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Friday, July 10, 2026, 1:12 pm

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ब्रह्मनिष्ठ संत भूरसिंह महाराज का निर्वाण दिवस संत समागम के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया

पंकज जांगिड़. जोधपुर 

रातानाडा स्थित पंचवटी काॅलोनी निवासी 98 वर्षीय ब्रह्मनिष्ठ संत भूरसिंह महाराज के निर्वाण दिवस पर हंस निर्वाण आश्रम के उनके गुरु ब्रह्मनिष्ठ संत तेजसिंह महाराज डेगाना व ब्रह्मनिष्ठ संत ज्योति प्रकाश महाराज मेड़ता के दिव्याशीष से संत समागम के साथ सुरसागर, भुरटिया स्वरूपगढ स्थित श्री रामानन्द धाम आश्रम एवं विश्व गुरु अखिल भारतीय हंस निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री मत्परमहंस स्वामी रामानंद महाराज, हंस निर्वाण आश्रम भकरी के महंत साध्वी महेश्वरानंद गिरी महाराज, संत निश्चलानंद गिरी महाराज, मकराना आश्रम के महंत बालमुकुंद गिरी महाराज के सानिध्य में पंचवटी काॅलोनी स्थित बाल उद्यान में सत्संग का आयोजन हुआ। आयोजनकर्ता ने संत व कलाकारों का आदर-सत्कार व मान सम्मान किया।

कार्यक्रम संयोजक श्याम सिंह पंवार, लाल सिंह पंवार व ओमकार सिंह पंवार ने बताया कि भूरसिंह पंवार गृहस्थी थे व रेलवे में लोकों पायलट पद से सेवानिवृत्त होने के बाद 1960 से हंस निर्वाण आश्रम से जुड़ गए और शेष जीवन संत की तरह बिताया। सत्संग के दौरान साध्वी निशा, गायक पंकज जांगिड़, चंदनदास वैष्णव, मंजू डागा और सीता राठौड़ ने संतवाणी व भजनों की प्रस्तुति देकर सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

संतों ने अपने आशीर्वचन में कहा कि संतों और महापुरुषों के आशीर्वाद से समस्त सुख प्राप्त होते हैं। उनके आशीर्वाद से ही सेवा, सत्संग व सुमिरन करने का अवसर प्राप्त होता है। मनुष्य को सभी का दिल से मान-सम्मान व सत्कार करना चाहिए। और कहा कि कुसंगति से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है जिससे इंसान भटक जाता है। सत्संग सद-बुद्धि देता है जिससे बिगड़े से बिगड़ा व्यक्ति भी सुधर जाता है। संत का समागम और हरि कथा, दोनों ही दुर्लभ होते हैं। पुत्र, पत्नी और पैसा तो पापी के पास भी होते हैं। जिस पर ईश कृपा होती है, उसे ही सत्संग नसीब होता है। मानव जीवन में ब्रह्म की प्राप्ति केवल सच्चा गुरु करवा सकता है। पहले गुरु के माध्यम से भगवान को जानो, तब मानो। उसके बाद भक्ति के वास्तविक आनन्द का लुत्फ ले सकोगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वे अहंकार को अपने पास फटकने भी मत दो। अहंकार बुद्धि को नष्ट कर देता है और चिंताओं में डुबो देता है। चिताओं में डुबा मनुष्य चिता के समान होता है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor