प्रिय रेखा,
तुम्हारे बिना यह पहला सावन है…
तुम्हारे बिना यह पहला दीपक जला है…
और तुम्हारे बिना, यह पहला सपना पूरा होने चला है।
मैं जानता हूं तुम सुन रही हो। शायद देख भी रही हो। हो सकता है कि तुम्हारे स्वर्गलोक की किसी खिड़की से नीचे झांक रही हो, जहां कुछ बच्चियां किताबें खोले बैठी हों और एक नाम हर बार उनके होठों पर आए – रेखा सोमानी।
रेखा तुम्हारे जाने के बाद यह घर वैसा नहीं रहा। वो चाय का प्याला, जो हर शाम तुम्हारे हाथ से मिलता था, अब सिर्फ आदत में शामिल एक खाली कप है। पर तुमने जो अधूरे सपने छोड़े, उन्हें अब मैंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। तुमने कहा था, “हर बच्चा पढ़ सके, बस यही काफी है।” और आज, मैं तुम्हें बताने आया हूँ — तुम्हारा सपना अब मेरा संकल्प बन गया है।
तुम्हारा संघर्ष ही हमारी प्रेरणा है
रेखा, जब तुमने सीए बनने का निर्णय लिया था, तुमने सिर्फ किताबें नहीं उठाईं — तुमने समाज की धारणाओं को भी चुनौती दी थीं। दो बेटियों की मां, एक सफल सीए पति की पत्नी, और कॉलेज की प्राचार्या होकर भी तुमने खुद को फिर से छात्रा बनाया।
तुमने 37 वर्ष की उम्र में सीए कोर्स शुरू किया, वो भी तब जब लोग रिटायरमेंट की योजना बनाते हैं। लेकिन तुमने न सिर्फ परीक्षा दी, बल्कि 7 विषयों में डिस्टिंक्शन के साथ पास की। कौन भूल सकता है वो दिन, जब तुम्हें बधाइयों के संदेशों से फोन बजता रहा — और तुम मुस्कराते हुए कहती थीं, “अभी तो बस शुरुआत है…”
तुम्हारा सपना था – सुपर 10
रेखा, तुम्हें याद है जब तुमने कहा था,
“मैं भी आनंद कुमार की तरह कुछ करना चाहती हूं, लेकिन लड़कियों के लिए।”
तुमने सुपर 30 से प्रेरित होकर ‘सुपर 10’ की योजना बनाई थी — ऐसी होनहार बच्चियां जो 90% से ऊपर अंक लाएं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण सीए बनने का सपना छोड़ दें — उन्हें पढ़ाना, उनका खर्च उठाना, और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना — यह तुम्हारा स्वप्न था।
और आज, तुम्हारा वही सपना “रेखा सोमानी फाउंडेशन” के रूप में साकार हो रहा है। तुमने सुपर 10 का सपना देखा था मगर मैं देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि कोई भी जरूरतमंद और मजबूर बच्ची जो होनहार है और जिसने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं उन्हें सीए बनने से कोई नहीं रोक सकता। सुपर-10 हमारी सीमा नहीं रहेगी। रेखा सोमानी फाउंडेशन सारा खर्च उठाएगा। शिक्षा की जो लौ तुमने जलाई थी उसे प्रज्वलित रखने की जिम्मेदारी अब मेरी है। मैं सिर्फ तुम्हारे सपनों के संकल्पों और परिवार की जिम्मेदारी के लिए जी रहा हूं। सौम्य और श्रेया भी तुम्हें बहुत याद करती हैं। हम तुम्हें एक पल भी नहीं भूले हैं…।
रेखा सोमानी फाउंडेशन: तुम्हारी विरासत का दीप
इस फाउंडेशन के ज़रिए अब होनहार बच्चियों को नि:शुल्क सीए की शिक्षा, कोचिंग, प्रशिक्षण, भोजन और आवास दिया जाएगा।
मैंने तय किया है –
- वे बच्चियाँ जो राजकीय स्कूलों से 90% या अधिक अंक लाती हैं,
- जो प्रतिभाशाली हैं लेकिन पैसों के कारण रुक जाती हैं,
- वे अब तुम्हारी कहानी से हौसला पाएंगी।
तुम अब सिर्फ मेरी पत्नी नहीं, हजारों बच्चियों की प्रेरणा बन चुकी हो।
जब नियति ने अन्याय किया…
2018 में जब कैंसर ने तुम्हें छुआ, तुमने कहा, “मैं इसे भी हरा दूंगी।”
और सचमुच… तुमने उस समय भी मौत को मात दी।
लेकिन 2023 में जब दोबारा वो बीमारी लौटी, तब भी तुम हारी नहीं, बस थक गईं।
6 नवंबर 2024 को जब तुमने अंतिम सांस ली, वो दिन नहीं, एक युग खत्म हुआ।
तुम गईं, लेकिन अपनी कर्मठता, करुणा और कर्तव्यबोध की अमिट छाप छोड़ गईं।
अब मैं तुमसे वादा करता हूँ…
रेखा,
“अब कोई भी बच्ची केवल पैसों की कमी के कारण सीए बनने से वंचित नहीं रहेगी।”
मैं तुम्हारे अधूरे काम को न केवल पूरा करूंगा, बल्कि उसे और भी बड़ा बनाऊंगा।
तुम्हारा नाम अब सिर्फ स्मृति नहीं, संस्था है।
तुम्हारा जीवन अब सिर्फ अतीत नहीं, प्रेरणा है।
और मैं हर वर्ष जब किसी छात्रा को सीए बनते देखूंगा, तो मन ही मन कहूंगा –
“देखो रेखा, तुम्हारा सपना जिंदा है।”
समाज से मेरी विनती
अगर इस पत्र को पढ़ रहा कोई व्यक्ति, संस्था या शिक्षक समाज के लिए कुछ करना चाहता है —
तो आइए, रेखा के इस सपने में सहभागी बनिए।
हम सब मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाएं, जहां सपने आर्थिक बाधाओं से नहीं टूटें।
अंत में…
रेखा,
तुम्हारी आवाज़ अब नहीं सुनाई देती, लेकिन तुम्हारा हर शब्द गूंजता है।
तुम्हारी मुस्कान अब नहीं दिखती, लेकिन तुम्हारा चेहरा हर उस बच्ची की आंखों में है, जो अब सपने देखती है।
तुम स्वर्ग में भी पढ़ा रही होगी, मुझे यकीन है।
और मैं यहां, तुम्हारे नाम को रोशनी बना रहा हूं।
तुम्हारा ही —
देवेंद्र
(तुम्हारे नाम को संजोने वाला एक चिराग)
राइजिंग भास्कर की एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित की यह स्टोरी हर उस महिला को समर्पित जिसके भीतर रेखा सोमानी की झलक मिलती है…
रेख़ा सोमानी का जीवन हमें बताता है कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, समाज का उद्धार है। “रेखा सोमानी फाउंडेशन” की यह पहल उन बच्चियों के लिए है, जो बड़े सपने तो देखती हैं, लेकिन उनके पास उन्हें पूरा करने का कोई ज़रिया नहीं होता। यदि आप इस पहल से जुड़ना चाहते हैं — सहायता करना चाहते हैं या कोई होनहार बच्ची इस योजना का हिस्सा बनना चाहती है — तो देवेंद्र सोमानी से 9414156057 संपर्क करें।
शिक्षा एक अधिकार है, न कि विशेषाधिकार।
और रेखा सोमानी, इस विचार की सजीव प्रतिमूर्ति थीं।







