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Sunday, October 25, 2026, 2:46 am

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राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह ने रस–रंगों से बांधा समा…लोक कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियां

शिव वर्मा. जोधपुर

सांझ की सुनहरी रोशनी और खुले आसमान तले जब ढोलक, मंजीरे और घुंघरुओं की थिरकन गूंजती है, तो वह क्षण संस्कृति का उत्सव बन जाता है। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को सम्राट अशोक उद्यान स्थित ओपन एयर थिएटर में राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह का दूसरा दिन रस–रंगों की ऐसी ही सुरभि लेकर आया।

दीप प्रज्वलन कर समारोह की शुरुआत हुई। मंगलाचरण की ध्वनियों के साथ प्रारंभ हुई गणेश वंदना ने पूरे वातावरण को ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद मंच पर लोक रंगों की झड़ी लग गई। गुरुवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर एवं उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।

हरियाणा के कैलाश लोहाट की घूमर प्रस्तुति ने राजस्थानी परंपरा की झलकियों को जीवंत किया, तो उत्तराखंड के राजेन्द्र सिंह की छपेली ने दर्शकों को पहाड़ों की मिठास का एहसास कराया। पादरला की लीला देवी ने अपने तेरहताल नृत्य से थापों और लयों की अद्भुत संगति प्रस्तुत की, वहीं कासम खां लंगा की आवाज़ ने लंगा गायन की विरासत को स्वर दिया।

गुजरात से आए दीपक मकवाना ने डांडिया रास की चकाचौंध से समां बांधा, जबकि महाराष्ट्र की सुरभि मनाले की लावणी प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट देर तक थमती नहीं थी। पादरला के मूलदास एंड पार्टी का चरी नृत्य, भरतपुर के दीपक का मयूर नृत्य और अंत में मनप्रीत सिंह का जिंदुआ — सभी ने मिलकर ऐसा सांस्कृतिक संगम रचा जिसने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ दी।

दर्शक दीर्घा में बैठे कला–प्रेमियों ने नृत्य और संगीत की इस बहुरंगी शाम का भरपूर आनंद उठाया। यह आयोजन न केवल लोककलाओं का प्रदर्शन था, बल्कि विविधता में एकता और संस्कृति की धरोहर को संजोने का जीवंत प्रयास भी बना।कार्यकम का संचालन भानु पुरोहित ने किया।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor