सुनील वर्मा. जोधपुर
राजकीय सुमेर सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय में टैगोर जयंती पर व्याख्यान आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. देवीलाल पंवार ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर बंग्ला और भारत के ही नहीं बल्कि विश्व प्रसिद्ध कवि थे | इन्हें रविन्द्र कविन्द्र भी कहा जाता है ।
वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे | 1913 में अपनी काव्यरचना ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला वे पहले एशियाई और गैर यूरोपियन थे जिन्हें यह पुरस्कार मिला । वे 8 वर्ष की उम्र में ही कविता लिखने लगे थे । उनका जन गण मन हमारा राष्ट्रगान है। उनका गोरा उपन्यास बहुत लोकप्रिय हुआ । ‘काबुलीवाला’ उनकी प्रसिद्ध कहानी में गिनी जाती है । वे महानकवि, साहित्यकार, दार्शनिक, चित्रकार और समाजसुधारक थे । वे मानवतावाद और भारतीय संस्कृति के समर्थक थे । कार्यक्रम का समापन रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ |


