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Wednesday, April 29, 2026, 7:06 am

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विश्व रेडियो दिवस: लाइसेंस फीस और रेडियो की पुरानी यादें आज भी ताजा

सनसिटी एफएम के सदस्य और गीत-संगीत प्रेमी राजेश भैरवानी पुरानी यादें शेयर कर रहे हैंं 

राखी पुरोहित. जोधपुर

13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। यह दिन रेडियो की उस ऐतिहासिक भूमिका को याद करने का अवसर है, जिसने दशकों तक लोगों को सूचना, मनोरंजन और संगीत से जोड़े रखा। आज भले ही डिजिटल युग में मोबाइल और इंटरनेट ने संचार के साधनों को बदल दिया हो, लेकिन एक समय ऐसा था जब घर-घर में रेडियो ही समाचार और गीत-संगीत का सबसे विश्वसनीय माध्यम हुआ करता था।

गीत-संगीत प्रेमी और राजेश भैरवानी, जो सनसिटी एफएम के सदस्य भी हैं, बताते हैं कि 1970 से 1980 के दशक में रेडियो केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी माना जाता था। उस समय रेडियो रखने के लिए सरकार द्वारा लाइसेंस लेना अनिवार्य था और इसकी वार्षिक फीस भी जमा करनी पड़ती थी।

उन्होंने बताया कि उस दौर में रेडियो की लाइसेंस फीस मात्र 15 रुपये होती थी, जिसे नजदीकी डाकघर में जमा किया जाता था। फीस जमा करने के बाद रेडियो के लिए बाकायदा पासबुक जारी होती थी और उस पासबुक में 15 रुपये का स्टाम्प लगाया जाता था, जो लाइसेंस नवीनीकरण का प्रमाण होता था। यह प्रक्रिया उस समय लोगों के लिए सामान्य बात थी और लगभग हर घर में रेडियो के साथ उसकी लाइसेंस पासबुक भी सुरक्षित रखी जाती थी।

राजेश भैरवानी के अनुसार, उस दौर में रेडियो केवल समाचार सुनने का माध्यम नहीं था, बल्कि परिवार के सभी सदस्य शाम के समय रेडियो के आसपास बैठकर कार्यक्रमों का आनंद लेते थे। विशेष रूप से गीत-संगीत कार्यक्रम, नाटक और क्रिकेट कमेंट्री लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ करते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में भी रेडियो ही देश-दुनिया से जुड़ने का प्रमुख साधन था, जिससे लोग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की जानकारी प्राप्त करते थे।

रेडियो के माध्यम से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में आकाशवाणी की विशेष भूमिका रही है। आकाशवाणी के समाचार बुलेटिन और विविध भारती के फिल्मी गीत कार्यक्रम लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुके थे। उस समय एक रेडियो पूरे मोहल्ले को एक साथ जोड़ देता था, क्योंकि कई जगहों पर लोग एक ही घर में इकट्ठा होकर महत्वपूर्ण कार्यक्रम सुना करते थे।

आज तकनीक ने संचार के साधनों को भले ही आधुनिक बना दिया हो, लेकिन रेडियो की लोकप्रियता और उसकी भावनात्मक अहमियत आज भी कायम है। कार रेडियो, एफएम चैनल और इंटरनेट रेडियो के रूप में यह माध्यम नए रूप में लोगों के बीच मौजूद है। विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर पुरानी यादों को साझा करते हुए राजेश भैरवानी कहते हैं कि रेडियो की वह सादगी, परिवार के साथ कार्यक्रम सुनने का आनंद और लाइसेंस पासबुक की यादें आज भी उनके दिल में ताजा हैं।

विश्व रेडियो दिवस हमें यह याद दिलाता है कि बदलते समय के साथ तकनीक भले ही बदल जाए, लेकिन रेडियो का मानवीय जुड़ाव और उसकी विश्वसनीयता हमेशा अमूल्य बनी रहेगी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor