परम पूज्य गुरुदेव प्रमोद मुनि जी महाराज साहब के आशीर्वाद से प्रेरित होकर ट्रस्ट से जुड़े साधकों ने ‘शरीर श्रमी, मन संयमी, बुद्धि विवेकवती और अहंकार-शून्य जीवन’ को अपना लक्ष्य बनाया। गुरु वचनों के अनुसार जीवन में प्रेम ,प्रेरणा, प्रोत्साहन रूप में चरितार्थ हो रहा है।
राखी पुरोहित. जोधपुर
प्रकृति की सेवा केवल दान तक सीमित नहीं होती, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम भी बन सकती है—इस बात को चरितार्थ कर रहा है गज शुश्रुषा ट्रस्ट। यह ट्रस्ट गुरु कृपा, साधना और सेवा के संकल्प से जन्मी एक ऐसी अनूठी पहल है, जो मानव, पशु और प्रकृति—तीनों के कल्याण के लिए समर्पित है।
ट्रस्ट से जुड़े सेवाभावी कार्यकर्ताओं का जीवन गुरु उपदेशों से अनुप्राणित है। परम पूज्य उपाध्याय प्रवर मान मुनि जी महाराज साहब एवं परम पूज्य गुरुदेव प्रमोद मुनि जी महाराज साहब के आशीर्वाद से प्रेरित होकर ट्रस्ट से जुड़े साधकों ने ‘शरीर श्रमी, मन संयमी, बुद्धि विवेकवती और अहंकार-शून्य जीवन’ को अपना लक्ष्य बनाया। गुरु वचनों के अनुसार जीवन में प्रेम ,प्रेरणा, प्रोत्साहन रूप में चरितार्थ हो रहा है।
15 संस्कार केंद्र, 480 बच्चों का भविष्य संवारते हुए
गज शुश्रुषा ट्रस्ट वर्तमान में जोधपुर क्षेत्र और मेड़ता सिटी में 15 संस्कार केंद्रों का सफल संचालन कर रहा है, जहाँ 480 बच्चे शिक्षा और संस्कार ग्रहण कर रहे हैं। इन केंद्रों का प्रभाव केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। ट्रस्ट के सतत प्रयासों से लगभग 125 परिवारों ने नशे का पूर्णतः त्याग किया, जिससे प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह लगभग ₹6000 की आर्थिक बचत हो रही है।
इस विश्वास का ही परिणाम है कि बस्तियों के 100 बच्चों का प्रवेश आसपास के विद्यालयों में संभव हो सका। स्वयंसेवकों द्वारा चलाए गए घर-घर संपर्क अभियान में यह सामने आया कि अभाव और नशे के कारण माता-पिता बच्चों को पढ़ाना चाहते हुए भी असमर्थ थे। आज वही परिवार अपने सुख-दुख ट्रस्ट के स्वयंसेवकों से साझा करते हैं।
स्वयंसेवक बस्तियों में प्रत्येक त्योहार उत्साह और अपनत्व के साथ मनाते हैं। एक छह वर्षीय बालक के शब्द— “भैया जी, मने घणो चोको लाग्यो, थे मने रंग्यो और मने भी रंगने दियो”—ने जातिगत भेदभाव को मिटाकर मानव एकता का संदेश दिया। उस बालक की आँखों में छलके खुशी के आँसू उपस्थित सभी को भाव-विभोर कर गए।
समय-समय पर माता-पिता सम्मेलन, व्यसन मुक्ति कार्यक्रम और सामाजिक समरसता आयोजन किए जाते हैं। स्वयंसेवकों ने बच्चों के घर जाकर सहर्ष भोजन ग्रहण किया, जिससे जात-पात की दीवारें कमजोर हुईं। गायत्री मंत्र, शांति मंत्र और नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप से कई परिवारों में आपसी सौहार्द बढ़ा, जिसे अभिभावकों ने खुले दिल से स्वीकार किया।
शिक्षा में भी आगे हैं संस्कार केंद्र के बच्चे
ट्रस्ट का अनुभव है कि संस्कार केंद्रों पर पढ़ने वाले वे बच्चे, जो विद्यालय नहीं जा पाते, 10 वर्ष की आयु में भी पाँचवीं कक्षा के विद्यार्थियों से अधिक सक्षम दिखाई देते हैं। बच्चों और अभिभावकों के चेहरों की मुस्कान ही ट्रस्ट के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
गौ संरक्षण एवं संवर्धन में अनूठा कार्य
ट्रस्ट के समर्पित स्वयंसेवकों ने विभिन्न गौशालाओं में रहकर गौ माता का आशीर्वाद प्राप्त किया है।
स्वयंसेवकों द्वारा गौशालाओं में रहकर वृहद सेवन धामन नेपियर चारागाह विकास, देसी गौ माता की नस्ल सुधार, तथा अन्य अनेक उपयोगी कार्य किए गए हैं। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य गौशालाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त एवं स्थायी बनाना है। जिससे समाज में गौ माता मानव का भरण पोषण कर सकती है यह अवधारणा प्रस्तुत हो सके।
गज पक्षी चिकित्सालय : बेजुबानों की सेवा
पाल बालाजी के पास स्थित गज पक्षी चिकित्सालय का संचालन भी ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। अब तक 550 पक्षियों का रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें से 300 पक्षियों को स्वस्थ कर पुनः आकाश में मुक्त किया गया। वर्तमान में 120 घायल पक्षी (अंधे, पंख या पैर कटे, करंट से घायल आदि) चिकित्सालय में उपचाराधीन हैं। ट्रस्ट ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी घायल पक्षी को सीधे चिकित्सालय तक पहुँचाएँ। संपर्क सूत्र : 7427 870 609
कांस्य थाली चिकित्सा : सेवा से गौसेवा तक
ट्रस्ट द्वारा कांसे की थाली से उपचार की एक पहल भी प्रारंभ की गई है, जिसमें 14 मिनट की मसाज से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। इस प्रक्रिया से प्राप्त भेंट राशि गौशाला सेवा में समर्पित की जा रही है।
प्राकृतिक खेती और वृक्षारोपण
ट्रस्ट ने एक संस्था में निशुल्क ऑर्गेनिक फार्मिंग सेवाएँ प्रदान कीं, जहाँ घुमंतू जाति के बच्चों के लिए प्रतिदिन अनेक बालकों का भोजन बनता है। स्वयंसेवकों द्वारा उगाई गई जैविक सब्जियों से न केवल बच्चों को पौष्टिक आहार मिला, बल्कि संस्था को प्रतिमाह लगभग ₹7000 की बचत भी हुई। इसके साथ ही ट्रस्ट ने वृहद वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान दिया।
प्राकृतिक चिकित्सा, योग और ध्यान वत्सल आरोग्य शिविर
गज शुश्रुषा ट्रस्ट द्वारा आयोजित प्राकृतिक चिकित्सा, योग एवं ध्यान शिविरों में जलनेति, कुंजल, मसाज, एक्यूप्रेशर एवं एक्यूपंचर जैसी अहिंसात्मक चिकित्सा पद्धतियों से अनेक लोगों को लाभ मिला है। कई व्यक्ति डिप्रेशन से मुक्त हुए और विभिन्न रोगों में राहत मिली।
सेवा के विविध आयाम
ट्रस्ट की गतिविधियाँ अनेक क्षेत्रों तक विस्तृत हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
बच्चों की शिक्षा एवं संस्कार
गो संवर्धन एवं गो रक्षण
प्राकृतिक खेती एवं जंगल विकास
सघन वृक्षारोपण एवं चारा गृह विकास
गज पक्षी चिकित्सालय
प्राकृतिक चिकित्सा, योग एवं ध्यान
अहिंसा एवं जीव दया
व्यसन मुक्ति
महिला सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता
नेतृत्व और स्वयंसेवकों की मजबूत टीम
अध्यक्ष: नरेंद्र सुराणा
सचिव: पायल चोपड़ा
सहसचिव: ज्योति तातेड़
कोषाध्यक्ष: विवेक लुंकड़
ट्रस्ट के समर्पित स्वयंसेवक : पायल, ज्योति,अरुणा, आरती,मिताली, आशा, रितु, अमृता, कोमल, सुचिता, अंकिता, कृती, तनुश्री, नरेंद्र, विवेक, गौतम, पुष्पराज, हेमंत, प्रदीप,योगेश पारस, नमन, मनन , हैप्पी, राकेश, टीकम, निरमा, अंजलि ,पूजा, माया, रिंका, सोनाली, मीनाक्षी, रेनू ,लक्ष्मी, आरती, संजू, ज्योति, नंदिनी जैसे अनेक स्वयंसेवकों की लंबी सूची इस बात का प्रमाण है कि सेवा का यह कार्य सामूहिक संकल्प और समर्पण से आगे बढ़ रहा है।









