी को संगीत और नृत्य से जुड़े रहने का आग्रह किया। संगीत और नृत्य ऐसी विधा है जो मनुष्य को हर तनाव से दूर रखती है और आज की बढ़ाते हुए प्रदूषित माहौल में संगीत और नृत्य आम आदमी को मानसिक संतुलित रखने में बहुत सहयोग करता है। संस्था के उपाध्यक्ष हर्ष चंद्रभूषण एवं सौम्या चंद्रभूषण ने सभी महिलाओं एवं अतिथियों का आभार प्रकट किया। मंच संचालन श्री प्रमोद सिंघल जी ने किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor