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Wednesday, April 29, 2026, 10:53 am

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जैसलमेर की हवा को जहरीली बनते देखा तो पंकज भाटिया ने कलेक्टर से लेकर प्रधानमंत्री तक जाहिर की चिंता…कहा-प्लास्टिक जलाएं नहीं, उसका प्रॉपर निस्तारण हो

कचरा जलाने की प्रथा पर रोक लगाने की मांग, राष्ट्रीय स्तर पर ठोस कचरा निस्तारण नीति बनाने पर जोर

दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर

राजस्थान के सीमावर्ती शहर जैसलमेर के जागरूक नागरिक पंकज भाटिया ने शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण और कचरा निस्तारण की अव्यवस्थित व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने जिला कलेक्टर से लेकर प्रधानमंत्री तक अपनी चिंता व्यक्त की है। प्रशासन और पीएम काे लिखे पत्र में उन्होंने कचरे विशेषकर प्लास्टिक, को खुले में जलाने की प्रथा पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। इस मुद्दे को उन्होंने राष्ट्रीय स्तर तक उठाते हुए अपने पत्र की प्रति नरेंद्र मोदी को भी भेजी है, साथ ही देशभर में एक समान और वैज्ञानिक कचरा निस्तारण नीति लागू करने की जरूरत पर बल दिया है।

“सफाई के नाम पर फैल रहा जहर”

पंकज भाटिया ने अपने पत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाया है—“क्या हम खुद अपने शहर की हवा ज़हरीली बना रहे हैं?” उन्होंने लिखा है कि शहर में सफाई के दौरान कई स्थानों पर कचरे को इकट्ठा कर उसे जला दिया जाता है। इस कचरे में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक भी शामिल होता है, जो जलने पर अत्यंत खतरनाक गैसें छोड़ता है। भाटिया के अनुसार, प्लास्टिक जलाने से निकलने वाला धुआं डायॉक्सिन, फ्यूरान और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों से भरा होता है, जो सीधे लोगों के फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह प्रक्रिया अल्पकालिक रूप से भले ही सफाई का आसान तरीका लगे, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम बेहद घातक हैं।

हर साल लाखों मौतों का कारण बन रहा प्रदूषण

अपने पत्र में पंकज भाटिया ने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि विश्व स्तर पर हर साल लगभग 70 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है। ऐसे में कचरे को जलाने जैसी गतिविधियां इस समस्या को और गंभीर बना रही हैं। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के धुएं के कारण दमा, एलर्जी, फेफड़ों के संक्रमण और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों पर पड़ता है जो खुले वातावरण में काम करते हैं।

जैसलमेर की घटना का भी किया जिक्र

भाटिया ने अपने पत्र में जैसलमेर में हुई बस दुखांतिका का भी उल्लेख किया है, जहां जहरीली गैसों के कारण लोगों की जान जाने की आशंका जताई गई थी। उन्होंने लिखा कि इस तरह की घटनाएं हमें चेतावनी देती हैं कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

क्या हैं पंकज भाटिया के प्रमुख सुझाव?

पंकज भाटिया ने अपने पत्र में कचरा निस्तारण को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं—

  1. प्लास्टिक जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध:
    शहर में कहीं भी कचरे, विशेषकर प्लास्टिक, को जलाने पर सख्त रोक लगाई जाए।
  2. कचरा अलग-अलग करने की व्यवस्था:
    सफाई कर्मचारियों को यह प्रशिक्षण दिया जाए कि वे कचरे को गीला और सूखा अलग-अलग करें।
  3. रीसाइक्लिंग सिस्टम को मजबूत करना:
    प्लास्टिक और अन्य पुन: उपयोग योग्य कचरे को रीसाइक्लिंग केंद्र तक पहुंचाने की उचित व्यवस्था की जाए।
  4. निगरानी और दंड का प्रावधान:
    नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और नियमित निगरानी रखी जाए।
  5. जनजागरूकता अभियान:
    नागरिकों को भी कचरा अलग-अलग देने और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए प्रेरित किया जाए।

जिला प्रशासन को लिखा पत्र, केंद्र तक पहुंचाई बात

पंकज भाटिया ने यह पत्र जिला कलेक्टर कार्यालय जैसलमेर और नगर परिषद जैसलमेर के आयुक्त को भेजा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रति प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित की है। उनका मानना है कि कचरा निस्तारण की समस्या केवल एक शहर की नहीं, बल्कि पूरे देश की है, इसलिए इसके समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति बनाना आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की मांग

भाटिया ने अपने सुझावों में यह भी कहा है कि देशभर में कचरा निस्तारण के लिए एक समान और वैज्ञानिक नीति लागू की जानी चाहिए। वर्तमान में अलग-अलग शहरों और राज्यों में अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं, जिससे समस्या का समग्र समाधान नहीं हो पाता। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार इस विषय पर एक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, जिसमें कचरा संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और निस्तारण के सभी चरणों को व्यवस्थित किया जाए।

विशेषज्ञों की राय: सुझाव व्यवहारिक और जरूरी

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पंकज भाटिया द्वारा उठाया गया मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। प्लास्टिक कचरे को जलाना न केवल वायु प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि यह मिट्टी और जल स्रोतों को भी प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

नगर निकायों के सामने चुनौतियां

हालांकि, नगर परिषदों और स्थानीय निकायों के सामने भी कई चुनौतियां हैं। संसाधनों की कमी, जागरूकता का अभाव और बढ़ती जनसंख्या के कारण कचरा प्रबंधन एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि सही योजना और तकनीक के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है।

जनभागीदारी से ही संभव समाधान

इस पूरे मुद्दे में आम नागरिकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि लोग स्वयं कचरे को अलग-अलग करके दें और प्लास्टिक के उपयोग को कम करें, तो कचरा प्रबंधन की समस्या काफी हद तक हल हो सकती है। पंकज भाटिया ने भी अपने पत्र में नागरिकों से अपील की है कि वे सफाई के नाम पर होने वाली गलत प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाएं और अपने शहर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में योगदान दें।

एक आवाज, बड़ा बदलाव संभव

जैसलमेर के एक जागरूक नागरिक द्वारा उठाया गया यह मुद्दा आज राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। यदि प्रशासन और सरकार इस पर गंभीरता से विचार करते हैं, तो न केवल जैसलमेर बल्कि पूरे देश में कचरा निस्तारण की व्यवस्था में सुधार हो सकता है। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति की जागरूकता और पहल भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला कलेक्टर कार्यालय जैसलमेर, नगर परिषद जैसलमेर और केंद्र सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं। अंततः, यह सवाल हम सभी के लिए है—क्या हम सच में अपने शहर को स्वच्छ बना रहे हैं, या अनजाने में उसे और अधिक प्रदूषित कर रहे हैं?

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor