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Wednesday, April 29, 2026, 8:23 am

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“कभी दरिया नहीं काफी, कभी कतरा है बहुत” : कृषि विश्वविद्यालय में “पुस्तक पर्व”

जीवन में ‘एवरीथिंग’ होना चाहते हैं तो पहले ‘नथिंग’ बने : डॉ एके पुरोहित

बेहतर लिखने के लिए पहले खूब पढ़ना जरूरी : डॉ एलएन हर्ष

पुस्तक पढ़ने की आदत बनाती है विचारों को व्यापक : प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

कृषि विश्वविद्यालय के किसान कौशल विकास केंद्र में मंगलवार को कृषि विश्वविद्यालय व संबल एंटरप्राइज के संयुक्त तत्वावधान में ” पुस्तक पर्व” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का विषय ‘कृषि एवं कृषि शिक्षा में नए विचारों की दस्तक’ रखा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (डॉ) वीरेंद्र सिंह जैतावत ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ एलएन हर्ष, पूर्व कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर रहे जबकि डॉ. एके पुरोहित, पूर्व निदेशक, प्रसार शिक्षा, एसकेआरएयू, बीकानेर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान डॉ. आरपी जांगिड़, पूर्व निदेशक अनुसंधान, एसकेआरएयू, बीकानेर भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. एके पुरोहित ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अलग शख्सियत होती है जो उसे जीवन के उच्च मुकाम तक लेकर जाती है और इसमें किताबों का अत्यधिक अहम योगदान होता है। डॉ. पुरोहित ने कृष्ण बिहारी ‘नूर’ की ग़ज़ल का उदाहरण देते हुए कहा कि “तश्नगी के भी मुकामात हैं क्या क्या यानी, कभी दरिया नहीं काफी, कभी कतरा है बहुत।” उन्होंने कहा कि संतोष ही सबसे बड़ी बाधा है और संतोष ही सबसे बड़ा धन है, आपका संतोष ही आपके जीवन की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा अगर आप जीवन में ‘एवरीथिंग’ होना चाहते हैं तो सर्वप्रथम ‘नथिंग’ हो जाए। इसी खालीपन से आप नए ज्ञान के उजास से स्वयं को आलोकित करोगे। उन्होंने कृष्ण व कृषि का संबंध बताते हुए कहा कि दोनों का मूल धातु एक है जिसका अर्थ आकर्षण है। इस दौरान उन्होंने ‘सकल पदारथ है जग माही’ की बात करते हुए कर्म के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

लिखने के लिए पढ़ना जरूरी

कार्यक्रम के दौरान डॉ. एलएन हर्ष ने कहा कि बेहतर लिखने के लिए आवश्यक है कि खूब किताबें पढ़ी जाए, इससे नए विचार उपजते हैं एवं बौद्धिक क्षमता विकसित होती है। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों से स्नेह एवं स्वयं को सदैव आत्मप्रेरित रखने की बात भी कही। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रोफेसर जैतावत ने कहा कि यह शाश्वत सत्य है कि जो जितनी अधिक पुस्तकें पढेगा वह उतना ही बहुमुखी ज्ञान का धनी होगा। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमारे विचारों को व्यापक बनाकर हमें जीवन में बेहतरीन की ओर ले जाती है। उन्होंने मुख्य वक्ता का आभार जताते हुए कहा कि कृषि के अतिरेक कार्यक्रम में साझा किया गये आपके विचार निश्चित रूप से विश्वविद्यालय के सदस्यों को प्रेरित करेंगे।

पांच पुस्तकों का किया विमोचन

कार्यक्रम के दौरान डॉ. एके पुरोहित की विविध विषयों पर लिखी गई पांच पुस्तकों का विमोचन अतिथियों की ओर से किया गया। कार्यक्रम में डॉ आरपी जांगिड़ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। किसान कौशल विकास केंद्र के प्रभारी डॉ. प्रदीप पगारिया ने स्वागत उद्बोधन सहित डिजिटल युग में पुस्तक पढ़ने की महत्ता बताई। कार्यक्रम में आभार डॉ. प्रियंका स्वामी ने जताया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी डीन, निदेशक, अधिकारियों सहित शैक्षणिक सदस्यों की मौजूदगी रही।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor