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Thursday, July 9, 2026, 11:45 pm

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कल दुनिया में बहेगी योग की बयार, हिंदुस्तान में गांव-शहर में मनेगा त्योहार

राखी पुरोहित. जोधपुर

21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाना केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि यह भारत की उस आध्यात्मिक चेतना का उत्सव है जो हजारों वर्षों से मानव कल्याण का पथ प्रशस्त कर रही है। योग केवल शरीर को मोड़ने और सांस को नियंत्रित करने की विद्या नहीं है, यह एक दर्शन है, जीवन की एक शैली है और विश्वबंधुत्व की भावना का वाहक भी है।

कल दुनिया में बहेगी योग की बयार, हिंदुस्तान में गांव-शहर में मनेगा त्योहार”—यह वाक्य न केवल एक कविता की पंक्ति है, बल्कि उस यथार्थ का प्रतीक है जो हर साल 21 जून को भारत और पूरी दुनिया में परिलक्षित होता है।


योग दिवस का इतिहास और महत्व

1. योग का वैश्विक स्वीकार:
21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का प्रस्ताव भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा था। 177 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और मात्र 90 दिनों में इसे पारित कर दिया गया—जो संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अब तक का सबसे तेज पारित प्रस्ताव था।

2. 21 जून की महत्ता:
यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे संक्रांति या गुरु पूर्णिमा से भी जोड़ा जाता है। योग की दृष्टि से यह दिन आध्यात्मिक उन्नयन का प्रतीक माना जाता है।


योग की परिभाषा और उद्देश्य

‘योग’ संस्कृत धातु ‘युज्’ से बना है, जिसका अर्थ है—जोड़ना। इसका तात्पर्य है आत्मा का परमात्मा से, मन का शरीर से और व्यक्ति का ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ाव।

योग का उद्देश्य केवल रोगों से मुक्ति नहीं, बल्कि:

  • मानसिक शांति
  • आत्मबोध
  • अनुशासित जीवन
  • ब्रह्मांडीय चेतना से संबंध

भारत के गांव-शहरों में योग महोत्सव की तैयारी

1. गांवों में योग का उल्लास:
भारत के कोने-कोने में, जहां तक सड़कों की पहुंच नहीं, वहां भी अब योग की पहुंच है। पंचायत भवनों, स्कूलों, मंदिर प्रांगणों, और खेतों की मेड़ों पर भी योग सत्र आयोजित होते हैं।

  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ता महिलाओं को योग का अभ्यास सिखा रही हैं।
  • कृषक समुदाय इसे खेतों में काम के बाद अपनाकर शरीर को स्फूर्त कर रहे हैं।
  • ग्राम स्तर पर योग शिविरों का आयोजन हो रहा है, जहां युवा से लेकर बुजुर्ग तक भाग ले रहे हैं।

2. शहरों में त्योहार का रूप:
नगर निगम, शिक्षण संस्थान, आईटी कंपनियाँ, अस्पताल, सेना और पुलिस विभाग, सभी ने इस दिन विशेष आयोजन रखे हैं। पार्कों में सुबह-सवेरे हज़ारों की संख्या में लोग एक साथ योगासन करते हैं।

  • सार्वजनिक स्थलों पर LED स्क्रीन के माध्यम से योग प्रशिक्षकों के लाइव सत्र दिखाए जाते हैं।
  • स्कूलों में बच्चों के लिए विशेष योग प्रतियोगिताएं रखी जाती हैं।
  • स्वास्थ्य मेला जैसे आयोजन होते हैं, जहां योग के साथ-साथ आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, और ध्यान पर सेमिनार होते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस

भारत की यह पहल अब विश्व का पर्व बन चुकी है। अमेरिका, कनाडा, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, और अफ्रीकी देशों में भी भारतीय दूतावासों के नेतृत्व में योग दिवस मनाया जाता है।

  • न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर, लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर, और पेरिस के एफिल टॉवर के नीचे सामूहिक योग सत्र आयोजित होते हैं।
  • यूनेस्को ने योग को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी मान्यता दी है।

नवाचार: डिजिटल और वर्चुअल योग

कोविड-19 महामारी के बाद से डिजिटल मंचों पर योग सत्रों का चलन बढ़ा है। अब भारत सरकार का “योगा एट होम” अभियान लाखों लोगों तक वर्चुअल माध्यम से योग पहुंचा रहा है।

  • माईगव ऐप, योग पोर्टल, और मोदी एप पर योग विडियोज़, कोर्स और लाइव क्लासेस उपलब्ध हैं।
  • क्लाउड आधारित हेल्थ मॉनिटरिंग टूल्स योग अभ्यास के प्रभाव को नापने में मदद कर रहे हैं।

योग: चिकित्सा, अध्यात्म और राष्ट्रवाद का संगम

योग अब केवल शरीर साधना नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग बन चुका है। यह आत्मनिर्भर भारत और स्वस्थ भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है।

  • योग से डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापा, अवसाद आदि बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
  • यह रक्षा बलों में जवानों की मानसिक मजबूती का आधार बन चुका है।
  • कॉर्पोरेट क्षेत्र में स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए इसे बड़े स्तर पर अपनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल योग को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया, बल्कि हर भारतीय को इससे जोड़ने का आह्वान किया है। उनका यह कथन—

योग एक अमूल्य उपहार है। यह हमारे अतीत का प्रतीक और हमारे भविष्य का मार्ग है।
—विश्व समुदाय में भारत के आध्यात्मिक नेतृत्व को भी रेखांकित करता है।


जन-जन तक पहुंचता योग

1. युवाओं में जागरूकता:
आज का युवा योग को फ़ैशन नहीं, स्वास्थ्य का साधन मानकर अपनाने लगा है। मोबाइल ऐप, इंस्टाग्राम रील्स, और यूट्यूब चैनलों पर योग ट्रेंड कर रहा है।

2. महिलाएं और योग:
स्त्रियां अब योग को आत्मरक्षा, फिटनेस और मातृत्व स्वास्थ्य का साधन मान रही हैं। प्रेगनेंसी योगा और फीमेल फिटनेस सर्किल तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

3. बुजुर्गों के लिए संजीवनी:
60+ उम्र के लोगों के लिए विशेष योग आसनों का प्रशिक्षण चल रहा है जिससे वे बिना दवा के स्वस्थ जीवन जी सकें।


भविष्य की दिशा: योग और नीति निर्माण

सरकार अब योग को शिक्षा नीति, स्वास्थ्य नीति और ग्रामीण विकास योजनाओं से जोड़ रही है।

  • NEP 2020 में योग को सह-अकादमिक गतिविधि के रूप में शामिल किया गया है।
  • आयुष मंत्रालय योग अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है।
  • फिट इंडिया मूवमेंट और Eat Right Campaign जैसे अभियानों से योग को जोड़ा गया है।

एक दिवस नहीं, जीवन पथ है योग

इस अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जब हिंदुस्तान के गांव-शहर एक स्वर में ओम् का नाद करेंगे, और पूरी दुनिया योग की लय में बहेगी, तब यह स्पष्ट होगा कि योग एक दिवस नहीं, एक दर्शन है।

“कल दुनिया में बहेगी योग की बयार,
हिंदुस्तान में गांव-शहर में मनेगा त्योहार।
आसन, प्राणायाम, ध्यान और धारणा,
मानवता की यही तो है सच्ची आराधना।”

आइए, इस 21 जून को हम सभी केवल योग करें ही नहीं, योगमय जीवन का संकल्प लें—क्योंकि योग से ही होगा नवभारत का नवजागरण।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor