कवि-शाइर-गजलकारों ने रचनाएं सुनाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए
राइजिंग भास्कर डॉट कॉम. जोधपुर
नवोदय सबरंग साहित्य परिषद के कला-साधक प्रोफेसर डॉ. हेमंत शर्मा को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए एक पुष्पांजलि सभा का आयोजन संस्था के अध्यक्ष एनके मेहता के निवास पर किया गया। इसमें दिवंगत डॉ. शर्मा को श्रद्धांजलि दी गई। नगर के युवा एवं प्रबुद्ध कवि-कवयित्री, शायर व संगीत प्रेमियों ने विभिन्न भावभूमि की रचनाओं और संगीत की स्वर-लहरियों से काव्य-संगम को यादगार बना दिया।
इस अवसर पर अध्यक्ष मेहता ने स्व. डॉ. हेमंत शर्मा के बचपन के प्रसंग एवं संस्मरण सुनाकर सबको भाव-विभोर कर दिया। शहजाद अली ने- ‘कुछ मुतासिर होते हैं, कुछ करते हैं मुतासिर’ सुनाकर महफ़िल का धमाकेदार आगाज़ किया। उसके बाद संस्था के सचिव अशफाक अहमद फौजदार ने ग़ज़ल- ‘कंगूरे ज़लज़ले की जद में आ गए’ सुनाकर सभा में ज़लज़ला पैदा कर दिया। एनके मेहता ने तरन्नुम में – ‘एक बार मुस्कुरा दो’ सुनाकर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। दीपा परिहार ने अपनी नवीनतम रचना-‘नींद ने कितने ख़्वाब बेचे हैं’ सुनाकर सबकी नींद हराम कर दी। डॉ. तृप्ति गोस्वामी ने अपना ताजातरीन कलाम-‘ जब भी मैंने खुशियां चाही’ सुनाकर सबकी आत्मा तृप्त कर दी। युवा कवि व गायक नवीन पंवार के प्रकृति चित्रण से जुड़े बेजोड़ नव-गीत- ‘गेहूं की बालियां’ के प्रस्तुतीकरण से सभा में अंत तक मदहोशी छाई रही। नंदकिशोर भाटी ने स्व. किशोर दा के अमर गीत-‘ जीवन से भरी तेरी आंखें’ सुनाकर सबको तर-बतर कर दिया। उसके बाद गायक वीरेंद्र पुरी ने साहिर सा. का गीत-‘ मैं पल दो पल का शायर हूं’ सुनाकर सबके जज़्बात जगा दिए। एनडी निम्बावत ने उम्दा कविता-‘ ज़माने में रस्में निभानी होती है’ से महफ़िल में रंग भर दिया। प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक अर्जुन सांखला ने अपनी कशिश भरी आवाज में-‘बहुत बेचैन है दिल, तुम जहां भी हो चले आओ’ सुनाकर सभी को बेचैन कर दिया। श्याम गुप्ता ‘शान्त’ की कविताएं -‘दम तोड़ता अट्टहास’ और ‘फिलॉसफी प्यार की’ ने गोष्ठी के प्रयोजन को साकार कर दिया। जेके महेश्वरी और दिनेश शर्मा ने भी चंद खूबसूरत असआर पेश किए।
एनके मेहता की अध्यक्षता और अनुराधा एवं नरेंद्र अडवाणी की मेजबानी में चला उक्त कार्यक्रम अपनी बुलंदियों के साथ बेहद शालीनता से तीन घंटे में संपन्न हुआ।



