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Friday, May 1, 2026, 7:52 am

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श्री अन्नपूर्णा रसोई…8 रुपए में गर्म और स्वादिष्ट भोजन, बैठने की सुविधा, गर्मी में कूलर-पंखा-शीतल जल…राइजिंग भास्कर की पड़ताल करती रिपोर्ट

आठ रुपए की पर्ची, पेट भरती है बिना माथापच्ची :

राइजिंग भास्कर पहुंचा शहर की श्री अन्नपूर्णा रसोई…न कोई हड़बड़ी, न कोई परेशानी, लोग अन्नपूर्णा रसोई में आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, बैठने को बैंच, टेबल पर सजी थाली, 6-7 रोटी, सब्जी/दाल/कढ़ी/चावल/खिचड़ी/अचार…आठ रुपए की पर्ची और बिना कोई माथापच्ची के भरपेट भोजन…। साथ में गर्मी में लगे हैं कूलर-पंखे, वॉश बेसिन, शीतल जल की मशीन…राजस्थान में अब भूख भी भय खाती है…।

प्रतिष्ठित व्यवसायी व वरिष्ठ समाजसेवी की एक अनूठी कॉल :

शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी और वरिष्ठ समाजसेवी श्री सुरेश राठी ने अनूठी कॉल ली है। उन्होंने तय किया है कि उनके दस कर्मचारी हर शनिवार श्री अन्नपूर्णा रसोई में भोजन करेंगे, जिसका भुगतान उनके द्वारा किया जाएगा…। इसकी शुरुआत शनिवार को खुद सुरेश राठी जी, राइजिंग भास्कर टीम और राठी जी के स्टाफ ने भोजन करके की। बतौर राठीजी ”हम चाहते हैं कि श्री अन्नपूर्णा रसोई का शहरवासी महत्व समझें। आठ रुपए में मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मिल रहा है तो हमें उसका अधिकाधिक फायदा उठाना चाहिए।

अन्नपूर्णा से इंदिरा और फिर अन्नपूर्णा की कहानी शॉर्ट में :

2016 में भाजपा की तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने श्री अन्नपूर्णा रसोई की शुरुआत की। 2019 में कोरोना आ गया। विपक्ष द्वारा मांग उठाने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2020 में इंदिरा रसोई के नाम पर इसे पुन: शुरू किया। बाद में भाजपा की भजनलाल शर्मा सरकार ने इसे फिर से बदलाव के साथ श्री अन्नपूर्णा रसोई नाम से शुरू किया…प्रस्तुत है मुक्कमल रिपोर्ट…

दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. पंकज जांगिड़. जोधपुर

जोधपुर की गलियों-नुक्कड़-चौराहों पर भंडारे, कैंप और शिविर चल रहे हैं…बाबा रामदेव के मेले को लेकर राजस्थान ही नहीं देश के कोने-कोने से श्रद्धालु और जातरू जोधपुर पहुंच रहे हैं। आस्था की पगडंडी पर सवार, मौसम की परवाह नहीं करते हुए और हर मुश्किलों का सामना करते हुए जातरू और श्रद्धालु जोधपुर में मसूरिया बाबा के दर्शन करने के बाद रामदेवरा की ओर कूच कर रहे हैं…पूरे शहर में घणी-घणी खम्मा बाबा रामदेव जी नै…रुणीचे रा धणिया, अजमाल जी रा कंवरा, राणी नैत्तल रा भरतार, म्हारी सुगणा बाई रा बीर, म्हारो हैलो सुणो नी रामापीर…जैसे भजन गूंज रहे हैं। जगह-जगह लोग नाचते-गाते चल रहे हैं। ऐसे ही माहौल में राइजिंग भास्कर की टीम निकल पड़ी है शहर की श्री अन्नपूर्णा रसोई का जायजा लेने…।

23 अगस्त 2025, दोपहर 12:30 बजे : 

राइजिंग भास्कर टीम बॉम्बे मोटर्स चौराहा स्थित श्री अन्नपूर्णा रसोई केंद्र पर है। कुछ ही देर में शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी और वरिष्ठ समाजसेवी श्री सुरेश राठी अपने दस कर्मचारियों के साथ यहां पहुंचते हैं। श्री अन्नपूर्णा रसोई में पहले से ही एक दो लोग बैठकर भोजन कर रहे होते हैं। श्री राठीजी के नेतृत्व में हम सभी फोटो खिंचवाते हैं और अपना-अपना नाम दर्ज करवाते हैं। श्री राठी जी सबकी ओर से आठ रुपए प्रति हैड भुगतान करते हैं। सबके चेहरों पर संतोष और अनूठी मुस्कान है। ऐसा लग रहा है जैसे किसी खास मकसद को पूरा होते देख रहे हैं। राठीजी कहते हैं आइए पुरोहित जी, आइए राखी जी और हम सभी, स्टाफ के साथ भोजन के लिए बैठते हैं। दाल, चावल, बैंगन-कद्दू की सब्जी, रोटी, अचार, (भुजिया, दही और खजूर राठी जी की ओर से) परोसे जाते हैं। भोजन करके जो तृप्ति और संतोष का भाव उत्पन्न होता है वो ठीक वैसा ही महसूस किया जैसे किसी भी आदर्श घर की रसोई में हम महसूस कर सकते हैं। कुछ देर राखी ने रसोई में रोटियां बैलने में मदद कर सेवा का लुत्फ उठाया और आत्म संतोष का भाव महसूस किया।

श्री अन्नपूर्णा रसोई की विशेषताएं :

1-बैठने को बैंच-टेबल : यहां पर बैठने को बैंचे लगी है और टेबल पर भोजन परौसा जाता है। जहां आराम से बैठकर भोजन सम्मान के साथ किया जा सकता है।

2-कूलर-पंखे : हॉल में कूलर और पंखे लगे हुए हैं। भीषण गर्मी में ऐसी सुविधा मिल जाए तो फिर क्या कहना। राजस्थान के जोधपुर में जहां गर्मी 12 महीने पड़ती है। ऐसे में कूलर और पंखे राहत का आसरा होते हैं।

3-शीतल जल की व्यवस्था : यहां पर शीतल जल की मशीन लगी हुई। ठंडा-ठंडा पानी पीने को मिलता है तो भोजन करने के बाद आत्मा तक तृप्त हो जाती है।

4-गर्म और स्वादिष्ठ खाना : यहां पर भोजन की विशेषता यह है कि खाना गर्म और स्वादिष्ठ है। कंप्यूटर ऑपरेटर नासिर बताते हैं कि 2023 में श्री अन्नपूर्णा रसोई की इस जोन में शुरुआत हुई। ओम शिक्षण संस्थान के अंतर्गत यह रसोई संचालित होती है। इस संस्थान के अंतर्गत शहर में दो रसोई चल रही है।

5-हाथ थोने को वॉश बेसिन और उत्कृष्ट सफाई : पूरे हॉल में उत्कृष्ट साफ-सफाई है। हाथ धोने को वॉश बेसिन है और ग्राहकों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता है।

6-फूड लाइसेंस भी बना हुआ : श्री अन्नपूर्णा रसोई का फूड लाइसेंस भी बना हुआ था और दीवार पर टंगा हुआ भी था। पूरी रसोई व्यवस्थित थी।

7-अगर खाना बच जाए तो? सुपरवाइजर अक्मुद्दीन बताते हैं कि ठेकेदार अनिल गहलोत के संचालन में दस रसोई संचालित हो रही है। हमारे यहां केवल चपाती बनती है। सब्जी आदि आखलिया चौराहा स्थित सेंटर से बनकर आती है। अगर खाना बच जाता है तो हमारे दस सेंटरों में हम भेज देते हैं। यह व्यवस्था रोज की है। जहां जरूरत होती है वहां सब्जी-दाल-चावल भेज देते हैं। चपाती अक्सर पूरी हो जाती है बचती नहीं है। सब्जी आदि पहुंचाने के लिए मुझे स्कूटी भी दे रखी है।

मैं चाहता हूं शहर में भूख पराजित हो, मां अन्नपूर्णा का हर किसी को आशीर्वाद मिले : श्री सुरेश राठी

राजस्थान में इतनी अच्छी योजना है। हमें इसका अधिक से अधिक फायदा उठाना चाहिए। हर आदमी को पेट भरने को भोजन चाहिए। हर आदमी रोटी के लिए काम करता है। इसलिए मैं चाहता हूं शहर में भूख पराजित हो, मां अन्नपूर्णा का हर किसी को आशीर्वाद मिले। यह कहना है शहर के प्रतिष्ठित बिजनेसमैन और वरिष्ठ समाजसेवी श्री सुरेश राठी का। राठीजी ने कहा-इस योजना को हम प्रमोट करना चाहते हैं और हमारा उद्देश्य एक मात्र यही है कि आठ रुपए में अगर भरपेट भोजन मिल रहा है तो निसंकोच इसका हमें फायदा उठाना चाहिए। इसके लिए हमने कॉल लिया है कि हर शनिवार हमारी कंपनी के दस कर्मचारी श्री अन्नपूर्णा रसोई में भोजन करेंगे और उसका भुगतान हम करेंगे। यह एक पहल है। ऐसी पहल हर किसी को करना चाहिए। क्योंकि श्री अन्नपूर्णा ही हमारे सारे काम को सफल कर सकती है।

22 अगस्त 2025, शाम 6 बजे : 

भगत की कोठी रेलवे स्टेशन के आगे बस स्टैंड के करीब श्री अन्नपूर्णा रसोई का संचालन किया जा रहा है। कंप्यूटर ऑपरेटर प्रेमाराम ने बताया कि सुबह करीब 200 और शाम को भी करीब 200 टोकन का टारगेट रहता है। सुबह 8:30 से दोपहर 2:00 बजे और शाम को 5:30 बजे से रात 9:00 बजे तक भोजन की व्यवस्था रहती है। 200 टोकन पूरे होने पर भोजन रोक दिया जाता है।

जब राइजिंग भास्कर की टीम पहुंची तब कुछ लोग भोजन कर रहे थे। एक ग्राहक ने बताया कि वे बाबा के मेले में जा रहे हैं और भोजन के लिए यहां अच्छी व्यवस्था देखी तो रुक गए। यहां आठ रुपए में सस्ता और अच्छा घर जैसा भोजन मिल रहा है। वाकई यहां अच्छी व्यवस्था है। जब राइजिंग भास्कर की टीम पहुंची तो ककड़ी की सब्जी, दाल, चावल, चपाती और अचार परोसा जा रहा था। सभी भोजन यहां की रसोई में ही बनाया जाता है। इस जोन में 2023 में श्री अन्नपूर्णा रसोई शुरू की गई थी। यह रसोई कल्पना एंटरप्राइजेज के संचालन में चलाई जा रही है। इसके संचालक ठेकेदार लालाराम हैं। लालाराम ने फोन पर बताया कि पुरोहितजी हमारा उद्देश्य समाजसेवा है। कोशिश रहती है कि ग्राहकों को गर्मागर्म भोजन मिले और गुणवत्ता के साथ। जब टीम पहुंची तो यहां पर बैंचों पर लोग बैठकर भोजन कर रहे थे। कूलर और पंखे लगे हुए थे। हाथ धोने की व्यवस्था है और पीने को ठंडे पानी की मशीन का ठंडा पानी भी उपलब्ध था। कुक संतोष, मुकेश और सहयोगी रिंकू ने बताया कि उन्हें इस सेवा कार्य में आनंद आता है।

6 जनवरी 2024 को शुरू हुई श्री अन्नपूर्णा रसोई नए कलेवर के साथ : 

राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने ”लक्ष्य अंत्योदय-प्रण अंत्योदय-पथ अंन्तोदय“ के संकल्प के साथ 06 जनवरी 2024 से प्रदेश के सभी 240 नगरीय निकायो में 1000 रसोइयो के माध्यम से श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना का संचालन शुरू किया था। जोधपुर में 48 श्री अन्नपूर्णा रसोई संचालित की जा रही थी, जिसमें से अब 15 बंद हो चुकी है।

योजना की विशेषताएं : 
  • लाभार्थी को 8 रुपए में शु़द्ध, ताजा एवं पौष्टिक भोजन।
  • सम्मानपूर्वक एक स्थान पर बैठाकर भोजन व्यवस्था।
  • राज्य सरकार द्वारा 22 रूपये प्रति थाली अनुदान।
  • योजना हेतु 250 रुपए करोड रुपए का प्रावधान।
  • प्रतिदिन 2.52 लाख व्यक्ति एवं प्रतिवर्ष 9.21 करोड लोगो को लाभान्वित करने का लक्ष्य। आवश्यकता के अनुरूप बढाया जा सकता है।
  • सामान्यतः दोपहर का भोजन प्रातः 8:30 बजे से मध्यान्ह 3:00 बजे तक एवं रात्रिकालीन भोजन सांयकाल 5:00 बजे से 9:00 बजे तक उपलब्ध कराया जायेगा।
  • स्थानीय संस्थाओ के सेवाभाव एवं सहयोग से रसोइयों का संचालन।
  • भोजन मेन्यू में प्रति थाली 300 ग्राम चपाती, 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 100 ग्राम चावल/मिलेटस (श्री अन्न) खिचडी एवं अचार सम्मिलित है।
  • विकेन्द्रित स्वरूप- जिला स्तरीय समिति को आवश्यकतानुरूप स्थान, मैन्यू व भोजन समय के चयन की स्वतंत्रता।
  • रियल – टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग एस.एम.एस गेटवे से लाभार्थी को सूचना एवं फीडबैक सुविधा।
  • प्रत्येक रसोई संचालन हेतु एकमुश्त 5 लाख रुपये आधारभूत एवं 3 लाख रुपये प्रतिवर्ष आवर्ती व्यय का प्रावधान।
  • राज्य/ जिला स्तरीय समिति द्वारा निरीक्षण व गुणवत्ता जांच।

योजना का स्वरूप
प्रशासनिक व्यवस्था
  • राज्य/जिला स्तरीय प्रबन्धन व मोनेटरिंग समिति का गठन
  • स्थानीय संख्याओं को चयन में प्राथमिकता
  • योजना की स्थायी एजेण्डा के माध्यम से नियमित समीक्षा
थाली की संख्या नगर निगम – 200 थाली दोपहर व 200 थाली रात्रि भोजन
नगर परिषद् – 100 थाली दोपहर व 100 थाली रात्रि भोजन
नगर पालिका – 100 थाली दोपहर व 100 थालीरात्रिभोजन
योजना में आपकी सहभागिता

इस योजना में व्यक्ति/संस्था/कॉर्पोरेट/फर्म आर्थिक सहयोग भी कर सकते है। दान/सहयोग मुख्यमंत्री सहायता कोष अथवा रजिस्टर्ड जिला स्तरीय श्री अन्नपूर्णा रसोई के बैंक खाते में ही किया जायेगा।

कब शुरू हुई अन्नपूर्णा रसोई योजना? अन्नपूर्णा रसोई योजना की शुरुआत 
अन्नपूर्णा रसोई योजना की शुरुआत भारत में बहुत पहले से हो गई। राजस्थान में अन्नपूर्णा रसोई योजना की शुरुआत वसुंधरा राजे ने 15 दिसंबर 2016 को की। सबके लिए भोजन, सबके लिए सम्मान” तब वसुंधरा राजे सरकार की भावना थी। वसुन्धरा राजे सरकार द्वारा इस योजना की शुरुआत की गई तब वैन द्वारा चिन्हित स्थलों पर निश्चित समय से खाना दिया जाता था।
भारत में रसोई की शुरुआत
भारत में अगर सरकार द्वारा सस्ती दरों पर चलाई गई रसोई योजना की बात की जाए तो सबसे पहले नाममात्र शुल्क के साथ रसोई योजना की शुरुआत तमिलनाडु राज्य से हुई। वर्ष 2013 में तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. जयललिता ने “अम्मा कैंटीन” के नाम से भारत में सबसे पहले किसी राज्य में रसोई योजना की शुरुआत की थी। सुबह के नाश्ते में मात्र 2 रुपये में और 5 रुपये में पोंगल राइस दिए जाते थे। दोपहर  के खाने में सांभर चावल, लेमन राइस, करी पत्ता चावल केवल 5रुपए में और दही चावल 3 मात्र रूपय में दिए जाते। रात के खाने में दो चपाती और एक कटोरी दाल 3 रुपये में दी जाती थी।
राजस्थान में अन्नपूर्णा योजना की शुरुआत और विकास
राजस्थान में जो आज हम अन्नपूर्णा रसोई योजना देख रहे हैं, यह विभिन्न चरणों से गुजरते हुए आज की स्थिति में पहुंची है। वर्ष 2016 में तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार में शुरु हुई अन्नपूर्णा योजना में कुछ परिवर्तन कर अशोक गहलोत सरकार ने इसे इंदिरा गांधी रसोई योजना नाम दे योजना और थाली में दी जाने वाली सामग्री में परिवर्तन कर इसे विकसित किया। वर्तमान सरकार ने सामग्री की मात्रा में परिवर्तन करते हुए, अपने शुरुआती नाम में पुनः परिवर्तित कर दिया।

इंदिरा रसोई योजना और अन्नपूर्णा रसोई योजना में अन्तर –

सरकार/आधार वसुंधरा राजे अशोक गहलोत भजनलाल
नाश्ता का मेन्यू पोहा, सेवइयां, इडली-सांभर, लापसी (मीठा दलिया), ज्वार खिचड़ा, बाजरा खिचड़ा, गेहूं खिचड़ा  –
 मूल्य 5 रुपये
 मात्रा 
दोपहर का भोजन मेन्यू  दाल-चावल, गेहूं का चूरमा, मक्का का नमकीन खीचड़ा, रोटी का उपमा, दाल- ढ़ोकली, चावल का नमकीन खीचड़ा, कढ़ी-ढ़ोकली, ज्वार का नमकीन खीचड़ा, गेहूं का मीठा खीचड़ा दाल, सब्जी, 5 रोटी और आचार शामिल होता है। प्रत्येक थाली में 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 250 ग्राम रोटी और आचार
300 ग्राम चपाती, 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 100 ग्राम चावल, मिलेट्स, खिचड़ी आदि के साथ अचार
मूल्य  8 रुपये 8 रुपये 8 रुपये
मात्रा 450 ग्राम 600 ग्राम
रात का भोजन मेन्यू दाल-ढ़ोकली, बिरयानी, ज्वार की मीठी खिचड़ी, चावल का नमकीन खीचड़ा, कढ़ी-चावल, मक्के का नमकीन खीचड़ा, बेसन गट्टा पुलाव, बाजरे का मीठा खीचड़ा, दाल-चावल, गेहूं का चूरमा दाल, सब्जी, 5 रोटी और आचार शामिल होता है। प्रत्येक थाली में 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 250 ग्राम रोटी और आचार
300 ग्राम चपाती, 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 100 ग्राम चावल, मिलेट्स, खिचड़ी आदि के साथ आचार
मूल्य 8 रुपये 8 रुपये 8 रुपये
मात्रा 450 ग्राम 600 ग्राम
अन्य मोबाइल वैन निश्चित स्थान निश्चित स्थान
इंदिरा रसोई योजना और अन्नपूर्णा रसोई योजना में अन्तर को भोजन में दी जाने वाली सामग्री के साथ मात्रा में परिवर्तन से देखा जा सकता है। साथ ही श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना में इंदिरा गांधी रसोई योजना कि तुलना में 50 ग्राम रोटी और 100 ग्राम चावल कि मात्रा को बढ़ा दिया। साथ ही टैग लाइन रखी ‘लक्ष्य अंत्योदय – प्रण अन्त्योदय – पथ अंत्योदय’।

पात्रता 

अन्नपूर्णा रसोई योजना में पात्रता संबंधित कोई शर्तें नहीं थी। जब इंदिरा रसोई योजना के नाम से इस योजना की शुरुआत हुई तब राजस्थान का नागरिक होना इसकी पात्रता थी, बाद में नागरिको के साथ पर्यटकों को भी योजना का लाभ दिया जाने लगा।
अन्य राज्यों में समय-समय पर संचालित रसोई योजनाएं
  •  उत्तर प्रदेश – प्रभु की रसोई योजना – गरीबो को मुफ्त भोजन मिले कोई भूखा ना सोये के उदेश्य से सहारनपुर से शुरु की गई।
  •  गुजरात – अन्नपूर्णा रसोई योजना – 10 रुपये में भरपेट भोजन। मुख्यतः इसमे गुजराती खाना ढोकला, ख़मण और गुजराती कढ़ी परोसी जाती है।
  •  मध्य प्रदेश – दीनदयाल रसोई योजना – 2017 में शुरु कि गई, प्रति व्यक्ति 10 रुपये में भोजन।
  •  पंजाब – साडी रसोई योजना – 10 रुपये में भोजन के उदेश्य से 2017 में शुरु कि गई।
  •  दिल्ली – आम आदमी कैंटीन – 10 रुपये में भोजन। इसे LNJP अस्पताल की ओर से शुरु किया गया।
अन्नपूर्णा रसोई योजना का लाभ –
आजकल लोग काम के उदेश्य से घरों से बाहर रहते हैं। एक तरफ जहां प्रत्येक छोटे-बड़े कस्बों मे कोई होटल नहीं होती है तो दूसरी ओर सभी होटल में खाना खा सके (होटल में खाना अपेक्षाकृत महंगा होता है) यह सम्भव भी नहीं है। घर के बाहर रहने वाले लोगों और गरीब लोगों को खाने के लिए किसी प्रकार की चुनौती का सामना नहीं करना पड़े, इसी उदेश्य को ध्यान में रखते हुए अन्नपूर्णा रसोई योजना की शुरुआत हुई थी। इसके अतिरिक्त अपने घर से दूर किसी काम से या इलाज के उदेश्य से अस्पताल जाने वाले लोग, पर्यटक और विद्यार्थियों को खाने में किसी प्रकार की चुनौती का सामना ना करना पड़े इसे भी ध्यान में रखा गया।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor