सिद्धार्थ बाल निकेतन झालामंड बौद्धिक दिव्यांग बच्चों और आंगणवा में लावारिस, असहाय और निराश्रित महिलाओं के लिए आसरा बना हुआ है। संस्थान के अध्यक्ष मनोहरलाल से राइजिंग भास्कर की विशेष बातचीत…।
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर
8302316074 diliprakhai@gmail.com
सिद्धार्थ बाल निकेतन के तत्वावधान में झालामंड में बौद्धिक दिव्यांग बच्चों और आंगणवा में लावारिस, असहाय और निराश्रित महिलाओं को निशुल्क आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। सिद्धार्थ बाल निकेतन के अध्यक्ष मनोहरलाल से राइजिंग भास्कर ने विस्तार से बात की। यहां प्रस्तुत हैं संपादित अंश-
1-राइजिंग भास्कर : सेवा का ख्याल मन में कैसे आया?
मनोहरलाल : (कुछ गंभीर होकर) इसके पीछे एक कहानी है जो मेरे व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी है। दरअसल मेरे दो बेटियों के बाद तीसरी संतान के रूप में बेटा हुआ। पर वह बौद्धिक दिव्यांग हुआ। हमने उसका खूब इलाज करवाया। शायद ही कोई अस्पताल छोड़ा हो। शायद ही कोई मंदिर छोड़ा हो। जितना हो सके हमने किया। पत्नी के गहने तक गिरवी रख 17 लाख खर्च कर इलाज करवाया, पर उसे हम बचा नहीं पाए। उस समय मैं प्राइवेट जॉब करता था। फिर मेरे मन में आया कि आज मैंने अपना बच्चा खोया है, पर समाज में ऐसे कितने ही बच्चे होंगे जिन्हें केयर की जरूरत है। मैंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से संपर्क किया और अपनी भावना बताई। मुझे वहां से रास्ता मिला और मैंने अप्रैल 2018 में सिद्धार्थ बाल निकेतन के तहत झालामंड में बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए आवासीस संस्थान खोला। मैंने खुद का चिराग जरूर खोया पर सैकड़ों चिराग रोशन करने का संकल्प लिया।
राइजिंग भास्कर : बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को क्या सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है?
मनोहरलाल : हमारे यहां 50 बच्चों का नामांकन है। इसमें 34 आवासीय हैं और 16 बच्चे डे केयर सेंटर की तरह अपनी सहभागिता निभाते हैं। बच्चों को आवास और भोजन आदि की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। सुबह 7 बजे बच्चे उठते हैं। नित्य क्रिया के बाद 7:30 बजे नाश्ता होता है। 8:30 बजे योगा होता है। फिर बच्चे स्नान करते हैं। 10:30 बजे भोजन करवाया जाता है। इसके बाद बच्चों को शिक्षण कार्य करवाया जाता है जो 4 बजे तक चलता है। इन्हें स्पेशल टीचर्स पढ़ाते हैं। बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान सिखाया जाता है और खेल-खेल में ही पढ़ाया जाता है। राइजिंग भास्कर टीम संस्थान की क्लास में पहुंची तो बच्चों ने जय श्रीकृष्ण और राम-राम कहकर अभिवादन किया। टीचर रेखा पुरोहित जो यहां तीन साल से सेवाएं दे रही हैं पढ़ा रही थीं। इसके अलावा किरण प्रजापत जो सात साल से सेवाएं दे रही हैं, वे भी पढ़ा रहीं थीं। दोनों टीचर्स ने बताया कि बच्चों को बड़े ही प्यार और संवेदनशीलता के साथ पढ़ाना पड़ता है क्योंकि गुस्सा करने से वे भी आक्रोशित हो सकते हैं। इसलिए बच्चों के मानसिक स्तर को ध्यान में रखते हुए ही अध्ययन करवाया जाता है। बच्चों का ध्यान रखने के लिए केयर टेकर सुशील, विकास और प्रद्युम्न है। नौ स्टाफ नाइट में और नौ स्टाफ दिन की शिफ्ट में सेवाएं देता है।
3-राइजिंग भास्कर : संस्थान को किस प्रकार की समस्याएं फेस करनी पड़ रही है?
मनोहरलाल : यहां पर पानी की सुविधा नहीं है। इस वजह से रोज के दो टैंकर पानी डलवाना पड़ता है। महीने के दस टैंकर पानी डलवाने पड़ते हैं। अगर यहां पानी का कनेक्शन हो जाए तो हमें काफी फायदा हो सकता है। फाइल पीएचईडी के पास है। कलेक्टर ने आदेश जारी कर रखे हैं पर अभी तक समस्या का हल हुआ नहीं है। इसके अलावा क्षेत्र में सीवरेज की समस्या है। साथ ही रोड लाइटें भी नहीं हैं।
4-राइजिंग भास्कर : सरकार से कोई अपेक्षा?
मनोहरलाल : पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने घोषणा की थी कि हर साल स्टाफ और भोजन पर 10 प्रतिशत अनुदान बढ़ाया जाएगा। पर अभी तक उस पर कार्रवाई नहीं हुई है। अगर सरकार अनुदान में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी कर दे तो हमारी परेशानी कुछ कम हो सकती है।
5-राइजिंग भास्कर : बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को लेकर क्या कहना चाहेंगे?
मनोहरलाल : हम तो यही प्रार्थना करते हैं कि भगवान किसी को भी बौद्धिक दिव्यांगता ना दें। पर ऐसे बच्चों पर समाज की जिम्मेदारी है कि संरक्षण करें। हम यहां बच्चों को जीने का तरीका सिखाते हैं। कुछ बच्चे जो ज्यादा गंभीर है और बिल्कुल नहीं समझते उनके लिए अलग से रूम हैं और टीचर्स और केयर टेकर को उनका विशेष ध्यान रखने की हिदायत है। मैं खुद भी उनकी मॉनिटरिंग करता रहता हूं। प्रत्येक रूम में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। सात रूम, 1 स्टोर, 6 लेट-बाथ, 1 ऑफिस और खेल मैदान है। यहां पर कुक मीरा सात साल से सेवाएं दे रही हैं और उनका कहना है कि वह अन्नपूर्णा की भूमिका में हैं। बच्चों का यहां विशेष ख्याल रखा जाता है। समय-समय पर अधिकारी भी दौरा करते हैं और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। हमारी ओर से ऊपरी मंजिल पर 10 कमरों का निर्माण चल रहा है। अगर कोई दानदाता सहयोग करना चाहें तो रूम पर दानदाता अपनी सुविधानुसार किसी व्यक्ति का नाम लिखवा सकता है। यही नहीं दानदाता हमारी कई तरह से मदद कर सकते हैं। रोजमर्रा की आवश्यकतापूर्ति में भी वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सेवा कार्य में भामाशाह महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उन्हें आगे आने की जरूरत है।
6-राइजिंग भास्कर : इसके अलावा और क्या एक्टिविटी चल रही है?
मनोहरलाल : आंगणवा में निराश्रित, असहाय और लावारिस महिलाओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। वहां भी महिलाओं को सभी तरह की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। यहां कुल 62 महिलाएं आईं थीं और अब 39 महिलाएं आवास कर रही हैं। शेष महिलाओं का पुनर्वास कर दिया गया। कुछ महिलाओं को उनके परिजनों से मिलवा दिया गया है। इसके अलावा श्री आदर्श शिक्षा निकेतन सांसी बस्ती झालामंड में चल रहा है। इससे जो कुछ आय होती है उसका कुछ भाग सेवा कार्य में लगाया जाता है।
7-राइजिंग भास्कर : महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं?
मनोहरलाल : निराश्रित महिलाओं के लिए सिलाई प्रशिक्षण शुरू किया गया है। ऐसी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सिलाई प्रशिक्षण देकर उन्हें तरह-तरह की डिजाइन में कपड़ों की सिलाई सिखाई जा रही है। हमारा प्रयास है कि ऐसी महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हों और उन्हें कुछ आय भी हों।
संस्था की requirement :
आठ रूम बनाने के लिए प्रत्येक 370000 हजार लागत है जो भी देना चाहते है उनका उस कमरे पर नेमप्लेट लगा देंगे ल
मोबाइल नंबर 9950001962, 8619413198










