Explore

Search

Sunday, August 2, 2026, 1:56 am

Sunday, August 2, 2026, 1:56 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

वरिष्ठ पत्रकार डी.के. पुरोहित की पुस्तक ‘रहस्यमयी संत’ का हुआ लोकार्पण

मानसिक रोगी को समाज में सम्मान और स्नेह के अधिकारी, क्योंकि उनमें अनंत संभावनाएं होती हैं : डॉ. जीडी कूलवाल

राखी पुरोहित. जोधपुर

राइजिंग भास्कर डॉट कॉम और लोटस ब्लूम पब्लिकेशंस की ओर से नेहरू पार्क स्थित डॉ. मदन सावित्री डागा साहित्य भवन में वरिष्ठ पत्रकार डी.के. पुरोहित की पुस्तक ‘रहस्यमयी संत’ का लोकार्पण हुआ। समारोह डॉ. जी.डी. कुलवाल की अध्यक्षता, मुख्य अतिथि दुबई से पधारे वरिष्ठ आध्यात्मिक चितंक और लेखक केबी व्यास, विशिष्ट अतिथि अनुराधा अडवानी, महात्मा गांधी अस्पताल की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी व किचन प्रभारी तेज कंवर सांखला, समाजसेवी सुरेश राठी, डॉ. अरविंद कुमार पुरोहित, वरिष्ठ सीए अनिल के. जैन, श्री जागृति संस्थान के अध्यक्ष राजेश भेरवानी, युवा लेखक गोरधन सुथार के कर कमलों द्वारा अनेक साहित्यकारों व प्रबुद्धजनों की मेजबानी आयोजित हुआ।

कार्यक्रम अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन व राखी पुरोहित द्वारा सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम के आरंभ में तेज कंवर सांखला ने अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि उनके बड़े भाई की पुस्तक को अध्यात्म जगत में बड़ा सम्मान मिले मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. जी.डी. कूलवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानसिक रोगी भी समाज में सम्मान और स्नेह के अधिकारी होते हैं। उनका समग्र मूल्यांकन करते समय उनकी बीमारी आड़े नहीं आनी चाहिए क्योंकि उनमें अपार संभावनाएं होती है। ऐसे व्यक्ति अच्छे खिलाड़ी बन सकते हैं, अच्छे प्रशासक बन सकते हैं, अच्छे साहित्यकार बन सकते हैं, अच्छे कलाकार बन सकते हैं और अच्छे वैज्ञानिक और अच्छे नेता भी बन सकते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ आध्यात्मिक चितंक और लेखक केबी व्यास ने कहा कि डी.के. पुरोहित की पुस्तक का मूल्यांकन समय ही तय करेगा। इस पुस्तक को लोटस ब्लूम पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है। पुरोहित ने अपनी धर्मपत्नी राखी पुरोहित के जन्म दिन के अवसर पर पुस्तक का लोकार्पण कर उन्हें अनूठा उपहार दिया है। हम दोनों को शुभकामनाएं देते हैं। धनुष जितना कसा हुआ होता है तीर उतना ही लक्ष्य की ओर बढ़ता है। राखी जी धनुष की भूमिका में है और उनकी बदौलत डी.के. पुरोहित बहुत आगे तक जाएंगे। डी.के. पुरोहित ने लेखकीय उद्बोधन दिया और पुस्तक के अंतिम अध्याय जिंदगी-मौत पर अपनी बात रखी। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस, संत योगानंद, श्री अरविंद, महर्षि महेश योगी सहित कई संतों का उदाहरण देते हुए कहा कि मानसिक तरंगों के जरिए संवाद करना नई बात नहीं हैं। लेकिन विज्ञान के धरातल पर इसे मान्यता मिलना अभी शेष है। उन्होंने स्वामी पंकज प्रभु के माध्यम से ब्रह्मांड की उत्पत्ति, ब्रह्मांड में पहुंचने, जीवन-मृत्यु, बीमारी, रोग मुक्त, मोक्ष और पुनर्जन्म के साथ पृथ्वी की आयु और कई अन्य फार्मूलों का वर्णन किया और कहा कि किसी भी नए विचार को तुरंत खारिज नहीं किया जाना चाहिए। पुरोहित ने कहा कि काफी समय पहले वैज्ञानिक यही मानते थे कि सूरज पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है और बहुत बाद में यह बात स्थापित हुई कि सूरज पृथ्वी के चारों ओर चक्कर नहीं लगाता बल्कि पृथ्वी सूरज के चारों ओर चक्कर लगाती है। इसी तरह बिंग बैंग की थ्योरी से ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सिद्धांत भी किसी दिन खारिज हो जाए और स्वामी पंकज प्रभु का सिद्धांत स्थापित हो जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए। पर यह सबकुछ भविष्य के लिए छोड़ देना चाहिए।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि अनुराधा अडवानी ने कहा कि मानसिक तरंगों के जरिए 24 साल पहले उन्हें भी ईश्वरीय संकेत मिला था और अनुबंध वृद्धजन कुटीर की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि लेखक के आध्यात्मिक अनुभव का हमें स्वागत करना चाहिए। वरिष्ठ समाजसेवी सुरेश राठी ने कहा कि एक मूर्ति ईश्वर बनाता है आदमी की और दूसरी मूर्ति आदमी बनाता है ईश्वर की। मगर मैं तो दिलीप जी में ईश्वर के दर्शन करता हूं। डॉ. अरविन्द कुमार पुरोहित ने कहा कि मानसिक तरगों के जरिए संवाद करना नई बात नहीं है, ऐसे उदाहरण इतिहास में कई रूपों में देखने को मिलते हैं।

वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट अनिल के. जैन ने दिलीप पुरोहित को पुस्तक के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि हर सुधि पाठक को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए क्योंकि यह आम साहित्यिक पुस्तक से हटकर है। युवा लेखक और एंकर गोरधन सुथार ने पत्र-वाचन और पुस्तक की समीक्षा की। श्री जागृति संस्थान के अध्यक्ष राजेश भैरवानी ने कहा कि पुस्तक आम पुस्तक नहीं हैं, यह कई रहस्यों का नया उद्घाटन करती है। कार्यक्रम का संचालन मधुर परिहार ने किया।

इनकी रही उपस्थिति

इस मौके पर निरूपा पटवा, अशोक व्यास, असरार आहिल, हंसराज बारासा, सुरेश केवलिया, सुमनेश व्यास, आनंद कल्ला, चांदकौर जोशी, दिलीप केसानी, बसंती पंवार, डॉ. मनीषा डागा, डॉ. तृप्ति गोस्वामी, मृदुला श्रीवास्तव, अनिल अनवर, अशफाक अहमद फौजदार, कमल शर्मा, डॉ. संजीदा खानम, इंसाफ खान, पंकज बिंदास, केवलचंद कोठारी, पूनमाराम विश्नोई, नीलम व्यास स्वयंसिद्धा, गोल्डी बिस्सा, आनंद सिंह परिहार, अनिता जांगिड़, स्नेहलता सुथार, कौशल्या अग्रवाल, उत्तम कुलरिया, अरुण पुरोहित, रवि परिहार, मोहित सैन, सज्जन सिंह, नरेंद्र जांगिड़, ऋचा शरद अग्रवाल, रजनी प्रजापति, ओमप्रकाश वर्मा, डॉ. हस्तीमल आर्य, महेश कुमार पंवार, गोविंदराम पाटवा, अनुराधा व्यास, मनीष पंवार, चंद्रशेखर अरोडृा, रामगोपाल जोशी, पर्यावरणविद प्रदीप शर्मा, शिवप्रकाश अरोड़ा, विजय श्याम दाधीच, सुरेशचंद्र भूतड़ा, सीताराम राठी, सतीश कुमार, संदीप चौधरी, यशवंत शर्मा, विकास माथुर, सुरेश पी. खेतानी, किशनलाल जांगिड़, भूराराम सुथार, जुगल किशोर सारस्वत, सूरज सोनी, जेके माहेश्वरी, सुनील जोशी, श्याम गुप्ता शान्त, के बी व्यास की धर्मपत्नी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor