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Sunday, August 23, 2026, 4:40 am

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एक महीने से खुला पड़ा 20 फीट गहरा गड्ढा, प्रशासन की नींद कब टूटेगी?

सरस्वती नगर मोड़ पर अंडरग्राउंड काम के बाद सड़क बदहाल, रोज 10-15 हजार वाहनों की आवाजाही; हादसे का खतरा बढ़ा, विकास समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

बासनी-सरस्वती नगर मोड़ पर पिछले एक महीने से अधिक समय से सड़क की हालत लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। यहां अंडरग्राउंड कार्य के लिए सड़क को काटकर करीब 20 फीट गहराई तक खुदाई की गई थी। काम पूरा होने के बाद भी सड़क को पहले की स्थिति में नहीं लौटाया गया है। गड्ढा और क्षतिग्रस्त सड़क अब हादसे को न्योता दे रही है। खास बात यह है कि यह कोई सुनसान या कम यातायात वाला रास्ता नहीं है, बल्कि सरस्वती नगर का प्रमुख कॉर्नर पॉइंट है, जहां से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से रोजाना करीब 10 से 15 हजार वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में सड़क पर लंबे समय से बनी यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके बावजूद संबंधित विभागों और प्रशासन की ओर से अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस सड़क से आम नागरिकों के साथ नगर निगम के अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और अन्य जिम्मेदार लोग रोज गुजरते हैं, उसी सड़क की यह हालत जिम्मेदारों को दिखाई क्यों नहीं दे रही?

20 फीट नीचे तक हुई थी खुदाई, सड़क अब तक नहीं हुई दुरुस्त

स्थानीय जानकारी के अनुसार अंडरग्राउंड कार्य के लिए सड़क को काटकर काफी गहराई तक खुदाई की गई थी। बताया जा रहा है कि खुदाई करीब 20 फीट तक की गई थी। जमीन के भीतर इस तरह की गहरी खुदाई के बाद सड़क को मजबूत तरीके से पुनर्निर्मित करना जरूरी होता है। लेकिन काम समाप्त होने के काफी समय बाद भी सड़क को पहले जैसी स्थिति में नहीं लाया गया। सड़क की सतह और आसपास का हिस्सा अब वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत केवल ऊपर से मिट्टी या मलबा डालकर कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जिस स्थान पर इतनी गहराई तक खुदाई की गई हो, वहां सड़क की नींव को तकनीकी मानकों के अनुसार मजबूत करना जरूरी है। अन्यथा बारिश, वाहनों के लगातार दबाव और जमीन के भीतर पानी के रिसाव के कारण सड़क फिर धंस सकती है।

रोजाना हजारों वाहन, फिर भी जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं?

सरस्वती नगर मोड़ की सबसे बड़ी विशेषता इसका भारी यातायात है। यह क्षेत्र आसपास की कई कॉलोनियों को मुख्य मार्ग से जोड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग से रोजाना 10 से 15 हजार वाहन निकलते हैं।सुबह और शाम के समय यहां यातायात का दबाव और बढ़ जाता है। सड़क के एक हिस्से की खराब स्थिति के कारण वाहनों को सीमित जगह से गुजरना पड़ता है। इससे यातायात की गति प्रभावित होती है और कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। ऐसे में सड़क का क्षतिग्रस्त हिस्सा केवल सड़क निर्माण से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह यातायात सुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुका है। यदि किसी दोपहिया वाहन चालक का संतुलन बिगड़ जाए, कोई वाहन अचानक गड्ढे या धंसे हुए हिस्से की तरफ चला जाए अथवा रात के समय किसी वाहन चालक को स्थिति स्पष्ट दिखाई न दे तो दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

पीएचईडी कार्यालय के बाहर ही सड़क की यह हालत

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस स्थान पर खुदाई की गई, उसके आसपास पीएचईडी कार्यालय भी स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी क्षेत्र में पानी की लाइन में लीकेज की समस्या भी सामने आई है। पानी का लगातार रिसाव जमीन की मजबूती को प्रभावित कर सकता है। यदि सड़क के नीचे की मिट्टी में पानी पहुंच रहा है तो समय के साथ जमीन धंसने की आशंका बढ़ सकती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीएचईडी कार्यालय के इतने नजदीक यह स्थिति होने के बावजूद संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों का सवाल है कि यदि पानी की लाइन में लीकेज है तो उसे तत्काल ठीक क्यों नहीं किया जा रहा और सड़क के नीचे की जमीन की तकनीकी जांच क्यों नहीं करवाई जा रही? यह मामला केवल गड्ढे को भरने तक सीमित नहीं है। पहले यह पता लगाना जरूरी है कि सड़क के नीचे की जमीन सुरक्षित है या नहीं।

महज 10 फीट दूर ट्रैफिक का दबाव

स्थानीय लोगों के मुताबिक खुदाई वाले स्थान से महज करीब 10 फीट की दूरी पर ऐसा स्थान है जहां दिनभर यातायात का दबाव रहता है। कई बार यहां जाम की स्थिति भी बनती है। एक तरफ भारी यातायात और दूसरी तरफ क्षतिग्रस्त सड़क—दोनों परिस्थितियां मिलकर दुर्घटना की संभावना बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञ दृष्टि से भी किसी व्यस्त सड़क पर लंबे समय तक ऐसी बाधा का बने रहना उचित नहीं माना जा सकता। खासकर तब, जब सड़क के नीचे गहरी खुदाई की गई हो और आसपास जल रिसाव की संभावना भी बताई जा रही हो।

वार्ड 40 की 15-20 कॉलोनियों का प्रमुख रास्ता

सरस्वती नगर वार्ड नंबर 40 में कम से कम 15 से 20 कॉलोनियां आती हैं। इन कॉलोनियों के हजारों लोगों के लिए यह मार्ग रोजमर्रा की आवाजाही का महत्वपूर्ण रास्ता है। स्थानीय निवासियों के लिए यह सड़क बाजार, कार्यालय, स्कूल, अस्पताल और अन्य प्रमुख स्थानों तक पहुंचने का माध्यम है। इसलिए सड़क की खराब स्थिति का असर केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास रहने वाली बड़ी आबादी इससे प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि जब किसी सड़क का इस्तेमाल इतनी बड़ी आबादी करती है तो उसकी मरम्मत और रखरखाव को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इसी रास्ते से गुजरते हैं

स्थानीय लोगों के अनुसार इस क्षेत्र में नगर निगम के अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और अन्य विभागों से जुड़े लोग भी आते-जाते हैं। यहां तक कि न्यायिक अधिकारियों सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत लोग भी इस मार्ग से गुजरते हैं। इसके अलावा क्षेत्र के पार्षद, विधायक और पंचायत समिति के सदस्य भी इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि किसी ने इस गंभीर समस्या को प्रभावी ढंग से संबंधित विभाग के सामने नहीं उठाया। यही कारण है कि अब लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि यह सड़क किसी वीआईपी क्षेत्र में होती तो क्या एक महीने से ज्यादा समय तक इसी तरह पड़ी रहती?

सबसे बड़े सवाल

प्रशासन से जनता पूछ रही है—
  • सड़क काटकर करीब 20 फीट तक खुदाई क्यों की गई?
  • काम पूरा होने के बाद सड़क को पहले जैसा क्यों नहीं बनाया गया?
  • सड़क की तकनीकी जांच किस विभाग ने की?
  • क्या सड़क के नीचे की मिट्टी की मजबूती जांची गई?
  • पानी की लाइन में लीकेज है तो उसे ठीक क्यों नहीं किया गया?
  • रोज हजारों वाहनों की आवाजाही वाले मार्ग को इतने समय तक बदहाल क्यों छोड़ा गया?
  • किसी दुर्घटना का इंतजार क्यों किया जा रहा है?

सिर्फ गड्ढा भरना समाधान नहीं

स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मामले को महज गड्ढा भरने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रखे। सड़क को दोबारा बनाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि भूमिगत काम पूरी तरह सुरक्षित और पूर्ण हो चुका है। इसके बाद खुदाई वाले हिस्से को निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार भरकर जमीन को पर्याप्त रूप से दबाया जाए और उसके बाद सड़क का पुनर्निर्माण किया जाए। यदि नीचे पानी का रिसाव है तो पहले उसे रोकना भी जरूरी है। अन्यथा ऊपर से बनाई गई नई सड़क कुछ समय बाद फिर धंस सकती है। इसलिए संबंधित विभागों—नगर निगम, पीएचईडी और सड़क से जुड़े विभाग—के बीच समन्वय स्थापित कर संयुक्त निरीक्षण किया जाना चाहिए।

एक हादसा और बदल जाएगी तस्वीर

आज सवाल केवल सड़क की खराब हालत का नहीं है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी हादसे के बाद जागेगा? व्यस्त मार्ग पर सड़क का क्षतिग्रस्त हिस्सा, गहरी खुदाई के बाद कमजोर हुई जमीन, संभावित पानी का रिसाव और लगातार बढ़ता यातायात—ये सभी परिस्थितियां खतरे की ओर संकेत कर रही हैं। जरूरत इस बात की है कि हादसा होने से पहले कार्रवाई की जाए।

सरस्वती नगर विकास समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी

सरस्वती नगर विकास समिति के मीडिया प्रभारी महेंद्र भट्टी ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरस्वती नगर मोड़ क्षेत्र की यह सड़क स्थानीय नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र की हॉट लाइन है और यहां प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क को लंबे समय तक इस हालत में छोड़ना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। भट्टी ने कहा कि प्रशासन को संबंधित विभाग को निर्देश देकर अंडरग्राउंड कार्य को पूर्ण करवाना चाहिए। इसके बाद सड़क को तकनीकी मानकों के अनुसार दोबारा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि पानी की लाइन में लीकेज है तो पीएचईडी तत्काल इसकी जांच कर उसे ठीक करे, ताकि सड़क के नीचे जमीन के धंसने की आशंका समाप्त हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो सरस्वती नगर विकास समिति आंदोलन का रास्ता अपनाएगी।

जनता का सवाल—हादसे का इंतजार क्यों?

सड़क पर समस्या कई दिनों से मौजूद हो और रोजाना हजारों वाहन वहां से गुजरते हों, तो प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने की बजाय पहले ही खतरे को खत्म करना चाहिए। सड़क की मरम्मत, पानी की लाइन की जांच और यातायात व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। लोगों का यह भी कहना है कि यदि संबंधित विभागों को शिकायत नहीं मिली है तो भी सार्वजनिक सड़क की स्थिति का निरीक्षण करना विभागों की जिम्मेदारी है। किसी दुर्घटना के बाद यह कहना कि शिकायत नहीं मिली थी, समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

प्रशासन के लिए तत्काल कार्रवाई के पांच कदम

1. संयुक्त निरीक्षण: नगर निगम, पीएचईडी और संबंधित सड़क एजेंसी की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करे।

2. लीकेज की जांच: पानी की लाइन में लीकेज है या नहीं, इसकी तत्काल जांच हो।

3. जमीन की मजबूती: 20 फीट तक की गई खुदाई के बाद सड़क के नीचे की मिट्टी और भराव की तकनीकी जांच हो।

4. स्थायी सड़क निर्माण: केवल मिट्टी डालकर खानापूर्ति करने की बजाय सड़क को तकनीकी मानकों के अनुसार दोबारा बनाया जाए।

5. सुरक्षा व्यवस्था: मरम्मत होने तक बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

अब प्रशासन की परीक्षा

सरस्वती नगर मोड़ की यह समस्या प्रशासन के लिए एक छोटी सी सड़क मरम्मत का मामला नहीं है। यह उस व्यवस्था की परीक्षा है जो दुर्घटना होने से पहले खतरे को पहचानने का दावा करती है। एक तरफ हजारों वाहनों की आवाजाही है, दूसरी तरफ सड़क की खराब स्थिति और संभावित जल रिसाव। बीच में आम नागरिक हैं, जिन्हें हर दिन इसी रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समस्या को हल करने के लिए किसी बड़े बजट या जटिल योजना की जरूरत नहीं है। जरूरत है तो जिम्मेदारी तय करने, विभागों के बीच समन्वय बनाने और समयबद्ध कार्रवाई करने की। सरस्वती नगर के नागरिक अब यह देखना चाहते हैं कि प्रशासन उनकी आवाज सुनता है या फिर किसी हादसे के बाद जागता है। महेंद्र भट्टी की चेतावनी के बाद अब गेंद प्रशासन के पाले में है। यदि समय रहते सड़क को दुरुस्त कर दिया गया तो एक संभावित दुर्घटना को टाला जा सकता है। लेकिन यदि लापरवाही जारी रही और कोई हादसा हुआ तो सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि हादसा कैसे हुआ—सवाल यह भी होगा कि खतरा दिखाई देने के बावजूद जिम्मेदारों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? सरस्वती नगर की इस व्यस्त सड़क को तत्काल सुरक्षित बनाना अब प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor