थकान मिटाने और तुरंत ऊर्जा देने का दावा करने वाले पेय कितने सुरक्षित? कैफीन, शुगर और अन्य उत्तेजक पदार्थों की अधिकता से नींद, हृदय, दांत और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में थकान, पढ़ाई का दबाव, खेलकूद और देर रात तक जागने जैसी स्थितियों के बीच एनर्जी ड्रिंक युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। रंगीन पैकेजिंग, आकर्षक विज्ञापन और तुरंत ऊर्जा देने के दावे इन पेय पदार्थों को सामान्य सॉफ्ट ड्रिंक से अलग और खास दिखाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि जिस ऊर्जा की तलाश में हम इन्हें पीते हैं, उसकी कीमत शरीर को तो नहीं चुकानी पड़ती?
एनर्जी ड्रिंक में आमतौर पर कैफीन के साथ शुगर और दूसरे उत्तेजक घटक हो सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए कैफीन तथा उत्तेजक पदार्थों वाले एनर्जी ड्रिंक से बचने की सलाह दी है।
एनर्जी ड्रिंक और स्पोर्ट्स ड्रिंक एक नहीं
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि एनर्जी ड्रिंक और स्पोर्ट्स ड्रिंक एक ही चीज नहीं हैं। स्पोर्ट्स ड्रिंक मुख्य रूप से पानी, कार्बोहाइड्रेट और इलेक्ट्रोलाइट की पूर्ति के लिए बनाए जाते हैं, जबकि एनर्जी ड्रिंक में आमतौर पर कैफीन जैसे उत्तेजक पदार्थ प्रमुख भूमिका निभाते हैं। AAP के अनुसार, सामान्य शारीरिक गतिविधि करने वाले बच्चों-किशोरों के लिए पानी ही पर्याप्त हाइड्रेशन का बेहतर विकल्प है।
तुरंत ऊर्जा का अहसास कैसे होता है?
एनर्जी ड्रिंक पीने के बाद व्यक्ति को कुछ समय के लिए अधिक सतर्क या सक्रिय महसूस हो सकता है। इसका बड़ा कारण कैफीन है। कैफीन शरीर में उत्तेजक प्रभाव पैदा करता है और हृदय गति तथा रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह प्रभाव शरीर की वास्तविक थकान को खत्म करने के बजाय थकान के एहसास को कुछ समय के लिए दबा सकता है।
यही कारण है कि एनर्जी ड्रिंक को नींद की कमी या लगातार थकान का स्थायी समाधान मानना सही नहीं है।
बॉक्स: एनर्जी ड्रिंक में क्या हो सकता है?
प्रमुख घटक—
- कैफीन
- अतिरिक्त शुगर
- ग्वाराना जैसे कैफीनयुक्त पौधों के अर्क
- टॉरिन
- अन्य उत्तेजक या सप्लीमेंट घटक
इनकी मात्रा अलग-अलग उत्पादों में अलग हो सकती है। इसलिए केवल ब्रांड के नाम के आधार पर किसी पेय को सुरक्षित या असुरक्षित मानना उचित नहीं है।
दिल पर असर की चिंता
अधिक कैफीन लेने से हृदय गति और रक्तचाप बढ़ सकते हैं। कुछ लोगों में धड़कन असामान्य महसूस हो सकती है। AAP की समीक्षा में कैफीन के अत्यधिक सेवन को अनियमित हृदय-लय सहित कई संभावित समस्याओं से जोड़ा गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि एनर्जी ड्रिंक पीने वाले हर व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्या होगी। जोखिम व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, कैफीन की मात्रा और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है। लेकिन अधिक कैफीन को हल्के में लेना भी उचित नहीं है।
नींद खराब होने का चक्र
एनर्जी ड्रिंक का एक बड़ा नुकसान नींद से जुड़ा हो सकता है। कैफीन का उत्तेजक प्रभाव देर तक रह सकता है। यदि कोई व्यक्ति थकान या देर रात पढ़ाई के लिए कैफीन लेता है और उसके कारण नींद प्रभावित होती है, तो अगले दिन वह फिर थका हुआ महसूस कर सकता है।
इसके बाद फिर एनर्जी ड्रिंक लेने की इच्छा हो सकती है। इस तरह थकान → कैफीन → खराब नींद → अगली सुबह थकान का चक्र बन सकता है।
AAP ने बच्चों और किशोरों में कैफीनयुक्त पेय से नींद पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर विशेष चिंता जताई है।
मानसिक बेचैनी और चिड़चिड़ापन
अधिक कैफीन कुछ लोगों में बेचैनी, घबराहट, कंपकंपी, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी पैदा कर सकता है। बच्चों और किशोरों में इसका प्रभाव विशेष चिंता का विषय है।
इसलिए परीक्षा, खेल या किसी महत्वपूर्ण काम के पहले ऊर्जा बढ़ाने के लिए ऐसे पेय पर निर्भरता बनाना समझदारी नहीं है।
ये संकेत दिखें तो सावधान
अगर कैफीनयुक्त पेय लेने के बाद किसी व्यक्ति को बहुत तेज या अनियमित धड़कन, अत्यधिक घबराहट, उल्टी, भ्रम, बेहोशी या गंभीर अस्वस्थता महसूस हो, तो इसे सामान्य प्रतिक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क को बताकर चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
शुगर का दूसरा खतरा
सभी एनर्जी ड्रिंक एक जैसे नहीं होते, लेकिन कई उत्पादों में अतिरिक्त शुगर की मात्रा काफी अधिक हो सकती है। नियमित रूप से ज्यादा शुगर वाले पेय लेने से कुल कैलोरी बढ़ सकती है और लंबे समय में दांतों तथा वजन से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। AAP ने बच्चों और किशोरों में मीठे पेय के नियमित सेवन को लेकर दांतों और अतिरिक्त वजन सहित कई स्वास्थ्य चिंताएं बताई हैं।
यानी समस्या केवल कैफीन की नहीं है। किसी पेय में मौजूद अतिरिक्त शुगर भी स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है।
दांतों के लिए भी नुकसान
एनर्जी और स्पोर्ट्स ड्रिंक अक्सर अम्लीय होते हैं। इनकी अम्लीयता दांतों के बाहरी सुरक्षात्मक स्तर यानी इनेमल को नुकसान पहुंचा सकती है। AAP की समीक्षा में ऐसे पेय पदार्थों से दांतों के क्षरण की चिंता व्यक्त की गई है।
इसलिए बार-बार मीठे और अम्लीय पेय पीने की आदत दांतों के लिए भी अच्छी नहीं मानी जाती।
किशोरों के लिए ज्यादा चिंता क्यों?
किशोरावस्था शरीर और मस्तिष्क के विकास का महत्वपूर्ण समय है। इसी कारण विशेषज्ञ इस उम्र में अत्यधिक कैफीन और उत्तेजक पदार्थों से विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। AAP का स्पष्ट मत है कि बच्चों और किशोरों के आहार में उत्तेजक पदार्थों वाले एनर्जी ड्रिंक का स्थान नहीं होना चाहिए।
यहां माता-पिता और स्कूलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बच्चों को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि “एनर्जी ड्रिंक मत पियो”; उन्हें यह समझाना जरूरी है कि विज्ञापन में दिखाई जाने वाली ऊर्जा और शरीर की वास्तविक जरूरत में अंतर होता है।
थकान का बेहतर जवाब क्या?
अगर थकान बार-बार महसूस होती है तो उसका समाधान केवल कैफीनयुक्त पेय नहीं है। बेहतर विकल्पों में शामिल हैं—
पर्याप्त नींद + संतुलित भोजन + नियमित पानी + उचित शारीरिक गतिविधि + पढ़ाई/काम के बीच पर्याप्त आराम।
अगर लगातार थकान बनी रहती है, तो उसके कारण को समझने के लिए अभिभावक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है।
क्या एनर्जी ड्रिंक खेल प्रदर्शन का विकल्प है?
एनर्जी ड्रिंक को खेल प्रदर्शन बढ़ाने वाला सामान्य पेय समझना सही नहीं है। AAP ने स्पष्ट किया है कि एनर्जी ड्रिंक और स्पोर्ट्स ड्रिंक अलग-अलग हैं। सामान्य शारीरिक गतिविधि में पानी अक्सर पर्याप्त होता है, जबकि लंबे और बहुत तीव्र व्यायाम में पोषण तथा हाइड्रेशन की जरूरत व्यक्ति और परिस्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
इसलिए किसी खिलाड़ी को केवल विज्ञापन देखकर एनर्जी ड्रिंक को खेल का जरूरी हिस्सा नहीं मानना चाहिए।
कैफीन की मात्रा पर नजर जरूरी
कैफीन केवल एनर्जी ड्रिंक में ही नहीं होता। चाय, कॉफी, कोला और कुछ अन्य उत्पादों से भी कैफीन शरीर में पहुंच सकता है। इसलिए अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली कुल कैफीन मात्रा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
CDC की एक जानकारी में AAP के हवाले से 12–18 वर्ष के किशोरों के लिए 100 मिलीग्राम प्रतिदिन से अधिक कैफीन न लेने की सलाह दी गई थी; हालांकि बच्चों और किशोरों के लिए सबसे सुरक्षित दृष्टिकोण कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक से बचना ही है।
‘एनर्जी’ नाम देखकर भ्रमित न हों
एनर्जी ड्रिंक शरीर को स्वस्थ ऊर्जा देने वाला भोजन नहीं है।
इसमें मौजूद कैफीन व्यक्ति को कुछ समय के लिए अधिक सतर्क महसूस करा सकता है, लेकिन यह संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और आराम का विकल्प नहीं है।
विज्ञापन बनाम वास्तविकता
एनर्जी ड्रिंक का विज्ञापन अक्सर खेल, युवा ऊर्जा, रोमांच और सफलता की छवियों से जुड़ा होता है। इससे यह धारणा बन सकती है कि इसे पीना सक्रिय और फिट जीवनशैली का हिस्सा है।
लेकिन स्वास्थ्य का संबंध किसी एक पेय से नहीं, बल्कि पूरी जीवनशैली से है। पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन, पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को वह आधार देते हैं जिसकी जरूरत वास्तव में होती है।
ऊर्जा की जरूरत है, लेकिन सही रास्ते से
एनर्जी ड्रिंक को लेकर सबसे जरूरी संदेश डर पैदा करना नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाना है। हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता, लेकिन अधिक कैफीन, अतिरिक्त शुगर और अन्य उत्तेजक घटकों के कारण इनके नियमित या अत्यधिक सेवन को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के मामले में विशेषज्ञों की सलाह और भी स्पष्ट है—एनर्जी ड्रिंक से बचना बेहतर है।
वास्तविक ऊर्जा किसी कैन से नहीं, बल्कि अच्छी नींद, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और स्वस्थ जीवनशैली से आती है। इसलिए अगली बार थकान महसूस हो तो केवल “तुरंत ऊर्जा” के दावे पर भरोसा करने के बजाय यह सोचना ज्यादा जरूरी है कि शरीर वास्तव में किस चीज की मांग कर रहा है।

