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Sunday, August 23, 2026, 4:40 am

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विजयदान देथा के शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट जारी हो

राखी पुरोहित. बीकानेर
राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं लोक को समर्पित महान् विद्वान पद्मश्री विजयदान देथा का यह शताब्दी वर्ष है। (1926-2026) । इसी संदर्भ में साहित्य अकादेमी नई दिल्ली से पुरस्कृत राजस्थानी के तीन वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी, कमल रंगा एवं मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने साझा रूप से भारत सरकार से अनुरोध किया है कि पद्मश्री देथा जिन्होंने राजस्थान की लोक संस्कृति-लोक कथाओं को राष्ट्रीय ही नहीं विश्व स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने इस बाबत बताया कि पदमश्री देथा को नोबल पुरस्कार के लिए 2012 में नामित किया गया था, पद्मश्री देथा ने ‘बातां री फुलवारी’ को 14 भागों में सृजित कर एक अनूठा एवं महत्वपूर्ण सृजनात्मक उपक्रम किया। आपकी रचनाओं में माटी की सौरम, लोक जीवन की संवेदनाएं और सामाजिक चेतना एवं मानवीय चेतना का अद्भूत समावेश देखने को मिलता है।
मालचंद तिवाड़ी ने बताया कि ‘बातां री फुलवारी’ के करीब 10 भागों का हिन्दी में अनुवाद करने का मुझे सौभाग्य उनके सान्निध्य में बोरूंदा में मिला। ‘बातां री फुलवारी’  भारतीय भाषाओं में ही नहीं विश्व साहित्य की अमूल्य धरोहर है।
कमल रंगा ने बताया कि पद्मश्री देथा साहित्य-संस्कृति एवं लोक की वो विभूति थे, जिन्होंने 1955 से निरन्तर राजस्थानी में ही सृजन करने के अपने संकल्प का निवर्हन जीवन पर्यन्त किया। आपको साहित्य अकादेमी की प्रतिष्ठित महत्तर फैलोशिप 2004 में विज्ञान भवन में अकादेमी के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें प्रदत्त की गई, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साहित्यिक घटना रही।
कमल रंगा, मालचंद तिवाड़ी एवं मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने साझा रूप से बताया कि विजयदान देथा का यह शताब्दी वर्ष 1 सितम्बर 2026 तक है। अतः इस शताब्दी वर्ष में लोक साहित्य-संस्कृति और राजस्थानी भाषा-साहित्य को सम्मान देने का अवसर है। ऐसे में भारत सरकार द्वारा उनके नाम से विशेष डाक टिकट जारी किया जाना उनके महान् साहित्यिक-सांस्कृतिक अवदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करना होगा। जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा तो मिलेगी ही एवं करोड़ों लोगों की भाषा साहित्य और संस्कृति को सम्मान प्रदान करना होगा।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor