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Wednesday, September 9, 2026, 3:26 pm

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पर्यावरण प्रेमी गुलाब देवी की स्मृति में 11 सितंबर को होगी ‘एक शाम मां के नाम’ भजन संध्या

12 सितंबर को प्रसादी, दान-पुण्य एवं ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन; भजनों के साथ मां की महिमा का होगा गुणगान

पंकज जांगिड़. जोधपुर

निकटवर्ती गांव बिल्लू में पर्यावरण प्रेमी स्मृति शेष गुलाब देवी धर्मपत्नी स्मृति शेष हीरालाल बोदलिया की पावन स्मृति में दो दिवसीय धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 11 सितंबर, शुक्रवार को रात्रि में ‘एक शाम मां के नाम’ भजन संध्या का आयोजन होगा, वहीं 12 सितंबर, शनिवार को प्रसादी, दान-पुण्य एवं ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य दिवंगत गुलाब देवी की स्मृति को श्रद्धा के साथ नमन करने के साथ धार्मिक आस्था, सेवा, दान-पुण्य और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।

आयोजक सत्यनारायण, फूलचंद व गोविंद बोदलिया ने बताया कि 11 सितंबर को आयोजित होने वाली भजन संध्या में रात्रि 9.15 बजे से संतजनों के साथ नामचीन एवं स्थानीय कलाकार अपनी भजनों की प्रस्तुतियां देंगे। भजन संध्या के दौरान भक्तिमय वातावरण में मां की महिमा का गुणगान किया जाएगा। आयोजन में आसपास के गांवों एवं क्षेत्र के श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर भक्ति एवं श्रद्धा के इस अवसर का हिस्सा बनने का आह्वान किया है।

भजनों से गूंजेगा बिल्लू गांव

भजन संध्या के दौरान संतजनों और कलाकारों द्वारा विभिन्न भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। धार्मिक गीतों एवं भजनों के माध्यम से मां की महिमा का गुणगान किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर आयोजकों एवं ग्रामीणों में उत्साह है। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के बैठने, कार्यक्रम संचालन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।

आयोजकों का कहना है कि भजन संध्या केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह दिवंगत गुलाब देवी के जीवन और उनके पर्यावरण प्रेम को स्मरण करने का अवसर भी होगी। उनके प्रति श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित कार्यक्रम में समाज के लोगों को सेवा, सद्भाव और प्रकृति संरक्षण से जुड़ने का संदेश दिया जाएगा।

12 सितंबर को प्रसादी और दान-पुण्य

भजन संध्या के अगले दिन 12 सितंबर, शनिवार को प्रसादी का आयोजन होगा। इसके साथ ही दान-पुण्य कार्यक्रम भी रखा गया है। आयोजकों के अनुसार धार्मिक परंपराओं के साथ सेवा और दान को जोड़ते हुए जरूरतमंदों एवं समाजहित के कार्यों के प्रति लोगों को प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा।

प्रसादी कार्यक्रम में श्रद्धालु एवं ग्रामीण सहभागी बनेंगे। इस अवसर पर दिवंगत गुलाब देवी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी स्मृति में सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्य करने का संकल्प भी लिया जाएगा।

‘एक पेड़ मां के नाम’ से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान रहेगा। गुलाब देवी को पर्यावरण प्रेमी के रूप में याद करते हुए उनकी स्मृति में पौधारोपण किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया जाएगा।

आयोजकों का मानना है कि किसी प्रियजन की स्मृति को लंबे समय तक जीवित रखने का सबसे सुंदर माध्यम प्रकृति की सेवा भी हो सकती है। एक पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए छाया, हरियाली और स्वच्छ वातावरण का आधार बन सकता है। इसी भावना के साथ ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम को आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आयोजकों ने कहा कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों को पेड़ बनने तक उनकी देखभाल करना भी समाज की जिम्मेदारी है।

आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटी मातृशक्ति सहित सेवाभावी लोग

दो दिवसीय कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए क्षेत्र के सेवाभावी लोग जुटे हुए हैं। आयोजन की व्यवस्था में बाबुलाल, ओमप्रकाश, भंवरलाल, फूलचंद, गोविंद, शालु, शंकर, बनवारी, राकेश, मुकेश और पवन सहित अन्य लोग सेवाएं प्रदान करेंगे। इसके साथ ही मातृशक्ति मंजू, पूजा व कोमल भी कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में अपनी सेवाएं देंगी। आयोजकों ने बताया कि धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीणों और सेवाभावी लोगों का सहयोग मिल रहा है। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से भजन संध्या में शामिल होकर दिवंगत गुलाब देवी की स्मृति को श्रद्धांजलि देने तथा अगले दिन प्रसादी, दान-पुण्य और ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम में सहभागी बनने का आग्रह किया है। आयोजन के माध्यम से श्रद्धा के साथ सेवा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor