वायरल वीडियो में दूध की गुणवत्ता, मिलावट और स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर कई दावे; विशेषज्ञों की राय है कि जागरूक उपभोक्ता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
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भारत में दूध को लंबे समय से संपूर्ण आहार और अमृत के समान माना जाता रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के भोजन में दूध की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन हाल के वर्षों में दूध में मिलावट, रसायनों के उपयोग और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब पर वायरल एक विस्तृत वीडियो ने भी इस मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वीडियो में कई छापों, कथित मामलों और विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि दूध में केवल पानी ही नहीं, बल्कि यूरिया, डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा, पाम ऑयल, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और अन्य रसायनों तक की मिलावट की जाती है। साथ ही डेयरी उद्योग में एंटीबायोटिक, हार्मोन, फफूंदजनित विषाक्त पदार्थ (Aflatoxin) और पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर प्रश्न भी उठाए गए हैं।
हालांकि, वीडियो में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। फिर भी यह विषय इतना गंभीर है कि उपभोक्ताओं, सरकार, डेयरी उद्योग और खाद्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
मिलावट के तरीके: सिर्फ पानी नहीं, रसायनों तक का इस्तेमाल
वीडियो में दावा किया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व दूध की मात्रा बढ़ाने और गुणवत्ता जांच से बचने के लिए उसमें विभिन्न रसायनों की मिलावट करते हैं। इनमें कथित रूप से शामिल हैं—
– यूरिया
– डिटर्जेंट
– कॉस्टिक सोडा
– पाम ऑयल
– हाइड्रोजन पेरॉक्साइड
– घटिया मिल्क पाउडर
– अन्य औद्योगिक रसायन
इनका उद्देश्य दूध को देखने में सामान्य बनाए रखना और जांच उपकरणों को भ्रमित करना बताया गया है।
दूध में मिलावट क्यों खतरनाक है?
संभावित स्वास्थ्य जोखिम
– पेट और पाचन संबंधी बीमारियां
– किडनी और लीवर पर असर
– बच्चों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव
– गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त जोखिम
– लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका (कुछ रसायनों के संपर्क में आने पर)
डेयरी उद्योग की दूसरी चुनौती: सिर्फ मिलावट नहीं
वीडियो में यह भी कहा गया है कि यदि जानबूझकर होने वाली मिलावट पूरी तरह बंद भी हो जाए, तब भी कई समस्याएं बनी रह सकती हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
– एंटीबायोटिक अवशेष
– पशुओं के चारे से आने वाले अफ्लाटॉक्सिन
– कीटनाशक अवशेष
– पशुओं में संक्रमण के कारण दूध की गुणवत्ता पर प्रभाव
– हार्मोन के दुरुपयोग की आशंका
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि पशुपालन में वैज्ञानिक तरीके, साफ-सफाई और दवाओं के सही उपयोग का पालन अत्यंत आवश्यक है।
FSSAI की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की है।
यह संस्था—
– दूध के नमूनों की जांच करती है।
– गुणवत्ता मानक तय करती है।
– मिलावट मिलने पर कार्रवाई करती है।
– राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभागों के साथ संयुक्त अभियान चलाती है।
समय-समय पर देशभर में दूध के हजारों नमूनों की जांच भी की जाती है।
क्या करें उपभोक्ता?
- केवल विश्वसनीय विक्रेता से दूध खरीदें।
- पैक्ड दूध खरीदते समय पैकेट सही प्रकार से सील है या नहीं, देखें।
- खुले दूध की गुणवत्ता पर संदेह होने पर प्रयोगशाला जांच कराई जा सकती है।
- FSSAI Food Safety Connect ऐप अथवा स्थानीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी से शिकायत करें।
- अत्यधिक सस्ता दूध खरीदने से बचें।
- बच्चों और बुजुर्गों को संदिग्ध दूध न दें।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक
भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। करोड़ों किसान और डेयरी परिवार इस क्षेत्र से जुड़े हैं। अधिकांश उत्पादक ईमानदारी से गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराते हैं। इसलिए कुछ मामलों में सामने आने वाली मिलावट के आधार पर पूरे डेयरी क्षेत्र को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। आवश्यकता दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरी आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ाने की है।
जागरूक उपभोक्ता ही सबसे बड़ी ताकत
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता यदि जागरूक होंगे तो मिलावट करने वालों के लिए बाजार में टिकना कठिन होगा।
इसके लिए जरूरी है—
– गुणवत्ता जांच मजबूत हो।
– नियमित सैंपलिंग हो।
– दोषियों को कठोर दंड मिले।
– किसानों को वैज्ञानिक पशुपालन का प्रशिक्षण मिले।
– उपभोक्ता शिकायत करने से न हिचकें।
ध्यान रखें
दूध पूरी तरह छोड़ने का निर्णय व्यक्तिगत स्वास्थ्य, आयु और पोषण संबंधी जरूरतों पर निर्भर करता है।
यदि किसी व्यक्ति को दूध या डेयरी उत्पादों को लेकर चिंता है, तो वह डॉक्टर या पंजीकृत पोषण विशेषज्ञ (Dietitian) से सलाह लेकर ही अपने आहार में बदलाव करे।
मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
दूध भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसकी शुद्धता सुनिश्चित करना सरकार, डेयरी उद्योग और समाज सभी की साझा जिम्मेदारी है। मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई, नियमित जांच, वैज्ञानिक पशुपालन और उपभोक्ताओं की जागरूकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकते हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आने वाले ऐसे वीडियो लोगों को सतर्क जरूर करते हैं, लेकिन उनमें किए गए दावों की पुष्टि आधिकारिक रिपोर्टों और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ही की जानी चाहिए। जागरूक रहें, विश्वसनीय स्रोत से ही दूध खरीदें और किसी भी प्रकार की मिलावट की आशंका होने पर तुरंत संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें। स्वस्थ समाज की शुरुआत सुरक्षित भोजन से होती है।


