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Thursday, July 9, 2026, 9:37 pm

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भाजपा का मिशन 2023 : क्या 75 साल से अधिक होंगे रिटायर?

राइजिंग भास्कर डॉट कॉम. जोधपुर

-भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2023 में होने वाले चुनाव की ग्राउंड तैयारियां चार साल पहले ही शुरू कर दी थी। पार्टी ने तय किया था कि 2023 के विधानसभा चुनाव में 75 साल से अधिक के लोगों को टिकट नहीं दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो 60 प्रतिशत बड़ी उम्र के नेता स्वत: चुनाव की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के अनुसार अगले विधानसभा चुनाव में युवाओं को अधिक मौका दिया जाना तय किया था। युवाओं में भाजपा का क्रेज कुछ अधिक ही है। सोशल मीडिया पर युवाओं के लिए नरेंद्र मोदी भगवान के किसी अवतार की तरह उभरे हैं। ये वे युवा हैं जो मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं सुनना चाहते। जब युवाओं को यह संदेश नरेंद्र मोदी ने दिया कि युवा शक्ति ही देश की नौका की खेवनहार है और उन्हें अब राजनीति की धुरी बनाया जाएगा। यह संदेश जैसे ही बाहर आया तो युवाओं में नया जोश संचारित हो गया। मगर देखने वाली बात यह है कि क्या भाजपा अपने वादे पर खरी रहेगी या पिछले चुनाव की तरह अधिकतर उम्रदराज लोगों को ही टिकट देंगी। जहां तक मुख्यमंत्री की कुर्सी का सवाल है तो जो नेता मुख्यमंत्री की दौड़ में है उनमें अधिकतर 75 साल से कम उम्र के ही है। भाजपा के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया, अलवर सांसद योगी बालकनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत और कई नेता जो मुख्यमंत्री की दौड़ में है सभी 75 साल से कम उम्र के हैं। ऐसे में पार्टी युवाओं पर दांव खेलती है तो तस्वीर बदल सकती है।

-राखी पुरोहित. जोधपुर

राजस्थान में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने चार साल पहले ही जब मंथन बैठक रखी थी तो तय किया था अब अगले चुनाव में युवाओं को मौका दिया जाएगा और 75 साल से अधिक के नेताओं को रिटायर किया जाएगा। देखने वाली बात यह है कि भाजपा अपने वादे और रणनीति पर कितनी कायम रहती है। बताया जा रहा है कि आरएसएस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अपनी यह बात पहुंचा दी है कि 2023 के चुनाव में युवाआें को मौका दिया जाए और 75 साल से अधिक के लोगों को टिकट नहीं दिया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सुझाव को मान भी लिया है और यह तय कर लिया है अगले चुनाव में युवाओं को तरजीह दी जाएगी। गौरतलब है कि 2018 के चुनाव से पहले भी पार्टी ने 80 साल से अधिक लोगों के टिकट काटने की घोषणा की थी, मगर इस पर अमल नहीं किया गया, जबकि कांग्रेस ने नए चेहरों और युवाओं पर दांव खेला था जो सफल रहा। जबकि पिछले चुनाव में भाजपा ने पुराने और बुजुर्गों को उम्मीदवार बनाया था। इसका उसे खामियाजा भुगतना पड़ा था। अब पार्टी में फिर से युवा शक्ति को मौका देने पर मंथन चल रहा है। अगर भाजपा गत चुनाव में युवाओं को मौका देती तो तस्वीर हटकर हो सकती थी, लेकिन वसुंधरा राजे की जिद्द के आगे फिर से बड़ी उम्र के लोगों पर दांव खेला गया जो सफल नहीं रहा।

देर से ही सही भाजपा ने फिर एक बार युवाओं पर भरोसा जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो युवा कौशल पर भरोसा जता चुके हैं और 2023 के अंत में होने वाले चुनाव की तैयारियाें में युवाओं को जुट जाने की अपील भी कर दी है। जैसलमेर से भाजपा के दावेदार ओम सेवक छात्र काल से राजनीति में है और भाजपा के कट्‌टर नेता है। उनको भी उम्मीद है कि इस बार उन्हें ही मौका मिलेगा। इसी तरह कंवराज सिंह चौहान जो युवा और राजपूत समुदाय से तेजतर्रार नेता है वे भी जैसलमेर से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। पोकरण से एक बार फिर शैतान सिंह चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। शिव विधानसभा से जालम सिंह रावलोत ताल ठोक सकते हैं। वैसे जैसलमेर से सांगसिंह भाटी भी खड़े होने की मंशा जता चुके हैं जबकि वे पूर्व में विधायक भी रह चुके हैं। ये सभी अभी 75 साल से कम उम्र के हैं। भाजपा के युवा नेता दलपत मेघवाल भी विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। इन सभी युवाओं का मानना है कि अगर मैदान में युवाओं को उतारा गया तो स्थिति पार्टी के पक्ष में होगी। उनका मानना है कि गत चुनाव में पार्टी ने युवाओं पर भरोसा न जताकर पुराने चेहरों पर दांव खेला था, जो आत्मघाती साबित हुआ। इसी तरह भाजपा नेता रणवीर सिंह का मानना है कि युवा ही सही मायने में पार्टी की ताकत है। 20 साल से लेकर 40 साल तक के युवाओं में भाजपा के प्रति जोश है। सोशल मीडिया तो युवाओं से भरा पड़ा है। ये वे लोग हैं जो पार्टी के सर्वाधिक वोटर्स हैं। अगर अगले चुनाव में युवाओं पर बाजी लगाई जाती है तो यह सफल प्रयोग हो सकता है। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में तय तो भाजपा ने किया था कि युवाओं को मैदान में उतारा जाएगा। मगर इसमें अमल किया कांग्रेस ने। राहुल गांधी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में युवाओं को मैदान में उतारा था। इसका परिणाम सुखद रहा।

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी सभा में साफ कहा था कि आने वाला समय युवाओं का है। युवा ही देश के कर्णधार हैं। अब समय आ गया है कि युवाओं को अधिक से अधिक राजनीति में आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को राजनीति में कॅरिअर बनाना चाहिए। अब अगर 2023 में युवाआें को मौका दिया जाता है तो 60 प्रतिशत लोगों के टिकट कट जाएंगे। राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया भी अपनी रैलियों और सभाओं में साफ साफ कहते हैं कि भाजपा के पास लीडर की कमी नहीं हैं। युवाओं से लैस भाजपा नया इतिहास लिखने को तैयार है। 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा में मौजूदा समय में युवा चेहरे लगभग गायब है। कांग्रेस की विधायक दिव्या मदेरणा ने एक बार फिर पार्टी में युवाओं को मौका देने की वकालत कर दी है तो भाजपा ने अभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। भाजपा अगर चार साल पहले जो वादा किया था उस पर खरी रहती है तो इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में युवाओं को अधिक से अधिक मौका मिल सकता है। भाजपा नेता मुकेश गज्जा की अनदेखी से भी भाजपा कार्यकर्ता नाराज चल रहे हैं। पार्टी के समर्पित सिपाही रहे गज्जा जैसलमेर भाजपा में कभी पहली पंक्ति में माने जाते थे और इस विधानसभा चुनाव में उन्हें मौका मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था, मगर वे पिछले कुछ सालों से किनारा ही हो गए हैं।

अभी तो यह भी तय नहीं चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जाएगा :

एक तरफ भाजपा घोषणा कर चुकी है कि अगला चुनाव युवाओं के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। वहीं अभी तक पार्टी यह भी तय नहीं कर पाई है कि चुनाव लड़ा किसके नेतृत्व में जाएगा। ऐसे में फिर लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे रखकर ही चुनाव लड़ा जाएगा। सूत्र बताते हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में योगी बालकनाथ मुख्य भूमिका में रहेंगे। योगी बालक नाथ अभी अलवर से सांसद हैं और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खास माने जाते हैं। योगी बालकनाथ में नया योगी देखा जा रहा है। ऐसे में भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor