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Sunday, August 23, 2026, 4:04 am

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साहित्यकार किरण राजपुरोहित को पीएचडी की उपाधि

राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता विषयक राजनीतिक अध्ययन शोध पर दी गई डाक्ट्रेट की यह उपाधि।

राखी पुरोहित. बीकानेर

राजस्थानी की प्रख्यात साहित्यकार और लोक चेतना की प्रहरी राजस्थली के संपादक मण्डल की सदस्या किरण राजपुरोहित ‘नितिला’ को माधव विश्वविद्यालय ने पीएचडी पूर्ण करने पर डाक्ट्रेट की उपाधि से अलंकृत किया है।

इस आशय की जानकारी देते हुए मरूभूमि शोध संस्थान के कार्यालय सचिव साहित्यकार रवि पुरोहित ने बताया कि श्रीमती किरण ने ‘राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता: एक राजनीतिक अध्ययन’ विषय पर अपना शोध डॉ.विशाल भट्टाचार्य सहायक प्रोफेसर के निर्देशन में पूर्ण किया है। जीवन का ध्येय राजस्थानी के सर्वांगीण विकास को बताते हुए राजस्थानी मान्यता आंदोलन का हिस्सा रही शोधार्थी किरण राजपुरोहित ने अलंकरण समारोह में कहा कि 8 करोड़ राजस्थानियों की मातृभाषा में शिक्षा व रोजगार उनका मौलिक अधिकार है लेकिन राजनीतिक उपेक्षा के कारण तमाम प्रयासों के बाद भी राजस्थानी को आजादी के 80 वर्षों बाद भी संवैधानिक मान्यता नहीं है।

प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा राजस्थानी की बजाय हिंदी व अंग्रेजी होने से राजस्थानी बालक का नैसर्गिक विकास अवरुद्ध होता है और प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा , इतिहास व संस्कृति के प्रश्न न होने से राजस्थानी अभ्यर्थी अपने ही राज्य की नौकरी में नहीं आ पाता। सभी पदों पर अन्य भाषायी अभ्यर्थी ही आते हैं । इसलिए राजस्थान दूसरे मातृभाषी प्रेमी राज्यों जैसा विकास नहीं कर पाया बल्कि स्कूल ड्रॉप आउट, बेरोजगारी व पलायन बढा है। राजस्थान प्रदेश का विकास राजस्थानी न होने के कारण बहुत प्रभावित हुआ है ।
साहित्यकार श्याम महर्षि ने कहा कि ज्यूं सैंणी तितली, कांठळ, नेव निवाळी, गुड़िया रा बाळ, आंख्यां आळा आंधा अर झर-झर निर्झर आदि आधे दर्जन से अधिक साहित्यिक पुस्तकों की रचयिता डाॅ. किरण राजपुरोहित की यह उपलब्धि मातृभाषा में शिक्षा, शोध, व्यक्तित्व विकास एवं राज्य के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में प्रेरणादायक उपलब्धि है। राजपुरोहित की इस उपलब्धि पर मरूभूमि के निदेशक डाॅ. बी. एल. भादानी, डाॅ. मदन सैनी, डाॅ. गजादान चारण, डाॅ. चेतन स्वामी, रामचन्द्र राठी, विजय महर्षि, महावीर माली, श्रीभगवान सैनी, भगवती पारीक, सरोज शर्मा आदि ने प्रसन्नता व्यक्त कर इसे संस्था के लिए गौरव बताया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor