ना फैलाओ यूं नफरत
अब नां फैलाओ यूं नफरत
नफरत रै अंधड़ में कद जाणै
घणकरा पुणी बण उड़ जावैला ।
गंगा – जमनी इय्ये धरा माथै
धरम री आड में कांई हुसी
मिनख आग रै खीरां सूं खेळैला ।
ओ ‘ अंधड़ कद जांणै कद
इंसानां री मती नै फेर देवै लो
कद जाणै देस रो कांई हश्र हुवैला
राज में बैठा नित नूंई कुचरनी करै
ओ ‘ उन्माद अर जहर घोलणो
सविंधान नै भी धतो बतावैला ।
जागो अमन – चैन – पसन्द लोगां
कंट- कंटीले मारग सूं अबै बचण
कुण देस नै आच्छे मार्ग लावैला ।
नाचीज बीकानेरी




