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Friday, May 1, 2026, 3:40 am

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महिला उद्यमशीलता : बेटे की प्रेरणा से बिंदु जैन ने पहली बार बनाई कॉटन की ईको फ्रेंडली योगा मैट, देश-विदेश में होती है सप्लाई

रबर की योगा मैट को दी चुनौती : 15 साल पहले बनाना शुरू किया, कोरोना के बाद बतौर बिजनेस का रूप दिया, अब कॉटन के बैग, थैले, दोहर, बच्चों के बिछौने, कॉस्टर, ऑफिस एसेसरीज सहित 25 आइटम बना रहीं, सालाना टर्न ओवर 25 लाख पहुंचा। 2026 में लक्ष्य 40 से 50 लाख तक पहुंचाने का है।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprkahai@gmail.com

इनोवेशन में महिलाएं भी पीछे नहीं है। हम आज एक ऐसी ही महिला बिंदु जैन की कहानी साझा करने जा रहे हैं जिन्होंने एमए की शिक्षा प्राप्त की और आरएएस की परीक्षा भी दी। लेकिन बाद में उन्होंने परिवार को समय देने और कुछ नया करने का सोचा। वो इसी प्रयास में लगी रही कि समाज और परिवार के लिए कुछ ऐसा करे जो उनकी मौलिक पहचान बने और लोगों और सोसायटी में अच्छा मैसेज भी जाए। पर्यावरण के प्रति चूंकि बिंदु जैन सजग है इसलिए उन्होंने ईको फ्रेंडली बिजनेस शुरू करने की ठानी। आज से 15 साल पहले उन्होंने कॉटन की योगा मैट बनाना तय किया। उनके बेटे सुंधाश जैन जो योगा में पीजी है। उन्होंने कहा कि मां मुझे ऐसी योगा मैट बनाकर दो जो ईको फ्रैंडली हो। बस बिंदु जैन ने कॉटन की योगा मैट बना दी। तब उन्होंने सिर्फ तीन पीस बनाए थे। इस योगा मैट को सुंधाश ऋषिकेश लेकर गया। वहां गुरुजी को कॉटन की योगा मैट बहुत पसंद आई और उन्होंने बड़ा ऑर्डर दे दिया कि उन्हें ऐसी ही योगा मैट चाहिए। फिर हैदराबाद से ऑर्डर मिले। बैंगलोर में प्रो. अमित शर्मा ने भी कॉटन की योगा मैट को बहुत सराहा और बड़ा ऑर्डर दिया। उनकी यूनिवर्सिटी में कॉटन की योगा मैट की डिमांड बढ़ने लगी। बाद में ओएनजीसी, ऑयल इंडिया, आयुर्वेद विवि, एनटीपीसी ने भी कॉटन की योगा मैट के ऑर्डर दिए। इस तरह बेटे की प्रेरणा से शुरू हुआ योगा मैट का कारोबार रंग लाने लगा और बिंदु जैन की पहचान कॉटन की योगा मैट बनाने वाली एन्टरप्रेन्योरशिप के रूप बन गईं। उन्होंने अपनी फर्म बनाई जिसका नाम श्री बालाजी एन्टरप्राइजेज रखा। इस फर्म की बिंदु जैन डायरेक्टर हैं और सारा काम-काज शकुंतलम सी- 48, पीएनबी के सामने, अजीत कॉलोनी रातानाडा, जोधपुर स्थित उनके आवास पर बने ऑफिस से ही होता है।

बिंदु जैन ने बताया कि ट्रेन की शीट मैट भी कॉटन की बनाई जाती है। इसे लेकर वे जब ट्रेन में जाती हैं तो यात्री पूछते हैं कि ये शीट मैट कहां से बनवाई? तब बिंदु जैन बताती हैं कि यह हमारी मैन्युफैक्चरिंग हैं। इसे सोफे पर भी बिछाया जा सकता है। बेड रनर यूज किया जा सकता है और योगा मैट के रूप में तो काम में लिया ही जाता है। योगा मैट 2×6 फीट और 2.5×6 फीट की बनाई जाती है। जैसा ग्राहक का ऑर्डर होता है उसी नाम की तैयार की जाती है।

कोरोना के बाद बिजनेस ने गति पकड़ी, अब कॉटन के 25 आइटम बन रहे 

बिंदु जैन ने बताया कि हालांकि उन्होंने 15 साल पहले ही कॉटन की योगा मैट बनाना शुरू कर दी थी, लेकिन व्यवस्थित रूप से कारोबार कोरोना के बाद शुरू हुआ। कोरोना की वैश्विक त्रासदी के दौरान उन्होंने मास्क बनाना शुरू किया। ये मास्क दिल्ली और अन्य महानगरों तक सप्लाई होते थे। कोरोना में उन्होंने 3 लाख मास्क सप्लाई किए। करीब 50 महिलाएं मास्क बनाने के काम से जुड़ी थीं। जब काेरोना का असर खत्म हुआ तो इन महिलाओं के पास काम नहीं था। तब मैंने सोचा कि अब योगा मैट को फिर से लॉन्च किया जाए। तब इन 50 महिलाओं को अपने साथ जोड़ते हुए कॉटन की योगा मैट को स्थाई रूप से बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे कॉटन के बैग, थैले, दोहर, बच्चों के बिछौने, कॉस्टर और ऑफिस एसेसरीज सहित 25 आइटम काॅटन से बनाने शुरू किए। अब यह कारोबार बड़े स्तर तक फैल चुका है और देश के साथ-साथ देश के बाहर भी कॉटन के आइटम की सप्लाई होती है। सालाना कारोबार जो शुरुआत में लाख-डेढ़ लाख था, अब बढ़कर 25 लाख तक पहुंच गया है।

रबर की योगा मैट के नुकसान देखे तो कॉटन की योगा मैट बाजार में उतारी  

बिंदु जैन ने बताया कि मार्केट में रबर की योगा मैट का प्रचलन देखा। रबर की योगा मैट के कई नुकसान है। इसलिए कॉटन की योगा मैट बाजार में उतारी। रबर की योगा मैट के नुकसान इस प्रकार हैं-

  1. रासायनिक तत्वों की मौजूदगी – कई रबर मैट में PVC या सिंथेटिक केमिकल होते हैं, जिनसे त्वचा एलर्जी या सांस संबंधी समस्या हो सकती है।

  2. पर्यावरण के लिए हानिकारक – रबर मैट आसानी से बायोडिग्रेड नहीं होती, जिससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है।

  3. गर्मी में दुर्गंध – पसीने और तापमान के कारण रबर मैट से बदबू आने लगती है।

  4. त्वचा पर पसीना चिपकना – रबर सतह पसीना सोखती नहीं, जिससे फिसलन और असहजता बढ़ती है।

  5. लंबे समय में टूट-फूट – लगातार मोड़ने-खोलने से रबर मैट जल्दी खराब हो जाती है।

  6. भारी वजन – कई रबर मैट अपेक्षाकृत भारी होती हैं, जिससे उन्हें ले जाना कठिन होता है।

  7. एलर्जी की संभावना – कुछ लोगों को लेटेक्स रबर से एलर्जी हो सकती है।

  8. गर्मी पैदा करना – रबर सतह शरीर के नीचे अधिक गर्मी रोकती है, जिससे योग अभ्यास में असुविधा होती है।

  9. रीसाइक्लिंग कठिन – रबर मैट को रीसायकल करना आसान नहीं होता।

  10. प्राकृतिक स्पर्श का अभाव – सिंथेटिक सतह होने से शरीर को प्राकृतिक और आरामदायक अनुभव कम मिलता है।

कॉटन की योगा मैट के फायदे

  • ईको-फ्रेंडली और बायोडिग्रेडेबल – कॉटन की प्राकृतिक होने के कारण पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती।

  • त्वचा के लिए सुरक्षित – कॉटन में रसायन कम होते हैं, इसलिए एलर्जी की संभावना कम रहती है।

  • पसीना सोखने की क्षमता – कॉटन पसीना अच्छी तरह सोखती है, जिससे अभ्यास के दौरान फिसलन कम होती है।

  • हल्की और आसानी से ले जाने योग्य – कॉटन मैट वजन में हल्की होती है।

  • धोने में आसान – इसे नियमित रूप से धोकर साफ रखा जा सकता है, जिससे स्वच्छता बनी रहती है।

  • प्राकृतिक और आरामदायक अनुभव – कॉटन का मुलायम स्पर्श योग अभ्यास को अधिक आरामदायक बनाता है।

  • पर्यावरण संरक्षण में सहायक – प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है।

पति प्रवीण कुमार जैन ने हमेशा किया प्रोत्साहित : 

बिंदु जैन ने बताया कि उनके पति प्रवीण कुमार जैन का यूनिफॉर्म मैन्युफ्रेक्चरिंंग का बिजनेस है। हमारा परिवार आर्थिक रूप से समृद्ध है और कोई कमी नहीं हैं। मगर मैंने जब अपने पति को कहा कि वह भी कुछ करना चाहती है तो उन्होंने सहर्ष स्वीकृति दे दी। फिर मैंने कॉटन की योगा मैट बनानी शुरू की। शुरुआत में दिक्कतें आईं। बाजारीकरण के गुर नहीं जानती थी। लेकिन कहते हैं कि जहां चाह वहां राह…रास्ता बनता गया। पति का हमेशा साथ मिला। बच्चों ने भी सपोर्ट किया। मेरे लिए अपनी पहचान बनाने की राह आसान नहीं थी। पर मैंने ठान लिया था कि मैं कुछ करके दिखाऊंगी। मै आरंभ में घर-घर, ऑफिस और संस्थानों में जाकर कॉटन की योगा मैट के फायदे बताती थीं। जब हम ट्रेन में सफर करते थे तो ट्रेन के एसी डिब्बे में हम काॅटन की शीट मैट जब बिछाते थे तो अन्य यात्री पूछते थे- दीदी इतनी अच्छी शीट मैट कहां से खरीदी? मैं कहती कि यह हमारा खुद का प्रॉडक्ट हैं। तो लोग आश्चर्य करते और हमारे मोबाइल नंबर लेते और कहते कि दीदी हमें भी कॉटन की शीट मैट चाहिए। हम उन्हें कॅूरियर से भेज देते। इस तरह धीरे-धीरे माउथ पब्लिसिटी का असर हुआ और आज पूरे शहर के साथ देश-विदेश में उनकी पहचान बनी है। कॉटन की योगा मैट खूब पसंद की जा रही है।

50 महिलाओं को मैनें नहीं, उन्होंने मुझे रोजगार दिया : बिंदु जैन

बिंदु जैन ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि मुझे यह कहते भी जरा भी संकोच नहीं है कि जो 50 महिलाएं मुझसे जुड़ी हुई हैं उन्हें मैंने रोजगार नहीं दिया, बल्कि उन्होंने मुझे रोजगार दिया है। बिंदु ने बताया कि ये महिलाएं स्लम बस्ती की जरूर हैं मगर उनमें योग्यता है। शुरुआत में मैंने उन्हें ट्रेनिंग दी और अब वे काम आसानी से कर लेती हैं। आज भी कटिंग और डिजाइनिंग का काम मैं करती हूं और बनाने से लेकर बाकी काम और पैकिंग आदि और कॅूरिअर आदि का काम महिलाएं ही संभालती हैं।

कुंभ के मेले में 25 हजार काॅटन बैग सप्लाई किए : 

बिंदु जैन ने बताया कि उन्होंने कुंभ के मेले में 25 हजार कॉटन बैग सप्लाई किए। थैले 30 रुपए से शुरू होते हैं और 300 रुपए तक में बेचे जाते हैं। इसी तरह बैग 500 रुपए से शुरू होकर 1000 रुपए तक में बैचे जाते हैं। टॉट बैग भी बनाए जाते हैं। बिंदु जैन ने बताया कि उनके काम को देखते हुए लघु उद्योग भारती ने जयपुर में उन्हें वुमन एन्टरप्रेन्योर का अवार्ड भी दिया था।

जी-20 मीट में योगा मैट की प्रदर्शनी लगाई, खूब बॉयर मिले

बिंदु जैन ने बताया कि जब जोधपुर में जी-20 मीट का आयोजन हुआ था, तब योग मैट की उन्होंने प्रदर्शनी लगाई थी। लघु उद्योग भारती द्वारा एयरपोर्ट पर लगाई प्रदर्शनी में महिला उद्यमियों के निर्मित प्राडॅक्ट शामिल किए थे। तब उन्होंने भी योगा मैट की प्रदर्शनी लगाई थी, जिसे खूब सराहना मिली और बॉयर्स ने खूब ऑर्डर दिए। बिंदु जैन ने बताया कि समय-समय पर लघु उद्योग भारती का बड़ा सहयोग मिला है। लघु उद्योग भारती की वर्कशॉप से बड़ा फायदा मिला। ऑर्डर समय पर देना, माल की गुणवत्ता कैसे बनाएं, अपनी गुडविल कैसे बनाएं, मार्केटिंग के फंडे और तमाम बिजनेस की बारीकियां लघु उद्योग भारती द्वारा सिखाई गईं। लघु उद्योग भारती की ओर से ही JEM पर रजिस्ट्रेशन करवाया गया। बिंदु जैन से जब पूछा कि क्या आपने बैंक से लोन भी लिया? तो उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी प्रकार को लोन नहीं लिया। बैंकों से ऑफर तो खूब मिले, मगर हमने लोन लेने की बजाय यही कहा कि आप तो हमें बिजनेस दें। इस तरह बैंकों से भी हमें बिजनेस मिला।

दीपावली, होली, त्योहार और योगा दिवस आदि पर उनकी योगा मैट गिफ्ट दी जाती है 

बिंदु जैन ने बताया कि दीपावली, होली और अन्य त्योहारों के साथ ही याेगा दिवस पर उनकी योगा मैट को गिफ्ट दिया जाता है। बिंदु जैन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि महिलाएं आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर हों। हम उसी दिशा में बढ़ रही हैं। लेकिन मैं चाहती हूं कि महिलाओं के प्रॉडक्ट को बाजार उपलब्ध करवाया जाए। उनके प्रॉडक्ट अधिक से अधिक खरीदे जाएं ताकि महिलाएं आगे बढ़ सकें। जब महिलाओं के प्रॉडक्ट को बाजार उपलब्ध नहीं होता तो उनमें निराशा के भाव जागृत हो जाते हैं। इसलिए महिलाओं के बिजनेस को सफल बनाने के लिए मोदीजी से आग्रह है कि वे महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं बनाएं। तभी महिला स्वावलंबन का सपना पूरा होगा।

बिंदु जैन से संपर्क इस तरह करें :

शकुंतलम सी- 48, पीएनबी के सामने, अजीत कॉलोनी रातानाडा जोधपुर। ईमेल- bindujain50@gmail.com

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor