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Sunday, October 18, 2026, 9:02 am

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Lifestyle

उपशम भाव से क्रोध पर नियंत्रण ही आत्मकल्याण का मार्ग

साध्वी दिव्यप्रभा जी ने कहा—क्रोध व्यक्ति का विवेक हरता है, क्षमा और शांति जीवन को देती हैं सकारात्मक दिशा

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

मुहताजी के मंदिर में चल रहे नित्य प्रवचन के दौरान साध्वी दिव्यप्रभा जी एवं साध्वी भाविकयशा जी महाराज ने उपशम भाव में रहने तथा क्रोध पर नियंत्रण रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मन में शांति, क्षमा और ममता का भाव रखना आध्यात्मिक जीवन की महत्वपूर्ण साधना है। विपरीत परिस्थितियों में भी शांत रहकर भावनाओं को नियंत्रित करना ही सच्ची साधना है।

प्रवचन में समझाया गया कि क्रोध मनुष्य के लिए विनाशकारी है। क्रोध के कारण व्यक्ति अपना विवेक खो देता है और अपने हित-अहित को पहचानने की क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए मनुष्य को क्रोध से बचते हुए अपने मन को शांत रखने तथा निरंतर आत्मसंयम का प्रयास करना चाहिए।

इस अवसर पर पूज्य पुष्पाजी (दाक्खाजी महाराज साहब) महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर पंच कल्याणक पूजन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ पूजन कर उनके जीवन एवं धर्म साधना का स्मरण किया।

ट्रस्ट के सचिव पवन मेहता ने कहा कि क्रोध विनाशकारी है, जबकि क्षमा, शांति एवं उपशम भाव जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor