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Wednesday, April 29, 2026, 7:12 am

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हमें हमारी परंपरागत कला धरोहर को संजोए रखना होगा : कमल रंगा

बीकानेर का 538वां स्थापना दिवस समारोह

वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि चंदा, साफा-पाग हमारी पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। बीकानेर की इसी समृद्ध कला धरोहर को हमें संजोए रखना होगा। इसी परम्परागत कला से युवा पीढ़ी रूबरू होकर इसमें अपनी कला सहभगिता का निवर्हन कर नवाचार करें। यही राजस्थानी चंदा, साफा-पाग कार्यशाला की सार्थकता है।

दिलीप कुमार पुरोहित. बीकानेर 
9783414079 diliprakhai@gmail.com 
वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि चंदा, साफा-पाग हमारी पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। बीकानेर की इसी समृद्ध कला धरोहर को हमें संजोए रखना होगा। इसी परम्परागत कला से युवा पीढ़ी रूबरू होकर इसमें अपनी कला सहभगिता का निवर्हन कर नवाचार करें। यही राजस्थानी चंदा, साफा-पाग कार्यशाला की सार्थकता है। यह उद्गार राजस्थानी साफा-पाग पगड़ी एवं कला संस्थान और थार विरासत द्वारा नगर स्थापना 538वें नगर स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय ‘उछब थरपणा’ के तहत आयोजित दो दिवसीय उक्त कार्यशाला के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने व्यक्त किए।
रंगा ने आगे कहा कि बीकानेर की विशेष चंदा, पाग-पगड़ी साफा कला देश ही नहीं विदेशों में अपनी अलग पहचान रखती है। जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक उपक्रम करने पर आयोजक संस्थाओं का साधुवाद है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कला विशेषज्ञ डॉ. राकेश किराडू ने परंपरागत कलाओं के बारे में बताते हुए कहा कि बीकानेर हमेशा अन्य क्षेत्रों की तरह ही कला जगत में अपना महत्वपूर्ण मुकाम रखता है। ऐसी कार्यशाला के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी परंपरा से रूबरू होगी, जो महत्वपूर्ण है।
प्रारंभ में पांच दिवसीय ‘उछब थरपणा’ समारोह के संयोजक वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं संस्कृतिकर्मी राजेश रंगा ने समारोह के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्यशाला के संदर्भ में कहा कि युवा पीढ़ी अपनी परंपरागत कला को नई रंगत देने का प्रयास करेगी।
दो दिवसीय चंदा, साफा-पाग कार्यशाला के प्रभारी वरिष्ठ कला विशेषज्ञ मोना सरदार डूडी ने कहा कि युवा पीढ़ी उसमें भी विशेष तौर बालिकाओं द्वारा अपनी परंपरागत कला के प्रति रूचि होना शुभ संकेत है। ऐसी कार्यशाला के माध्यम से परंपरागत कला का हस्तांतरण नई पीढ़ी तक होना नव पहल है।
इस अवसर पर समारोह के समन्वयक वरिष्ठ चंदा पाग-पगड़ी विशेषज्ञ कृष्णचन्द पुरोहित ने कहा कि बीकानेर कि स्थापना 1488 ई. से प्रारंभ हुई। परन्तु आज चंदा कला की परंपरा अपने मूल स्वरूप के साथ समकालीन संदर्भ और वर्तमान दौर के अनुसार चंदा कला आगे बढ़ रही है। इसी तरह साफा-पाग पगड़ी कला के प्रति भी युवाओं का रूझान होना अच्छी बात है। उद्घाटन समारोह में मोहित पुरोहित, गोपीकिशन छंगाणी, हरिनारायण आचार्य, गौरीशंकर व्यास, धर्मेन्द्र छंगाणी, भवानी सिंह राठौड़, नवनीत व्यास, मनमोहन पालीवाल, अशोक शर्मा, मरूधरा बोहरा  सहित गणमान्यों की गरिमामय साक्षी रही।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor