Explore

Search

Friday, May 1, 2026, 3:08 am

Friday, May 1, 2026, 3:08 am

LATEST NEWS
Lifestyle

महिला दिवस तो रोज ही होता है, महिलाएं ही परिवार और समाज की धुरी : श्रीमती शशि सुरेश राठी

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बागर चौक स्थित वेदिक कन्या स्कूल में स्व. पुष्पलता राठी की पुण्यतिथि और बिजनेसमैन व समाजसेवी श्री आनंद राठी की पुत्री पूजा विमलेश राठी मारू की शादी की सालगिरह के उपलक्ष्य में आनंद राठी और सुरेश राठी ग्रुप की ओर से 70 जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बनाने के लिए आटा चक्की, सिलाई मशीन और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति महिला प्रकोष्ठ ‘संबल’ की ओर से आयोजित किया गया।

राखी पुरोहित. जोधपुर

8302316074. diliprakhai@gmail.com

प्रसिद्ध समाजसेविका श्रीमती शशि सुरेश राठी ने कहा कि महिला दिवस तो रोज ही होता है। एक भी दिन ऐसा नहीं होता जो महिलाओं का नहीं होता है। उन्होंने सवाल किया कि आप ही बताओ भला महिलाओं के बिना कोई दिन होता है क्या? महिलाएं समाज की धुरी है। महिलाओं को यह समाज अनदेखा नहीं कर सकता। नारी ही नर की खान है। नारी ने चारदीवारी की सीमाओं से परे अनंत आकाश में उड़ान भरी है। यही नहीं नारी तो अंतरिक्ष में कदम रख चुकी है। ऐसी महिलाओं के लिए साल में एक दिन निर्धारित करना महिलाओं की क्षमताओं को कम आंकना होगा।

श्रीमती शशि सुरेश राठी रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बागर चौक स्थित वेदिक कन्या स्कूल में आयोजित समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। इस समारोह में स्व. पुष्पलता राठी की पुण्यतिथि और बिजनेसमैन व समाजसेवी आनंद राठी की पुत्री पूजा विमलेश राठी मारू की शादी की सालगिरह के उपलक्ष्य में आनंद राठी और सुरेश राठी ग्रुप की ओर से 77 जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बनाने के लिए आटा चक्की, सिलाई मशीन और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति महिला प्रकोष्ठ ‘संबल’ की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 14 महिलाओं को आटा चक्की मशीन, 4 को पीकू मशीन, 3 को हाथ की मशीन, 12 को अंब्रेला मशीन, 26 को पैर मशीनें दी गई। साथ ही 18 महिलाओं को दुकान लगाने के लिए सहयोग दिया गया।

नारी शक्ति, करूणा और सृजन का प्रतीक

अपने उद्बोधन में श्रीमती शशि सुरेश राठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को हमेशा शक्ति, करुणा और सृजन का प्रतीक माना गया है। हमारे धर्मग्रंथों और परंपराओं में नारी को देवी का स्थान दिया गया है। माता के रूप में वह जीवन देती है, बहन के रूप में स्नेह देती है, पत्नी के रूप में जीवनसाथी बनकर संघर्षों में साथ खड़ी रहती है और बेटी के रूप में घर-परिवार में खुशियों की नई किरण लेकर आती है। इसलिए नारी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज की आधारशिला है।

आज की नारी ने पुरातन सोच को बदला है 

उन्होंने कहा कि समय के साथ महिलाओं की भूमिका और भी व्यापक होती जा रही है। पहले समाज में यह धारणा थी कि महिलाओं का स्थान केवल घर की चारदीवारी तक सीमित है, लेकिन आज की नारी ने उस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। आज महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, प्रशासन, व्यापार, खेल और कला जैसे हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। देश की प्रगति में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

महिलाओं की प्रतिभा का लोहा दुनिया ने माना

उन्होंने कहा कि अगर हम इतिहास की ओर देखें तो हमें अनेक प्रेरणादायक उदाहरण मिलते हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने स्वतंत्रता संग्राम में अदम्य साहस का परिचय दिया। आधुनिक भारत में भी कई महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। अंतरिक्ष में कदम रखने वाली भारतीय मूल की महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि नारी की उड़ान की कोई सीमा नहीं होती।

महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा

श्रीमती राठी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा है। जब एक महिला शिक्षित होती है तो वह केवल स्वयं ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को शिक्षित और जागरूक बनाती है। इसलिए हमें बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हर माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वह अपने बेटे और बेटी में कोई भेदभाव न करें और दोनों को समान अवसर प्रदान करें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता भी महिलाओं के सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जब महिला आर्थिक रूप से सक्षम होती है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने परिवार तथा समाज के विकास में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती है। इसी उद्देश्य से आज यहां जरूरतमंद महिलाओं को आटा चक्की और सिलाई मशीन जैसी सामग्री वितरित की जा रही है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से कहा कि जीवन में कठिनाइयां जरूर आती हैं, लेकिन उन्हें हार मानने की बजाय संघर्ष का अवसर समझना चाहिए। मेहनत, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। महिलाओं के भीतर अद्भुत धैर्य और सहनशीलता होती है, जो उन्हें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने की शक्ति देती है।

प्रत्येक व्यक्ति महिलाओं का सम्मान करें 

श्रीमती राठी ने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की यह जिम्मेदारी है कि वह महिलाओं का सम्मान करे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करे। जब समाज में महिलाओं को बराबरी का अधिकार और सम्मान मिलेगा, तभी सच्चे अर्थों में विकास संभव होगा। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनानी होगी जहां हर महिला सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर महसूस करे। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज की खुशहाली में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि घर की महिला खुश और सशक्त है तो पूरा परिवार खुशहाल रहता है। इसलिए महिलाओं को केवल जिम्मेदारियों का बोझ देने के बजाय उन्हें सम्मान, सहयोग और अवसर देना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं होना चाहिए, बल्कि यह संकल्प का दिन होना चाहिए कि हम वर्ष के हर दिन महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि समाज की जरूरतमंद और कमजोर वर्ग की महिलाओं की सहायता के लिए आगे आएं और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि जब समाज की हर महिला मजबूत और आत्मनिर्भर बनेगी, तभी एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण संभव होगा। यही सच्चे अर्थों में महिला सम्मान और महिला सशक्तिकरण की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा।

आटा चक्की व सिलाई मशीन स्वरोजगार की ओर छोटा सा कदम : सौरभ राठी

समारोह के विशिष्ट अतिथि सुरेश राठी ग्रुप के डायरेक्टर सौरभ राठी ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन महिलाओं के सम्मान और उनकी उपलब्धियों को नमन करने का दिन है। समाज में महिलाओं का सम्मान कोई नई बात नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा में सदियों से महिलाओं को आदर और प्रतिष्ठा का स्थान दिया गया है। भारतीय सभ्यता में नारी को शक्ति, ममता और त्याग का प्रतीक माना गया है। परिवार से लेकर समाज तक हर क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अमूल्य रहा है।

उन्होंने कहा कि महिला और पुरुष को अक्सर परिवार की गाड़ी के दो पहियों की तरह माना जाता है। यह तुलना बिल्कुल सटीक है, क्योंकि जिस प्रकार एक गाड़ी तभी सुचारू रूप से चल सकती है जब उसके दोनों पहिए मजबूत और संतुलित हों, उसी प्रकार परिवार और समाज का विकास भी तभी संभव है जब महिला और पुरुष दोनों समान रूप से सशक्त और सक्षम हों। यदि किसी एक पक्ष को कमजोर कर दिया जाए या उसे अवसर न दिया जाए, तो परिवार और समाज की प्रगति भी बाधित हो जाती है। सौरभ राठी ने कहा कि आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और मेहनत का परिचय दे रही हैं। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, व्यापार हो, विज्ञान हो या सामाजिक सेवा—हर जगह महिलाएं अपनी अलग पहचान बना रही हैं। यह समाज के लिए गर्व की बात है कि महिलाएं अब केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी परिवार को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज इस समारोह में जिन महिलाओं को आटा चक्की और सिलाई मशीनें दी गई हैं, वे भले ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती हों, लेकिन उनकी क्षमता और मेहनत किसी से कम नहीं है। थोड़ी सी मदद और सही अवसर मिलने पर वे अपने जीवन को बदलने की शक्ति रखती हैं। यह सामग्री केवल एक सहायता नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन उपकरणों के माध्यम से महिलाएं अपने घरों में ही छोटा-सा स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। आटा चक्की के माध्यम से वे आसपास के लोगों के लिए आटा पीसकर आय अर्जित कर सकती हैं और सिलाई मशीन के जरिए कपड़े सिलने का काम कर सकती हैं। इस तरह वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएंगी, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सकेंगी।

समाज का कर्तव्य है जरूरतमंद महिलाओं को बढ़ने का अवसर दे 

सौरभ राठी ने कहा कि समाज का कर्तव्य है कि वह जरूरतमंद लोगों को आगे बढ़ने का अवसर दे। यदि सक्षम लोग थोड़ी-सी पहल करें तो कई परिवारों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है। इसी भावना से सुरेश राठी ग्रुप और आनंद राठी परिवार समय-समय पर सामाजिक सरोकारों से जुड़े ऐसे कार्य करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। उन्होंने सभी महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इन आटा चक्कियों और सिलाई मशीनों का पूरी लगन और मेहनत से उपयोग करें। यह उपकरण उनके लिए केवल आजीविका का साधन ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मानपूर्ण जीवन की नई शुरुआत बन सकते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में ये महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएंगी और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।

श्रीमती शशि सुरेश राठी का सहयोग महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा : डॉ. मीता मुल्तानी

समारोह की अध्यक्षता करते हुए श्री पारसमल नेत्रहीन महाविद्यालय, चौखा की प्राचार्य डॉ. मीता मुल्तानी ने कहा कि समाज में ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं जब किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में वास्तव में बदलाव लाने का प्रयास किया जाता है। आज का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया एक सार्थक और प्रेरणादायक कदम है। उन्होंने कहा कि श्रीमती शशि सुरेश राठी का यह सहयोग इन जरूरतमंद महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय है।

डॉ. मुल्तानी ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब उस समाज की महिलाएं मजबूत और आत्मनिर्भर हों। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को यदि सही समय पर सहयोग और अवसर मिल जाए तो वे अपने परिवार और बच्चों के भविष्य को संवार सकती हैं। आज जिन महिलाओं को आटा चक्की और सिलाई मशीन जैसी उपयोगी सामग्री प्रदान की गई है, वह उनके लिए केवल एक उपकरण नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता की नई राह खोलने वाला माध्यम है। उन्होंने कहा कि इन साधनों के माध्यम से महिलाएं अपने घर पर ही स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। आटा चक्की के माध्यम से वे आसपास के लोगों के लिए आटा पीसने का कार्य कर सकती हैं और सिलाई मशीन के जरिए कपड़े सिलकर आय अर्जित कर सकती हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की भावना भी विकसित होगी। डॉ. मीता मुल्तानी ने कहा कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना बहुत आवश्यक है। जब सक्षम लोग आगे आकर जरूरतमंदों की मदद करते हैं, तो इससे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रीमती शशि सुरेश राठी और राठी परिवार द्वारा किया गया यह कार्य निश्चित रूप से समाज के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उन्होंने कहा कि आज जिन महिलाओं को यह सहायता मिली है, वे इसे केवल एक उपहार के रूप में न देखें बल्कि इसे एक जिम्मेदारी और अवसर के रूप में स्वीकार करें। यदि वे इन साधनों का पूरी लगन और मेहनत से उपयोग करेंगी, तो निश्चित रूप से अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकेंगी। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं को यह सहायता मिली है, उनकी दिल से निकली दुआएं निश्चित रूप से राठी परिवार को मिलती रहेंगी। समाज सेवा का यही सबसे बड़ा पुरस्कार होता है कि किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान आए और उसके जीवन में आशा की नई किरण जगमगाए। उन्होंने इस आयोजन के लिए सभी आयोजकों और सहयोगियों को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे सामाजिक कार्य निरंतर होते रहेंगे।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार 

श्रीमती सुशीला बोहरा ने दिए आशीर्वचन 

संबल की मानद सचिव श्रीमती सुशीला बोहरा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया अत्यंत सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि संबल संस्था की ओर से वे श्रीमती शशि सुरेश राठी और राठी परिवार के प्रति गहरा आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने जरूरतमंद महिलाओं के जीवन को संवारने के लिए यह महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि आज जिन महिलाओं को आटा चक्की और सिलाई मशीनें प्रदान की गई हैं, उनके लिए यह केवल सहायता नहीं बल्कि जीवन की नई शुरुआत है। इन साधनों के माध्यम से वे स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकेंगी। उन्होंने महिलाओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के साथ इन साधनों का उपयोग करें और अपने जीवन में सफलता प्राप्त करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन महिलाओं की खुशहाली और प्रगति ही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता होगी और उनकी दुआएं हमेशा सहयोग करने वालों के साथ रहेंगी।

नीलम मेहता : महिलाएं आत्मनिर्भर तो परिवार खुशहाल

संबल संस्था की अध्यक्षा नीलम मेहता ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संबल संस्था का हमेशा से यही प्रयास रहा है कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विशेष रूप से महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि जब किसी महिला को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है तो उसका प्रभाव केवल उसी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और आने वाली पीढ़ियां भी उससे लाभान्वित होती हैं। उन्होंने बताया कि संस्था समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रही है जिनके माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। इस बार श्रीमती शशि सुरेश राठी के सहयोग और प्रेरणा से इन महिलाओं को आटा चक्की और सिलाई मशीनें प्रदान की गई हैं। यह पहल निश्चित रूप से इन महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपने परिवार के साथ-साथ समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

डीआर मेहता : महिलाएं अपने जीवन को बेहतर बनाएं

श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन में नई रोशनी लाने वाले डीआर मेहता ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि समाज सेवा का वास्तविक अर्थ यही है कि जरूरतमंद लोगों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि आज जिन महिलाओं को आटा चक्की और सिलाई मशीनें दी गई हैं, यह उनके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इन साधनों का उपयोग कर अपने जीवन को बेहतर बनाएं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। डीआर मेहता ने श्रीमती शशि सुरेश राठी के विचारों से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि वास्तव में महिलाओं के लिए कोई एक विशेष दिन निर्धारित नहीं किया जा सकता। समाज में हर दिन महिलाओं का ही दिन होता है, क्योंकि जीवन के हर क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान और सशक्तिकरण ही समाज की सच्ची प्रगति का आधार है।

अनिता मेहता : महिलाओं का संबल है ‘संबल’

शिक्षाविद अनिता मेहता ने अपने संबोधन में कहा कि संबल संस्था द्वारा किए जा रहे प्रयास वास्तव में महिलाओं के जीवन को संबल देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी महिला को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिलता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह अपने परिवार के लिए एक मजबूत आधार बन जाती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में महिलाओं का आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बनती हैं। उन्होंने कहा कि आज जिन महिलाओं को आटा चक्की और सिलाई मशीनें दी गई हैं, यह उनके लिए एक नई शुरुआत है। यदि वे इन साधनों का पूरी मेहनत और लगन से उपयोग करेंगी तो निश्चित रूप से अपने परिवार के लिए आय का एक स्थायी स्रोत बना सकेंगी। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, तब परिवार मजबूत होता है और मजबूत परिवार ही मजबूत समाज और राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

भंवर कंवर : सर्वे के लिए वाहन की जरूरत

परियोजना अधिकारी भंवर कंवर ने कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति और संबल संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य वास्तव में प्रेरणादायक हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंद और वंचित वर्ग के लोगों को लगातार सहायता और सहयोग मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए सभी आयोजकों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के प्रयास समाज में सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर उन्होंने डीआर मेहता से विनम्र आग्रह भी किया कि संस्था के सर्वे और कार्यालय कार्य के लिए पहले जो वाहन उपलब्ध कराया गया था, वह अब काफी पुराना हो चुका है। उन्होंने कहा कि कार्यों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यदि नया वाहन उपलब्ध हो सके तो इससे संस्था के कार्यों को और अधिक सुचारू रूप से संचालित करने में सुविधा होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डीआर मेहता इस अनुरोध पर सकारात्मक विचार करेंगे। कार्यक्रम का संचालन हुकमाराम ने किया। इस मौके पर संबल की सचिव सुचेता कानूंगा और सदस्य चंद्रा सुराणा सहित कई महिलाएं मौजूद थीं।

क्या कहती है लाभान्वित महिलाएं : 

गोगी : गोगी ने बताया कि वह कमठा मजदूर के रूप में काम करती हैं, जबकि उनके पति खेती-बाड़ी से परिवार चलाने की कोशिश करते हैं। आय का कोई स्थायी साधन नहीं होने के कारण परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई और घर की जिम्मेदारियों के बीच जीवन यापन करना कठिन होता जा रहा था। उन्होंने कहा कि श्रीमती शशि सुरेश राठी द्वारा दी गई सिलाई मशीन उनके लिए बड़ी मदद साबित होगी। गोगी ने बताया कि उन्होंने पहले सिलाई का प्रशिक्षण लिया हुआ है, लेकिन मशीन नहीं होने से काम शुरू नहीं कर पा रही थीं। अब सिलाई मशीन मिलने से वे घर पर ही सिलाई कार्य कर सकेंगी और अपने परिवार के भरण-पोषण में सहयोग दे पाएंगी।

भारती गौतम : भारती गौतम ने बताया कि वह पढ़ी-लिखी नहीं हैं और केवल अपने हस्ताक्षर करना जानती हैं, लेकिन उन्होंने सिलाई का प्रशिक्षण लिया हुआ है। मशीन नहीं होने के कारण वह अपने हुनर का उपयोग नहीं कर पा रही थीं। उनके पति मजदूरी करते हैं और जो थोड़ी-बहुत आय होती है, उससे घर की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीमती शशि राठी द्वारा सिलाई मशीन देना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब वे सिलाई का काम शुरू कर सकेंगी और परिवार की आय बढ़ाने में मदद करेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और घर की गाड़ी भी ठीक तरह से चल सकेगी।

कांता : कांता ने बताया कि उनके पति गोबरराम मेघवाल मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। मजदूरी से होने वाली आय से घर का खर्च चलाना कई बार मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि उन्हें सिलाई का काम तो आता है, लेकिन सिलाई मशीन नहीं होने के कारण वह इसे रोजगार के रूप में नहीं अपना पा रही थीं। उन्होंने श्रीमती शशि सुरेश राठी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बदौलत उन्हें सिलाई मशीन मिली है। अब वे घर पर ही सिलाई का काम कर सकेंगी और अपने पति के साथ मिलकर परिवार की जिम्मेदारी निभा सकेंगी। इससे उनके परिवार को आर्थिक सहारा मिलेगा।

सुमता : सुमता ने बताया कि वह दिव्यांग हैं और शारीरिक सीमाओं के कारण काम के अवसर भी सीमित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में जीवन यापन करना कई बार बहुत कठिन हो जाता है। सुमता ने भावुक होकर कहा कि श्रीमती शशि राठी द्वारा उन्हें सिलाई मशीन देना उनके लिए बहुत बड़ा सहारा है। इससे अब वे घर पर ही बैठकर सिलाई का कार्य कर सकेंगी और अपनी आजीविका कमा सकेंगी। उन्होंने कहा कि इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और वे किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी। उन्होंने इस सहयोग के लिए राठी परिवार का दिल से आभार व्यक्त किया।

तुलसी : तुलसी ने बताया कि उन्हें आटा चक्की प्रदान की गई है, जिससे उनके जीवन में नया अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है और आय के सीमित साधनों के कारण कई बार घर चलाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने श्रीमती शशि सुरेश राठी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस आटा चक्की के माध्यम से वे अपने घर से ही छोटा व्यवसाय शुरू कर सकेंगी। आसपास के लोगों के लिए आटा पीसने का काम कर वे कुछ आय अर्जित कर पाएंगी। इससे वे अपने परिवार के खर्चों में सहयोग कर सकेंगी और परिवार के लिए एक मजबूत सहारा बन पाएंगी।

शायरी : शायरी ने बताया कि उन्हें सिलाई मशीन मिलने से उनके जीवन में नई उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि पहले उनके पास काम करने की इच्छा तो थी, लेकिन साधन नहीं होने के कारण वे कुछ कर नहीं पा रही थीं। श्रीमती शशि सुरेश राठी द्वारा दी गई सिलाई मशीन उनके लिए बहुत बड़ी मदद है। अब वे घर पर ही सिलाई का काम शुरू कर सकेंगी और अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में सहयोग दे सकेंगी। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। उन्होंने शशि आंटी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मदद उनके जीवन में नई दिशा लेकर आई है।

विमला : विमला ने बताया कि उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया है, जिससे उन्हें अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि अब वे इस सहयोग से छोटा-मोटा व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रही हैं। उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए यह सहायता उनके लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। विमला ने श्रीमती शशि सुरेश राठी और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सहयोग से जरूरतमंद लोगों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जागती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सहयोग से वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor