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Thursday, July 9, 2026, 5:02 am

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धर्म अमृत है…इसके पान से ही जीवन आनंदित हो सकता है : डॉ. राजेंद्र मुनि

मित्र मित्र का व भाई भाई का दुश्मन हो गया है… आवश्यकता है इन दुर्गुणों को नष्ट कर भाईचारा, बंधुत्व, धर्म भाव को जागृत करें तभी जीना सफल व सार्थक होगा…।

शिव वर्मा. जोधपुर

कमला नेहरू नगर स्थित हीराचंद बाफना के निवास पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए श्रमण संघीय प्रवर्तक डाॅ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि पाप रूपी जहर का त्याग कर हमें धर्म रूपी अमृत का पान करना चाहिए। बुद्धिमान वही कहलाता है जो बुद्धि का सदुपयोग करता हो, अपनी बुद्धि को तप, त्याग, सेवा, शिक्षा व परोपकार के लिए अर्पित करता हो, वर्तमान में मानव आकृति से मानव दिखाई तो देता है परंतु प्रवृति से पशुतुल्य बन रहा है। वर्तमान में मानव की बुद्धि हिंसा, झूठ, चोरी, अन्याय, अत्याचार में लीन हो रही है। मंगल सदाचार का वातावरण नष्ट होता जा रहा है। मित्र मित्र का व भाई भाई का दुश्मन हो गया है। आवश्यकता है इन दुर्गुणों को नष्ट कर भाईचारा, बंधुत्व, धर्म भाव को जागृत करें तभी जीना सफल व सार्थक होगा।

इससे पूर्व डाॅ. सुरेंद्र मुनि ने नवकार जाप का महत्व प्रतिपादित करते हुए कहा जाप से आधि व्याधि उपाधि नष्ट होकर समाधि भाव की प्राप्ति से जीवन शांति की ओर अग्रसर होता है। मंगलवार को मुनिगण ने 11/733 चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में धर्म सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में समाजसेवी दाऊजी मालवीय, लालचंद लुंकड, हीराचंद बाफना सहित बड़ी संख्या में धर्मावलंबियों ने गुरु वंदना अर्पित की।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor