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Wednesday, April 29, 2026, 7:57 am

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सेवा ही संकल्प, सेवा ही साधना : सेवा भारती समिति के माध्यम से बदल रही ज़िंदगियां

प्रभारी अशोक अग्रवाल से विशेष बातचीत—शिक्षा, स्वावलंबन, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के जरिए राष्ट्र निर्माण का व्यापक अभियान

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

समाज सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि एक सतत साधना है—और जब यह सेवा संगठित रूप से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है, तब वह राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बन जाती है। शहर की कच्ची बस्तियों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही सेवा भारती समिति इसी सोच को साकार कर रही है। 1989 से सक्रिय और 1993-94 में विधिवत पंजीकृत इस संस्था ने हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।
इसी संदर्भ में सेवा भारती समिति के प्रभारी अशोक अग्रवाल से हुई विस्तृत बातचीत के प्रमुख अंश—

प्रश्न: सेवा भारती समिति की स्थापना और उद्देश्य क्या हैं?

अशोक अग्रवाल: सेवा भारती समिति का कार्य 1989 से प्रारंभ हुआ, हालांकि इसका विधिवत पंजीयन 1993-94 में हुआ। हमारा मूल उद्देश्य समाज के उन वर्गों तक पहुंचना है, जो मुख्यधारा से दूर हैं। समिति चार प्रमुख उद्देश्यों पर कार्य करती है—शिक्षा-संस्कार, स्वावलंबन, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा। इन चार स्तंभों के माध्यम से हम समाज के कमजोर वर्ग को सशक्त बनाने का प्रयास करते हैं।

प्रश्न: शिक्षा-संस्कार प्रकल्प के अंतर्गत क्या कार्य किए जा रहे हैं?

अशोक अग्रवाल: शिक्षा-संस्कार हमारे कार्य का आधार है। हम स्लम एरिया के ऐसे बच्चे-बच्चियों पर विशेष ध्यान देते हैं जो स्कूल नहीं जाते। इनके लिए हम ‘एकल विद्यालय’ या ‘बाल संस्कार केंद्र’ संचालित करते हैं, जहां रोजाना दो घंटे उन्हें शिक्षा के साथ-साथ नैतिक संस्कार भी दिए जाते हैं। शहर में वर्तमान में 38 ऐसे केंद्र संचालित हो रहे हैं और प्रत्येक केंद्र पर औसतन 25 बच्चे अध्ययनरत हैं। इसके अलावा जो बच्चे स्कूल जाते हैं, उन्हें भी यहां संस्कारित किया जाता है ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।

प्रश्न: स्वावलंबन के क्षेत्र में समिति क्या पहल कर रही है?

अशोक अग्रवाल: स्वावलंबन के बिना समाज का विकास संभव नहीं है। इसी सोच के तहत हम सिलाई केंद्र चला रहे हैं, जहां कच्ची बस्तियों की उपेक्षित किशोरियों और महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में 7 सिलाई केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां प्रत्येक केंद्र पर 10-12 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं। इसके अलावा हम दो स्थानों पर कंप्यूटर क्लास भी चला रहे हैं, जिससे युवाओं को डिजिटल युग के अनुरूप बनाया जा सके। एक स्थान पर हॉबी क्लास भी संचालित की जा रही है, जहां अचार, पापड़, बड़ियां और सर्फ बनाना सिखाया जाता है, ताकि महिलाएं घर बैठे रोजगार कर सकें।

प्रश्न: स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में समिति की क्या भूमिका है?

अशोक अग्रवाल: स्वास्थ्य सेवा हमारे कार्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम दो चल चिकित्सालय (मोबाइल क्लिनिक) संचालित कर रहे हैं, जिनमें डॉक्टर, कंपाउंडर, ड्राइवर और दवाइयों की पूरी व्यवस्था रहती है। ये चिकित्सालय सप्ताह के अलग-अलग दिनों में अलग-अलग क्षेत्रों—मंडोर (मंगलवार व बुधवार), बासनी इंडस्ट्रियल एरिया (सोमवार व गुरुवार) और सूरसागर (बुधवार व शनिवार)—में जाकर सेवाएं देते हैं। प्रत्येक स्थान पर 4-5 बस्तियों के लोग एकत्रित होकर उपचार प्राप्त करते हैं। इसके अतिरिक्त रावटी रोड पर सेवा भारती क्लीनिक भी संचालित किया जा रहा है, जहां शाम 4:30 से रात 8 बजे तक इलाज की सुविधा उपलब्ध है। समय-समय पर चिकित्सा शिविर, जागरूकता अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम और रक्तदान शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।

प्रश्न: सामाजिक प्रकल्प के अंतर्गत क्या गतिविधियां संचालित की जा रही हैं?

अशोक अग्रवाल: सामाजिक समरसता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए हम कई प्रकल्प चला रहे हैं। हमारे दो छात्रावास संचालित हैं—एक बालकों के लिए केशव नगर में और दूसरा बालिकाओं के लिए गुरों का तालाब क्षेत्र में। बालक छात्रावास की शुरुआत 2002 में 8 बच्चों से हुई थी, जो आज बढ़कर 70 बच्चों तक पहुंच गई है। वहीं बालिका छात्रावास 2018 में 12 बच्चियों से शुरू हुआ था, जहां अब 44 बच्चियां निवासरत हैं। यहां विद्यार्थियों को मात्र 3100 रुपए वार्षिक सहयोग राशि में रहने, खाने, पढ़ाई और अन्य सभी सुविधाएं दी जाती हैं। प्रवेश के लिए परीक्षा होती है और चयन के लिए दो मापदंड तय किए गए हैं—विद्यार्थी पढ़ाई में उत्कृष्ट हो और आर्थिक रूप से कमजोर हो। अधिकतर बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों—जैसलमेर, बाड़मेर, बालेसर और शेरगढ़—से आते हैं।

प्रश्न: समिति द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रमों के बारे में बताएं।

अशोक अग्रवाल: हम समय-समय पर सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करते हैं। सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम हमारा एक प्रमुख आयोजन है, जिसमें 2017-18 में 3562 कन्याओं का पूजन किया गया था। इसके अलावा सर्वजातीय सामूहिक विवाह का आयोजन भी किया जाता है। हाल ही में 22 फरवरी को 24 कन्याओं का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली।

प्रश्न: सेवा भारती समिति के कार्यों को आप किस रूप में देखते हैं?

अशोक अग्रवाल: हमारा मानना है कि सेवा ही राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है। हम जो भी कार्य कर रहे हैं, वह एक यज्ञ की तरह है, जिसमें हर कार्यकर्ता अपनी आहुति दे रहा है। हमारा प्रयास है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचे और उसे आत्मनिर्भर बनाया जाए। सेवा भारती समिति का यह कार्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर और संस्कारित बनाने की दिशा में एक संगठित प्रयास है। समिति जिस समर्पण और निरंतरता से कार्य कर रही है, वह निश्चित ही समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor