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Thursday, April 30, 2026, 5:09 pm

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शिव-शक्ति मिलन के महापर्व महाशिवरात्रि पर एकाकार हुए दिन-रात्रि, काल के कपाल पर शिव तत्व ने खींची लकीरें…

शहर के छोटे-मोटे सभी शिव मंदिरों में सुबह 5 से लेकर 3 बजे तक 5 लाख लोग पहुंचे

शिव वर्मा. जोधपुर

महाकाल…। जिसके नाम के आगे पूरा ब्रह्मांड, पूरी कायनात झुक जाती है। शिव जो इसके जगत के नियंता है। शक्ति के साथ मिलकर जगत के कल्याण का जिन्होंने भार उठा रखा है। जिन्हें देवादि देव कहा गया है। शिव और पार्वती के विवाह का महापर्व महाशिवरात्रि शहर में बुधवार को शुरू हुआ। काल के कपाल पर जिन महाकाल ने अपनी शक्ति की लकीरें खींच दी, जिनके आगे सृष्टि झुक जाती है। देवों से लेकर असुरों तक जिनकी आराधना करते हैं, बुधवार उन्हीं शिव की आराधना के महापर्व को शहरवासियों ने श्रद्धा के साथ मनाना शुरू किया। सुबह से शिवालयों में अनुष्ठान शुरू हुए। मंदिरों की साज-सजा और लाइटिंग दो दिन पहले से ही शुरू हो गई थी। भक्तों ने शिवरात्रि को लेकर विशेष तैयारियां की। शिवालयों में भीड़ देखने लायक थी। शहर के शिवालयों में पैर रखने की जगह नहीं थी। अचलनाथ, सिद्धनाथ, डूंगरिया महादेव और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में सुबह 5 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक करीब 5 लाख लोगों ने दर्शन-अनुष्ठान किए।

महाशिवरात्रि पर आर्य समाज शास्त्रीनगर ने ऋषि बोधोत्सव मनाया

जोधपुर । ऋषि बोधोत्सव पर संकल्प लेना होगा कि हम अपने जीवन को वेद ज्ञान से सुशोभित और सुरभित करेंगे।महा,शिवरात्रि के पावन दिन ही महर्षि दयानंद सरस्वती ने सच्चे शिव की तलाश करने का संकल्प लेकर ऋषि मुनियों की संगत की और वेदों के वास्तविक स्वरूप से लोगों को रूबरू कराया । यह विचार वैदिक विद्वान डॉ रामदयाल आर्य ने उपस्थित व्यक्तियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए । मौका था महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आर्य समाज शास्त्री नगर द्वारा ऋषि बोधोत्सव महोत्सव के आयोजन का। इस बारे में जानकारी देते हुए आर्य समाज शास्त्री नगर के प्रधान जुगराज बालोत ने बताया कि महाशिवरात्रि और महर्षि दयानंद सरस्वती के बोधोत्सव पर आर्य समाज भवन में विशेष वैदिक मंत्रों से यज्ञ व पूजन कार्यक्रम का आयोजन डा रामदयाल आर्य के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। यजमान सुधांशु टाक और मीना टाक रहे । इस अवसर पर दीक्षा प्रजापति ने कहा किसी भी चीज को जानना और मानना दो अलग अलग विषय है। बिना जाने किसी भी चीज को मान लेने के कोई मायने नहीं है। उन्होंने बताया कि बिना जाने मान ली गई वस्तु कष्टदाई होती है। आज लोगों ने विद्वानों की संगत करना छोड़ दिया है। इसी कारण लोग गलत और सही में फर्क नहीं कर पा रहे हैं। तर्क वितर्क से ज्ञान बढ़ता है जो व्यक्ति शंका समाधान नहीं करता उसके ज्ञान में कभी भी बढ़ोतरी नहीं हो सकती। इस अवसर पर सुनीता प्रजापति , महेंद्र प्रजापति ,प्रियांशु सहित अनेक आर्य जन उपस्थित थे । समारोह का संयोजन घनश्याम आर्य ने किया । मंत्री सुधांशु टाक ने धन्यवाद ज्ञापित किया

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor