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Thursday, July 9, 2026, 9:59 am

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बगत बेबगत/आपरै ही मतै/आयन ढूकी कविता…

दिलीप कुमार पुरोहित. बीकानेर 
कविता का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही पुराना है। जो अपने प्रारम्भिक दौर में मौखिक परम्पराओं, गीतों और मंत्रों से सृजित हुआ। हजारों साल पहले भारतीय ज्ञान परम्परा में वेद को कविता का ही रूप माना गया है। समय के साथ कविता ने समकालीन दौर तक आते-आते अपने रूप-स्वरूप में अनेक बदलाव किए और वह आज हमारे सामने है, जो भावनाओं, समय के सच और सांस्कृतिक इतिहास आदि को व्यक्त करती रही है। ये उदï्गार प्रज्ञालय संस्थान द्वारा ‘विश्व कविता दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने व्यक्त किए।
नत्थूसर गेट बाहर लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में एक नवाचार के तहत पहली बार कविता विषय को केन्द्र में रखकर हिन्दी, उर्दू एवं राजस्थानी की त्रिभाषा काव्य-गोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने विश्व कविता दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रज्ञालय संस्थान द्वारा आयोजित काव्य-गोष्ठी में कविता के कई नए रंग प्रस्तुत हुए, जो अपने आप में बीकानेर की काव्य परम्परा में एक अनुपम साहित्यिक नवाचार का उदाहरण है।
कार्यक्रम में कवि कमल रंगा ने बगत बेबगत/आपरै ही मतै/आयन ढूकी कविता… प्रस्तुत कर कविता के आगमन एवं उसकी रचना प्रक्रिया पर अपनी बात रखी। शायर जाकिर अदीब ने अपनी ताजा गज़़ल कोई हमें बताए/जिनको डराती है,शायरी पेश कर गज़़ल की रंगत एवं उर्दू के मिठास को घोला।
कवयित्री इन्द्रा व्यास ने राजस्थानी की मिठास के साथ – कविता कैवै मन री बात/खोल देवै मन की गांठ…. प्रस्तुत कर कविता के मर्म को सामने रखा। वहीं कवयित्री डॉ. कृष्णा आचार्य ने अपनी नई कविता – मैं कविता कल कल करती/झरणों संग बह आती हूं… पेश की। वहीं कवि जुगल किशोर पुरोहित ने – कविता को केवल/कविता मत समझो… प्रस्तुत कर कविता के कई संदर्भ खोले। इसी क्रम में कवि कैलाश टाक ने अपनी रचना का वाचन करते हुए – मेरी कविता मुस्कुराती है/दूर-दूर तक जाती है…. के माध्यम से कविता की सार्थकता को रेखांकित किया।
इस नवाचार लिए हुए महत्वपूर्ण काव्य आयोजन में कवि डॉ. गौरी शंकर प्रजापत ने अपनी कविता – अबै थूं फगत/कागज पर नीं रैवै… प्रस्तुत कर कविता के कई अर्थ खोले। इसी क्रम में कवि नरसिंह बिन्नाणी ने अपनी रचना शब्द कविता है/बहुत गंभीर… प्रस्तुत कर कविता की बात को रखा। इसी क्रम में कवि विपल्व व्यास ने अपनी काव्य प्रस्तुति किण रा विचार केड़ा/ताकत कितरी/आखर माय… पेश कर कविता की रंगत के साथ राजस्थानी की मठोठ रखी। कवि गिरीराज पारीक ने  कविता प्रेम की भाषा है… के माध्यम से कविता और प्रेम को रेखांकित किया।
परवान चढ़ी काव्य गोष्ठी में कवि हनुमंत गौड़ एवं लीलाधर सोनी ने अपनी नवीन रचना प्रस्तुत कर कविता के रंग बिखेरे।
इस अवसर पर मदन जैरी, पुनीत कुमार रंगा, राहुल आचार्य, भवानी सिंह, अशोक शर्मा, तोलाराम सारण, अख्तर अली, घनश्याम ओझा, नवनीत व्यास, कार्तिक मोदी गणमान्यों की गरिमामय साक्षी रही। प्रारम्भ में सभी का स्वागत शिक्षाविदï् राजेश रंगा ने किया। कार्यक्रम का संचालन   गिरिराज पारीक ने किया  एवं आभार कवि हरिकिशन व्यास ने ज्ञापित किया।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor