दिलीप कुमार पुरोहित. चरखी दादरी
चरखी दादरी में हिंदी साहित्य प्रचार सभा के द्वारा प्रथम क्रांति वीर मंगल पांडे की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय काव्य संगोष्ठी का आयोजन गीता भवन सभागार में किया गया। आदर्श महिला महाविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉक्टर रमाकांत शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में दुबई यूएई से पधारे कुलभूषण व्यास ने मुख्य अतिथि, वैश्य एजुकेशन सोसायटी चरखी दादरी के प्रधान बलराम गुप्ता, दादरी एजुकेशन सोसायटी की अध्यक्षा विद्या गुप्ता, विश्व हिंदू परिषद उपाध्यक्ष सुभाष जैन, पिलानी से पधारे राजन शर्मा शिक्षाविद, छंदकार योगेश समदर्शी, हिंदी साहित्य प्रचार सभा की पूर्व अध्यक्षा रोशनी शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढाई।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके एवं कंठ कोकिला पुष्पलता आर्य द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत करके किया गया। कार्यक्रम का संयोजन गजेंद्र रोहिला, लोकेश शर्मा एवं पूनम जोशी ने संभाला एवं संगोष्ठी का सफल मंच संचालन अनिल चिंतक के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के आसपास से आए साहित्यकारों ने वीर रस, शृंगार रस एवं सामाजिक चेतना जैसे विषयों पर कविता पाठ किया। संगोष्ठी की विषयवस्तु विशेष रूप से सामाजिक विकृति पर चिंतन मनन करने पर केंद्रित रही। कुलभूषण व्यास ने हाइकु तीन पंक्तियों की कविताओं के रूप में गागर में सागर वाली कहावत चरितार्थ कर दी। उन्होंने जो हाइकु सुनाए वो इस प्रकार थे
सब खोखला
पैसा रुतबा कोठी
शांति के बिना
और दूसरा हाइकु उन्होंने सुनाया
बैरी या बेली
बाहर कुछ नहीं
सभी भीतर
इसके साथ ही उन्होंने राजस्थानी द्विपदी भी सुनाई जो इस प्रकार थी
याद वे ई ज राखीजे है सा, जीवन और चरित्र ।
ज्ञान, प्रेम, मीठी वाणी रा, छिड़क गया जिका इत्र ।।
और
अहंकार रो दाग पड़े जद, सद्बुद्धि भी फिर जा ।
विनयशील व्यक्ति तो भईसा, हर हालातों तिर जा ।।
डॉक्टर रमाकांत जी ने हाथ मिलाने वाले बहुत मिले पर दिल मिलने वाला नहीं मिला, योगेश समदर्शी ने घर परिवार और संस्कारों पर अनेकों रचनाएं साझा करते हुए बताया कि साहित्य ही वो राह है जो युवाओं में संस्कार पैदा कर सकती है। इसलिए हमारे घरों के बच्चों को साहित्यिक आयोजनों से जोड़ना अनिवार्य है। कार्यक्रम में महेंद्रसिंह बिलोटिया, पूनम जोशी, महिपाल आर्य, देशराज वशिष्ठ, गिरीश चन्द्र उपाध्याय, दिनेश दर्शक शास्त्री, संदीप बाँवरा, हनवंत सिंह मकड़ौली, निर्मल शर्मा, खुशबू जैन, कौशल्या देवी, जिले सिंह शास्त्री, ज्योतिस्वरूप, जितेंद्र सिंह, अरविंद शर्मा, डॉ. महिपाल सिंह शेखावत, अध्यापिका सीमा शर्मा व अर्चना अग्रवाल एवं अन्य श्रोताओं ने कार्यक्रम की शोभा बढाई।





