वंदे मातरम गीत राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत तथा राजनीतिक चेतना का मार्गदर्शक रहा : डॉ पुष्पा कुमारी
भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण जोधपुर द्वारा आदर्श विद्या मंदिर सरस्वती नगर तथा गुरुकुल विद्यापीठ में वंदे मातरम के 150 वें स्मरण उत्सव के तहत वंदे मातरम का सामूहिक गायन कार्यालय अध्यक्ष डॉ एस एल मीना के मार्गदर्शन में करवाया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ में आदर्श विद्या मंदिर समिति के अध्यक्ष भूर सिंह राजपुरोहित तथा प्रधानाचार्य उगम सिंह राठौड़ तथा गुरुकुल विद्यापीठ के संरक्षक ललित यादव एवं प्रधानाचार्य सुनीता देवी द्वारा बीएसआई के अधिकारियों तथा कर्मचारियों का श्रीफल और दुपट्टा पहनाकर अभिनंदन किया गया।
नोडल अधिकारी डॉ पुष्पा कुमारी ने कहा कि वंदे मातरम गीत राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत तथा राजनीतिक चेतना का मार्गदर्शक रहा है। इस गीत ने लोगों में मातृभूमि के प्रति भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया। बंगाल विभाजन के समय विभाजन विरोधी आंदोलन की मुखर आवाज बना था। यह राष्ट्रीय जागरण, विरोध का प्रतीक तथा मातृ भूमि बचाने का अग्रदूत बना। औपनिवेशिक शासन के खिलाफ प्रतिरोध का सशक्त माध्यम बनते हुए ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज बना। ब्रिटिश शासन ने इस पर रोक लगाने का प्रयास किया जिससे लोग जाति, धर्म, भाषा से ऊपर उठकर एक जुट होने लगे। विरोध स्वरूप इसे राजनीतिक सभाओं, प्रदर्शनों, जेल जाते समय गया जाने लगा। यह भारतीय राष्ट्रवाद का नारा बन गया। अप्रैल 1906 में ब्रिटिश हुकुमरानो ने वंदे मातरम के सार्वजनिक गायन पर रोक लगा दी तथा अवहेलना करने पर पुलिस दमन का सामना करना पड़ा। लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले सेनानियों ने इसे राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का सशक्त नारा बनाते हुए प्रभात फेरी में गाया और आगे चलकर राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना। 24 जनवरी 1950 में इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में घोषित करते हुए राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया।
जगदीश यादव तथा डॉ वी के रावत ने वंदे मातरम् पर एक प्रश्नोत्तरी का आयोजन करवाया। आदर्श विद्या मंदिर की काजल प्रजापत, पार्थ चौधरी, कीर्ति, स्नेहल, खुशवीर, परमेंद्र, करनजीत, तन्मय, प्रभात तथा अंजलि ने जीत दर्ज करते हुए पुरस्कार प्राप्त किया। गुरुकुल विद्यापीठ की सुमाला कुमारी, नीलांजना यादव, आदित्य यादव, नरेंद्र सिंह रावत, टीनू कंवर, चंदन, जयकुमार, कृष्णा कुमार, सनी कुमार तथा हिमानी ने पुरस्कार प्राप्त किया।
गार्डन प्रभारी डॉ चंदन सिंह, रमेश कुमार तथा सुरेंद्र कुमार की देखरेख में पौधारोपण करवाया गया। पौधारोपण में मोरिंगा, शहतूत, इमली, सीताफल, आदि सहित विभिन्न प्रजाति के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में मुकेश गोयल, हंसराज मीणा तथा नरेंद्र कुमार ने सहभागिता की। कार्यक्रम का समन्वय तथा संचालन जगदीश यादव के द्वारा किया गया।








