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Sunday, August 23, 2026, 12:41 pm

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राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज, मायड़ फाउंडेशन ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र

फाउंडेशन की अध्यक्ष तरनीजा मोहन राठौड़ ने पत्र के माध्यम से बताया कि राजस्थानी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि करीब 8 करोड़ राजस्थानवासियों की यह लंबे समय से चली आ रही मांग है, जो अब तक अधूरी है।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

9783414079 diliprakhai@gmail.com

राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। इसी क्रम में मायड़ फाउंडेशन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भावनात्मक एवं औपचारिक पत्र भेजकर इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

फाउंडेशन की अध्यक्ष तरनीजा मोहन राठौड़ ने पत्र के माध्यम से बताया कि राजस्थानी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि करीब 8 करोड़ राजस्थानवासियों की यह लंबे समय से चली आ रही मांग है, जो अब तक अधूरी है।

जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार विधानसभा, लोकसभा व राज्यसभा में मुद्दा उठाया जा चुका, सामाजिक संगठनों और भाषा प्रेमियों ने आंदोलन भी किए

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस मुद्दे को राज्य के जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा में उठाया जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों और भाषा प्रेमियों द्वारा लगातार आंदोलन और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। मायड़ फाउंडेशन ने अपने निवेदन में यह भी कहा कि अन्य राज्यों की भाषाओं को संवैधानिक मान्यता मिलने के बावजूद राजस्थानी भाषा का अब तक इस सूची में शामिल न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह केवल भाषा का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव से जुड़ा मुद्दा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सकारात्मक पहल की अपील

फाउंडेशन ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे इस विषय में सकारात्मक पहल करते हुए राजस्थानी भाषा को जल्द से जल्द संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उनका मानना है कि इस निर्णय से न केवल प्रदेशवासियों को उनका अधिकार मिलेगा, बल्कि यह एक ऐतिहासिक कदम भी साबित होगा। फाउंडेशन ने आशा जताई है कि केंद्र सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और राजस्थान के करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान करेगी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor