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Wednesday, August 26, 2026, 12:13 am

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Lifestyle

कविता नाचीज बीकानेरी

ना फैलाओ यूं नफरत

अब नां फैलाओ यूं नफरत
नफरत रै अंधड़ में कद जाणै
घणकरा पुणी बण उड़ जावैला ।

गंगा – जमनी इय्ये धरा माथै
धरम री आड में कांई हुसी
मिनख आग रै खीरां सूं खेळैला ।

ओ ‘ अंधड़ कद जांणै कद
इंसानां री मती नै फेर देवै लो
कद जाणै देस रो कांई हश्र हुवैला

राज में बैठा नित नूंई कुचरनी करै
ओ ‘ उन्माद अर जहर घोलणो
सविंधान नै भी धतो बतावैला ।

जागो अमन – चैन – पसन्द लोगां
कंट- कंटीले मारग सूं अबै बचण
कुण देस नै आच्छे मार्ग लावैला ।

नाचीज बीकानेरी

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor

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