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Friday, May 1, 2026, 5:09 am

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शिवम् नाट्यालय का 64वां अरंगेत्रम सम्पन्न

मेहल शारदा ने दी 3 घंटे भरतनाट्यम की प्रस्तुति

भगवान पंवार. जोधपुर 

शिवम् नाट्यालय का 64वां अरंगेत्रम कल्पवृक्ष,पावटा मेन रोड जोधपुर में संपन्न हुआ। जिसमें मेहल ने अपनी गुरु के साथ घुंघरू पूजा कर घुंघरू ग्रहण किए।अपनी प्रथम प्रस्तुति पुष्पांजली ताल आदितालम में की। उसके बाद अलारिपु चतुरस्य एकम ताल में व जातिस्वरम राग हेमावती में प्रस्तुत किया। शब्दम में द्रोपदी चीर हरण पर कृष्ण लीला का भावपूर्ण अभिनय पेश किया। चिदंबरम की कविता “नल्ला शगुनम” पर आधारित वर्णम राग मलिका में एवम् पराशक्ति जननी द्वारा पदम की बारीकियों को व दुर्गा के श्रृंगार रस,वियोग रस,वीर रस और रौद्र रस को आदितालम में दिखाकर सबको भावविभोर कर दिया। राग बहाग में तिल्लाना प्रस्तुत कर खूब तालियां बटौरी। अंत में मंगलम प्रस्तुत कर शिष्या ने अपने गुरु एवम् दर्शकों को धन्यवाद कर आशीर्वाद लिया।गुरु डॉ.मंजूषा चंद्रभूषण ने अपनी शिष्या को भारतीय संस्कृति एवम् भरतनाट्यम गुरु शिष्य परंपरा को निभाने हेतु शपथ ग्रहण करवाई।

साथ ही उन्हें अरंगेत्रम की डिग्री प्रदान की। डॉ.मंजूषा ने अरंगेत्रम के महत्व को समझाते हुए बताया कि 2000 ईसा पूर्व भरतनाट्यम का इतिहास है और तब से अरंगेतरम की प्रथा चली आ रही है। पहले के समय में बालिकाओं को गुरुकुल में छोड़ा जाता था और वह अपनी नृत्य साधना पूरी कर राजा महाराजाओं के समक्ष गुरुओं के समक्ष अपने नृत्य की प्रस्तुति देती थी।इस प्रथा को आज भी उतनी श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है।यह गुरु शिष्य परंपरा का अनूठा उदाहरण है। उनकी संस्था विगत 26 वर्षों से जोधपुर में भरतनाट्यम के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष शल्य चिकित्सक डॉक्टर एम. एल. लोहिया उपस्थित थे। डॉक्टर लोहिया ने बालिका को आशीर्वाद देते हुए उसके सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएं दी और शिवम नाट्यालय की इस पहल को सराहा और उम्मीद जताई कि आने वाले समय में जोधपुर राजस्थान में भरतनाट्यम के लिए जाना जाएगा, भारतीय संस्कृति की इस धरोहर को बचाए रखने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संस्था की सराहना की। मेहल की माता श्रीमती मनीषा शारदा एवं पिता श्री रवि शारदा ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार प्रकट कर गुरु को सम्मान देते हुए धन्यवाद दिया। इस कार्यक्रम में मंच संचालन संस्थान की सीनयर छात्राएं दीपाली मनसुखानी एवं विरल लड्ढा द्वारा किया गया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor