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Thursday, July 9, 2026, 1:33 am

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एम.सी.पी.आई.यू.ने किया महंगाई, बेरोजगारी को लेकर प्रदर्शन, प्रधानमंत्री का पुतला फूंका

राखी पुरोहित. जोधपुर

भारत की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यूनाइटेड के केन्द्रीय नेतृत्व के आ‌ह्वान पर पार्टी की जोधपुर जिला कमेटी ने महंगाई, बेरोगारी, श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी संशोधन, धार्मिक उन्माद, शिक्षा में हो रहे निरंतर घोटालों के विरोध में सोजती गेट के बाहर स्थित यूनियन मैदान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला फूंका।

प्रदर्शनकारियों को पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य कॉ० गोपीकिशन, केन्द्रीय समिति सदस्य कॉ० नदीम खान, बृजकिशोर, वहीदुदीन, हबीबुर्रहमान, फिरोज खान, महेन्द्र खिचीं, चाँद अली, मुस्तकीम खिलजी, अब्दुल खलीक, अशोक कुमार, रामस्वरूप, चन्द्रवीर सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने देश में निरंतर बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त की। केन्द्र सरकार की नीतियों की वजह से मेहनतकश वर्ग की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। सरकार का यह दावा पूरी तरह से बेबुनियाद है कि लेबर कोड से रोजगार और निवेश बढ़ेंगे। इन कोड को इस तरह से बनाया गया है कि पूंजी के दबाव में मजदूरों को कोई सुरक्षा न मिल सके। इनका मकसद देश-विदेश की पूंजी को आकर्षित करना है, और ऐसा करने के लिए मजदूरों के अधिकारों से जुड़े सभी जरूरी नियमों को खत्म किया जा रहा है। इसके अलावा, ये कोड हड़ताल करने का अधिकार छीनने और मजदूर वर्ग की किसी भी सामूहिक कार्रवाई को अपराध की श्रेणी में लाने की कोशिश करते हैं। लेबर कोड का मकसद पूंजीपति शासक वर्ग को सरकार की कानूनी मंजूरी के साथ मजदूरों के अधिकारों और सुविधाओं को कुचलने की ताकत देना है।

केन्द्र सरकार के अमरीकी साम्राज्यवाद के समक्ष आत्मसमर्पण ने देश की स्थिति को और विकटं बना दिया है। सरकार के पास अमरीकी टैरिफ का कोई तोड़ नहीं है, अपितु अमरीकी साम्राज्यवाद को खुश करने के लिये उनकी मर्जी की ट्रेड डील को स्वीकार कर देश को और धरातल में ला दिया है। भारतीय मुद्रा का निरंतर अवमूल्यन भी एक चिंता का विषय है।

वक्ताओं ने कहा कि अनेक क्षेत्रों में मंदी और आर्थिक तंगी के कारण लाखों श्रमिकों एवं कर्मचारियों के बेरोजगार होने के चलते उनका व उनके परिजनों का जीना दुशवार हो रहा है। देशभर में न्यूनतम वेतन, कार्यविधि, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल पर सुरक्षा बंदोबस्त एवं ट्रेड यूनियन अधिकारों संबंधी मौलिक कानूनों की अवहेलना मेहनतकशों की आर्थिक कठिनाईयों को दिन प्रतिदिन बढ़ा रही है लेकिन केन्द्र सरकार इन समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। केन्द्र सरकार द्वारा रक्षा, बीमा, रेल्वे और अन्य क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्वीकृति की पहल तथा सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों जिसमें पेट्रोलियम एवं वित्त क्षेत्र भी शामिल है में निवेश के लिये सरकार की पहल की नीति राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ साथ आम जनता के लिये भी नुकसानदेह है। जीवनोपयोगी वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आम लोगों के जीवनयापन में भारी कठिनाईयां पैदा कर रही है। केन्द्र सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी फिसड्डी साबित हुई है तथा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। आज जब नीट सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक हो रहे है तथा विभिन्न परिक्षाओं में धांधलियां पाई जा रही है. ऐसे में केन्द्र सरकार अपनी जवाबदेही से भाग रही है तथा देश की जनता दिगभ्रमित कर रही है।

आज देश का श्रमिक, युवा, बेरोजगार निरंतर उनके विरुद्ध अपनाई जा रही नीतियों से क्षुब्ध है। ऐसे में आमजन की आवाज को बुलंद कर सतत् संघर्ष करना समय की मांग है। वक्तओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हो जाता वे यूं ही आंदोलनरत रहेंगे तथा संघर्ष करते रहेंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor