केस : वन
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवान श्रीकरणपुर क्षेत्र में रात्रि गश्त के दौरान 3 अप्रैल को 1 पैकेट संदिग्ध हेरोइन एवं एक पाक ड्रोन बरामद करते हैं। हेरोइन का वजन 500 ग्राम है।
केस : टू
21 मार्च को सीमा सुरक्षा बल द्वारा सतराना, बीकानेर से लगी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 3 किलोग्राम हेरोइन बरामद की जाती है। यह हेरोइन पाकिस्तान से ड्रोन द्वारा गिराई जाती है।
भारत पाक सीमा से लौटकर डीके पुरोहित की विशेष रिपोर्ट. जोधपुर
पाकिस्तान ने तस्करी में ड्रोन को बड़ा हथियार बना लिया है। हाल ही की कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो पाकिस्तान लगातार ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ भारत सीमा में भेज रहा है। सूत्र बताते हैं कि सीमा पार आईएसआई की साजिशें लगातार बढ़ रही है। पाकिस्तान में सक्रिय तस्कर जहां फिर से सक्रिय हो गए हैं, वहीं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई नई साजिशों को अंजाम दे रही है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि भारत में हाल ही में वक्फ बोर्ड बिल के बाद बौखलाया पाकिस्तान विस्फोटक सामग्री भेजने का प्लान कर रहा है। एक बार फिर भारत में हिंसा फैलाने की साजिशें रची जा रही है। उधर बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद पाकिस्तान की भारत पर नापाक नजर है और ड्रोन का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों में करने का खतरा मंडरा रहा है।
पाकिस्तान द्वारा ड्रोन के माध्यम से तस्करी बढ़ने की घटनाएं हाल के समय में बढ़ी हैं और इसका प्रभाव भारत पर भी देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान से लगे भारतीय सीमा क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से मादक पदार्थों और अन्य अवैध सामग्रियों की तस्करी की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह तस्करी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि ड्रोन के माध्यम से इन्हें सीमा पार करना आसान हो गया है। पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठनों और तस्करों द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, जिससे इन पदार्थों को भारतीय सीमा में आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
भारत सरकार और सुरक्षा बल इस समस्या को हल करने के लिए विशेष रणनीतियों और तकनीकी उपायों को लागू कर रहे हैं, जैसे कि ड्रोन को ट्रैक करने के लिए रडार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि इन अवैध गतिविधियों को रोका जा सके। ड्रोन के माध्यम से आतंकवादियों द्वारा आतंक फैलाने की घटनाओं ने वैश्विक सुरक्षा को गंभीर रूप से चुनौती दी है। आतंकवादी संगठन अब ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वे अपनी गतिविधियों को छिपा कर और तेजी से अंजाम दे सकते हैं। यह ड्रोन छोटी, सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने के कारण आतंकवादियों के लिए एक प्रभावी हथियार बन गए हैं।
आतंकवादी ड्रोन का इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री, मादक पदार्थों और अन्य खतरनाक सामग्री को शहरी क्षेत्रों या सैन्य ठिकानों तक पहुंचाने के लिए कर रहे हैं। इसका उदाहरण कई देशों में देखा गया है, जहां आतंकवादी संगठनों ने ड्रोन के जरिए हमले किए हैं, जैसे कि इराक, सीरिया और यमन में। इसके अलावा ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी के लिए भी किया जाता है, जिससे आतंकवादी अपनी गतिविधियों को गोपनीय और प्रभावी तरीके से अंजाम दे सकते हैं। ड्रोन तकनीक का यह दुरुपयोग वैश्विक सुरक्षा को एक नई दिशा में चुनौती दे रहा है और इससे निपटने के लिए देशों को नए तरीके अपनाने की आवश्यकता है।
इसका मुकाबला करने के लिए कई देशों ने ड्रोन को पहचानने और नष्ट करने के लिए तकनीकी उपायों को लागू किया है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन भी ड्रोन के दुरुपयोग को रोकने के लिए समन्वित प्रयासों की ओर बढ़ रहे हैं।
ड्रोन एक अत्यंत घातक तकनीकी उपकरण बन चुका है, जिसका उपयोग कई तरह से किया जा सकता है। विशेष रूप से सैन्य और आतंकवादी गतिविधियों में ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा और मानवता के लिए गंभीर खतरे का कारण बन सकता है।
क्यों घातक है ड्रोन : सुरक्षा एजेंसियों, सेना और बीएसएफ को सतर्क रहने की जरूरत
1. सैन्य उपयोग: ड्रोन का सबसे बड़ा और घातक उपयोग सैन्य क्षेत्र में किया जा रहा है। ड्रोन का उपयोग सैनिकों और ठिकानों पर हमले करने, इंटेलिजेंस जुटाने और मिसाइल हमलों को अंजाम देने के लिए किया जाता है। यह अक्सर बिना किसी मानव की उपस्थिति के दूर से हमला करने में सक्षम होते हैं, जिससे बचाव करना कठिन हो जाता है।
2. आतंकवादी गतिविधियां: आतंकवादी संगठन अब ड्रोन का उपयोग विस्फोटक सामग्री, रॉकेट और अन्य घातक पदार्थों को अपने लक्ष्यों तक पहुंचाने के लिए कर रहे हैं। यह छोटे और हल्के होते हैं, जिससे इन्हें पहचानना और उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। इनका इस्तेमाल सैन्य ठिकानों, सरकारी इमारतों, और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में हमला करने के लिए हो सकता है।
3. नागरिकों पर खतरा: ड्रोन का दुरुपयोग नागरिकों के लिए भी खतरनाक हो सकता है जैसे कि ड्रोन द्वारा गोपनीयता उल्लंघन, निगरानी, या यहां तक कि व्यक्तिगत सुरक्षा का खतरा। यह व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर सकता है और निजी डेटा के चोरी का कारण बन सकता है।
4. ट्रैफिक और दुर्घटनाएं: नागरिक क्षेत्रों में ड्रोन का बढ़ता हुआ इस्तेमाल भी दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है जैसे कि अन्य विमानन वाहनों से टक्कर, जो लोगों और संपत्ति के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
ड्रोन के बढ़ते खतरे : कानून, शर्तें औेर ध्यान देने योग्य बातें
ड्रोन के उपयोग के साथ जुड़े खतरों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसके नियंत्रण के लिए प्रभावी नियम और सुरक्षा उपायों को अपनाया जाना चाहिए। ड्रोन के उपयोग को लेकर विभिन्न देशों में अलग-अलग नियम और कानून हैं, लेकिन आमतौर पर इन नियमों का उद्देश्य ड्रोन के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना है। भारत में ड्रोन के उपयोग के लिए नियमों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा निर्धारित किया गया है। 2021 में DGCA ने ड्रोन के लिए एक नई नीति लागू की थी, जिसे “नवीनतम ड्रोन नियम 2021” के रूप में जाना जाता है। इसके तहत ड्रोन के उपयोग के लिए कुछ प्रमुख नियम और शर्तें निम्नलिखित हैं-
1. ड्रोन के पंजीकरण और अनुमति
सभी ड्रोन को पंजीकरण कराना अनिवार्य है, विशेष रूप से उन ड्रोन को जो 250 ग्राम से अधिक वजन रखते हैं। ड्रोन के पंजीकरण के लिए एक विशेष पोर्टल (Digital Sky Platform) का उपयोग किया जाता है। ड्रोन ऑपरेटर को भी लाइसेंस प्राप्त करना होता है, जिसे प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद जारी किया जाता है।
2. उड़ान के लिए अनुमत क्षेत्र
ड्रोन को केवल उन क्षेत्रों में उड़ाने की अनुमति होती है जो एयरस्पेस की दृष्टि से सुरक्षित हों और जहां विमानन गतिविधियों में कोई रुकावट न हो। ड्रोन को निर्धारित नो-फ्लाई ज़ोन में उड़ाना प्रतिबंधित है, जैसे एयरपोर्ट्स, सीमावर्ती इलाके और कुछ अन्य सुरक्षा संवेदनशील क्षेत्र।
3. निगरानी और ट्रैकिंग
ड्रोन को ट्रैक और निगरानी करने के लिए जीपीएस और अन्य तकनीकी प्रणालियां अनिवार्य हैं। इससे ड्रोन की उड़ान का पता चल सकें और यदि वह निर्धारित सीमा से बाहर जाता है, तो उसे रोकने का प्रयास किया जा सकें।
4. फ्लाइट ऊंचाई और दूरी
ड्रोन की उड़ान अधिकतम 400 फीट (120 मीटर) ऊंचाई तक ही अनुमति प्राप्त होती है। ड्रोन ऑपरेटर को हमेशा ड्रोन को दृश्य में रखना होता है और उसे किसी भी तरह की बाधा या दुर्घटना से बचाने के लिए उसे नियंत्रण में रखना होता है।
5. पायलट लाइसेंस
ड्रोन के पेशेवर उपयोग (जैसे कि फिल्म शूटिंग, निगरानी, मालवाहन आदि) के लिए पायलट को एक प्रमाणित ड्रोन पायलट लाइसेंस प्राप्त करना होता है। इस लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन प्रशिक्षण संस्थानों से संबंधित कोर्स और परीक्षा पास करनी होती है।
6. निजी सुरक्षा और गोपनीयता
ड्रोन का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की गोपनीयता का उल्लंघन करने के लिए नहीं किया जा सकता, जैसे व्यक्तिगत जानकारी या डेटा की चोरी करना। किसी अन्य व्यक्ति की अनुमति के बिना उनके परिसरों या निजी स्थानों की तस्वीर या वीडियो लेने की अनुमति नहीं हैं।
7. वाणिज्यिक उपयोग
वाणिज्यिक उद्देश्य से ड्रोन का उपयोग (जैसे कि माल ढुलाई, निगरानी आदि) के लिए विशेष अनुमति प्राप्त करनी होती है। इन गतिविधियों के लिए विशेष ड्रोन तकनीक और पेशेवर पायलट की आवश्यकता होती है और नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
8. बीमा और सुरक्षा
कुछ ड्रोन गतिविधियों के लिए बीमा अनिवार्य हो सकता है, विशेष रूप से जब वह लोगों या संपत्ति के करीब उड़ते हैं। सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होता है, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सकें और ड्रोन की उड़ान सुरक्षित बनी रहे।
9. मूल्य और कर्तव्य
ड्रोन के उपयोगकर्ताओं को इसके उपयोग के लिए शुल्क चुकाना पड़ सकता है और इसके उल्लंघन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इन नियमों का पालन करके ड्रोन के उपयोग को सुरक्षित और नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे हादसों, दुर्घटनाओं और अन्य सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके। ड्रोन के बढ़ते उपयोग के कारण, लगातार इन नियमों में बदलाव और सुधार होते रहते हैं, ताकि यह तकनीक बेहतर तरीके से और सुरक्षित रूप से उपयोग की जा सकें।
बिना लाइसेंस और वैध स्वीकृति के जोधपुर में उड़ा रहे ड्रोन
जोधपुर में बिना लाइसेंस और वैध स्वीकृति के ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं। यह भविष्य में खतरे का बायस हो सकते हैं। पुलिस कमिश्नर राजेंद्रसिंह को चाहिए कि शहर में अभियान चलाकर अवैध और गैर कानूनी रूप से ड्रोन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कई फर्जी पत्रकार और कई फर्जी और संदिग्ध लोग भी ड्रोन का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। कई फर्जी पत्रकार और कई फोटोग्राफर ड्रोन का गलत उपयोग कर रहे हैं। ड्रोन के माध्यम से आयोजनों की कवरेज करना आम बात हो गई है। ड्रोन का बढ़ता उपयोग जहां शहर में खतरे की बात हो सकती है वहीं पुलिस इस दिशा में अभी तक लापरवाह बनी हुई है। जोधपुर में एयरपोर्ट और सैन्य गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है, ऐसे में जोधपुर पुलिस को सतर्क रहने की जरूरत है, मगर इस दिशा में कभी सोचा ही नहीं गया। ड्रोन के माध्यम से सैन्य गतिविधियों को प्रभावित किया जा सकता है। जोधपुर में ड्रोन का अंधाधुंध बढ़ता उपयोग भविष्य में खतरे की निशानी बनता जा रहा है। हालांकि पुलिस 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों और विशेष मौकों पर ड्रोन के उपयोग पर रोक लगाती है और उसे संकुचित करती है। मगर आवश्यकता इस बात की है कि ड्रोन गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए। ड्रोन के माध्यम से शहर में नया खतरा बढ़ गया है।
सूत्र : ड्रोन से जोधपुर में हो रही मादक पदार्थों की तस्करी, पुलिस बनी लापरवाह
सूत्र बताते हैं कि जोधपुर में ड्रोन के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी हो रही है। शहर के कई संदिग्ध इलाकों में तस्कर सक्रिय हैं और ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों की खेप आसानी से पहुंचाई जा रही है। जोधपुर में पुलिस की दृष्टि ड्रोन को लेकर खास उत्साहजनक नहीं है। हालांकि पुलिस ने मादक पदार्थों को लेकर सावधानी दिखाई है, मगर ड्रोन के माध्यम से भी हो रही तस्करी को रोकने को लेकर जोधपुर की पुलिस फिलहाल तैयार नजर नहीं आ रही। जानकार बताते हैं कि मादक पदार्थों की तस्करी में ड्रोन को लेकर पुलिस विभाग के कुछ लोगों की मिलीभगत सामने आई है। जानकार बताते हैं कि खुद पुलिस की देखरेख में ड्रोन के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी करवाई जा रही है। कई फोटोग्राफर और कई फर्जी पत्रकार भी ड्रोन उड़ा रहे हैं और उनकी गतिविधियां संदिग्ध है। मादक पदार्थों की तस्करी में जोधपुर में ड्रोन तस्करों का नया हथियार बनता जा रहा है। हाल ही कि तीन-चार साल में शहर के कई इलाकों में मादक पदार्थों की तस्करी का जाल फैल गया है और इसमें ड्रोन तस्करों को हथियार बनकर उभरा है। अभी से पुलिस ने शिकंजा नहीं कसा तो आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम बड़े पैमाने पर सामने आ सकते हैं।
