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Thursday, April 30, 2026, 7:51 pm

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पिस्तौल और बम इंकलाब नहीं लाते…इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है, यही चीज थी, जिसे हम प्रकट करना चाहते हैं : नरेंद्रसिंह

भगतसिंह के शहादत दिवस 23 मार्च और जन्म दिन 28 सितंबर को हिन्दुस्तान में कहीं भी रहूं पिछले 20 सालों से आवश्यक रूप से रक्तदान करता हूं : नरेंद्र सिंह

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

8302316074 diliprakhai@gmail.com

वंदे भारत सेवा संस्थान आगामी 28 सितंबर को शहीदे आजम भगतसिंह के जन्म दिन पर विशाल रक्तदान शिविर आयोजित करने जा रहा है। इसकी तैयारियां चल रही हैं। संस्थान के सचिव नरेंद्र सिंह राठौड़ ऐसे शख्स जिन्हें भगत सिंह का चरित्र आज भी प्रोत्साहित करता है जीवन में सर्वस्व त्याग की भावना के लिए। देश आजाद है। इसके पीछे भगत सिंह जैसे शहीदों के लहू ने अपना असर दिखाया है। देश आजाद हुआ, लेकिन अब भी हमारे सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। एक तरफ देश की आजादी को अक्षुण्ण रखने की चुनौती है, वहीं देश और समाज में पीड़ा की पराकाष्ठा नजर आती है। कैसे समाज को राह दिखाई जाए? बस इसी भावना से वंदे भारत सेवा संस्थान का गठन हुआ। संस्थान ने हर साल शहीदे आजम भगत सिंह के जन्म दिन पर विशाल रक्तदान शिविर आयोजित करने का बीड़ा उठाया है। संस्थान के सचिव नरेंद्रसिंह से रक्तदान शिविर के औचित्य से लेकर भगत सिंह के विचारों की आज के समय में जरूरत और विभिन्न विचारोत्तेजक मुद्दों पर बातचीत हुई। यहां प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश।

1-भगतसिंह के जीवन और विचारों ने आपको व्यक्तिगत रूप से किस तरह प्रेरित किया?

नरेंद्र सिंह -मेरे पिता स्वर्गीय श्री दयाल सिंह जी राठौड़ की प्रेरणा से ही मुझे भगत सिंह का चरित्र और मार्गदर्शन उनके सान्निध्य में रहकर बचपन से ही मिला

2-भगत सिंह जन्मोत्सव के अवसर पर रक्तदान शिविर आयोजित करने का विचार कैसे आया? कितने सालों से आयोजन हो रहा है?

नरेंद्र सिंह –आदरणीय मैं पिछले 20 सालों से भगत सिंह जी के जन्मदिवस और उनकी शहादत 23 मार्च को हिंदुस्तान में कहीं भी रहूं आवश्यक रूप से रक्तदान करता हूं।

3-क्या आप मानते हैं कि आज के युवाओं में भी भगतसिंह जैसी क्रांति की भावना मौजूद है?

नरेंद्र सिंह- आदरणीय आज की युवा पीढ़ी को जरूरत है मार्गदर्शन की… उन्हें भगत सिंह जी के चरित्र और उनकी शिक्षा से वाकिफ कराने की… क्योंकि आज का युवा जितना भगत सिंह को अपना आदर्श मानता है उतना अन्य क्रांतिकारी को नहीं।

4-आपके लिए “क्रांति” का मतलब सिर्फ राजनीतिक परिवर्तन है या सामाजिक बदलाव भी?

नरेंद्र सिंह--आदरणीय क्रांति विचारों से उत्पन्न होती है क्योंकि भगत सिंह ने कहा था “पिस्तौल और बम इंकलाब नहीं लाते, बल्कि इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है और यही चीज थी, जिसे हम प्रकट करना चाहते हैं।”

5-जब भगतसिंह कहते थे “मेरे लहू का हर कतरा इंकलाब लाएगा”, तो आपको इसमें रक्तदान की भावना कैसे नजर आती है?

नरेंद्र सिंह-आदरणीय जैसा की भगत सिंह ने कहा था मेरे लहू का हर कतरा इंकलाब लाएगा और इंकलाब का मतलब होता है परिवर्तन समाज में हर बुराई को हम दूर करें अज्ञान, अन्याय, अभाव को दूर करें।

6- इस रक्तदान शिविर का मुख्य उद्देश्य क्या है?

नरेंद्र सिंह-शिविर का मुख्य उद्देश्य शहीदों की शहादत को जिंदा रखना है

7-आयोजन का पैमाना कितना बड़ा है और कितने लोगों के जुड़ने की उम्मीद है?

नरेंद्र सिंह-आयोजन स्थल गौरव पथ शहीदे आजम भगतसिंह की प्रतिमा स्थल रहेगा समय शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक रहेगा, जहां करीब 2 हजार लोगों के आने की संभावना है।

8-रक्तदान शिविर में भाग लेने वालों के लिए क्या विशेष सुविधाएं रखी जा रही हैं?

नरेंद्र सिंह-रक्तदान करने वाले रक्तदाताओ को फ़ूड पैकेट प्रदान कर दुपट्टा पहनाकर सम्मान किया जाएगा

9-रक्तदान को लेकर आज भी समाज में कई मिथक हैं, आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे?

नरेंद्र सिंह-समय समय पर रक्तदान जागरूकता रैली, बैठकें आयोजित करते हैं। मैंने स्वयं ने 123 बार रक्तदान किया है।

10- इस शिविर में दान किए गए रक्त का उपयोग किन जरूरतमंदों के लिए किया जाएगा?

नरेंद्र सिंह -रक्तदान शिविर में MDM, MGH, UMMED , AIMS, ROTARY की टीमें आएंगी उनके माध्यम से रक्त संग्रह किया जाएगा।

11-युवाओं को रक्तदान और सामाजिक सेवा की ओर कैसे प्रेरित किया जा सकता है?

नरेंद्र सिंह – युवाओं को प्रेरित करने के लिए ये रक्तदान भगतसिंह प्रतिमा पर ही उनके जन्मदिवस पर ही किया जा रहा है। युवाओं को सामाजिक कार्यों में जोड़ने के लिए हमें देश के शहीदों की वीर गाथा पढ़ानी होगी।

12-क्या आपको लगता है कि आज के दौर में ‘क्रांति की मशाल’ जलाने का तरीका बदल गया है?

नरेंद्र सिंह -आज के दौर में व्यक्ति आध्यात्मिकता से हटकर भौतिकतावादी हो गया है । जातिवाद, सम्प्रदाय, क्षेत्रवाद, भाषावाद ने जगह ले ली है। इसी कारण से क्रांति की मशाल जाति, धर्म, सम्प्रदाय के लोगों ने ले ली है।

13-भगतसिंह ने अपने दौर में अंग्रेजी हुकूमत से लड़ाई लड़ी, आज के युवाओं को किन चुनौतियों से लड़ना चाहिए?

नरेंद्र सिंह -भगतसिंह को प्रेरणा उसके दादा अर्जुनसिंह, उसके चाचा अर्जुन सिंह से मिली। इसी कारण उनके विचार सशक्त थे। आज के युवा बेरोजगारी, नशा, जाति, धर्म, सम्प्रदाय, क्षेत्रवाद से लड़ें ओर देश को मजबूत करें।

14-आप युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे ताकि वे ‘आजादी’ और ‘जिम्मेदारी’ का सही मतलब समझ सकें?

नरेंद्र सिंह– शहीदे आजम भगतसिंह के ये विचार आज युवाओं को अपनाकर अपने विचार दृढ़ करने चाहिए कि किसी भी इंसान को मारना आसान है, लेकिन उसके विचारों को नहीं। महान साम्राज्य टूट जाते हैं, लेकिन विचार जिंदा रहते हैं।

15-क्या वंदे भारत सेवा संस्थान युवाओं को नियमित रूप से सामाजिक अभियानों में शामिल करने की कोई योजना रखता है?

नरेंद्र सिंह -वन्दे भारत सेवा संस्थान केवल रक्तदान ही नहीं अंगदान, केशदान, खेल एवं शिक्षा के क्षेत्र में काम करता है। निरन्तर प्रयत्नशील है।

16-वंदे भारत सेवा संस्थान की स्थापना कब और किस उद्देश्य से हुई? आप इस संस्थान में किस पद पर हैं और पूरी कार्यकारिणी में प्रमुख लोगों के बारे में बताएं।

नरेंद्र सिंह-वन्दे भारत संस्थान की स्थापना 14 जून 2024 को विश्व रक्तदाता दिवस पर हुई। उद्देश्य केवल समाज से अज्ञान, अन्याय, अभाव को दूर करना। मैं नरेंद्र सिंह राठौड़ संस्थान के सचिव के पद पर हूं। अध्यक्ष विजय अरोड़ा, संस्थान के संरक्षक सुरेश डोसी, उमेश लीला, विनोद आचार्य, उपाध्यक्ष मनोज जैन, कोषाध्यक्ष गौतम कटारिया, कार्यकारिणी सदस्य सुधीर सारडा, रतन माहेश्वरी, रंजुल घोष, कुलदीप सिंह, गौरव सांखला, किशन पूनिया ( प्रवक्ता), डॉ राकेश वशिष्ठ मीडिया प्रभारी।

17-आपके संस्थान ने अब तक कौन-कौन से प्रमुख सामाजिक कार्य किए हैं?

नरेंद्र सिंह -संस्थान के प्रयास से जोधपुर गौरव पथ पर शहीदे आजम भगत सिंह के पास उनके दो साथी शहीद ए आज़म राजगुरु और शहीद ए आज़म सुखदेव की प्रतिमा भी सरकार द्वारा स्थापित करने की घोषणा की गई। यह संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धि है। संस्थान ने वर्ष 2024 में विश्व अंगदान दिवस पर एक कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें 21 लोगों ने अंगदान के लिए रजिस्ट्रेशन किया, नेत्र दान शिविर, CPR कैंम्प, 29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस पर जोधपुर के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाडियोंं का सम्मान, समय समय रक्तदान शिविर।

18-रक्तदान शिविर हर साल भगतसिंह जयंती पर ही क्यों आयोजित होता है? क्या आपको भगतसिंह का व्यक्तित्व इतना प्रभावित करता है? कुछ मन के भाव बताएं?

नरेंद्र सिंह-रक्तदान शिविर भगतसिंह के जयंती पर मनाने का उद्देश्य उनकी जन्म जयंती को उनकी प्रतिमा स्थल पर शाम को 5 बजे रात्रि 10 बजे तक किया जाता है ताकि हर व्यक्ति दिनभर अपने कार्यों से फ्री होकर रक्तदान कर सके और यदि रक्तदान नहीं भी करे तो इस अनूठे कार्यक्रम में सहभागी बन सकें।

19-भविष्य में आप और किन राष्ट्रीय नायकों की प्रेरणा से कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहे हैं?

नरेंद्र सिंह-विचार यही है जिन शहीदों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी उनकी शहादत को याद करते हुए इस प्रकार के कार्यक्रम हों। जैसे 19 दिसंबर रामप्रसाद बिस्मिल, असफाक उल्लाह खान, ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान दिवस पर, 23 जनवरी नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जन्मोत्सव सहित क्रन्तिकारियों के बलिदान ओर शहीद दिवस पर कार्यक्रम हों।

20-आपके अनुसार, अगर भगतसिंह आज जीवित होते तो रक्तदान और समाज सेवा जैसे अभियानों के बारे में क्या कहते?

नरेंद्र सिंह-आज भगतसिंह यदि जिंदा होते तो वे सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की नीति पर कार्य करते और राष्ट्रहित सर्वोपरी रखते।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor