भारतीय राजदूत डॉ. कुमार तुहिन, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती तुहिन, फर्स्ट सेक्ट्री व भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक कृस गुप्ता, भारतीय दूतावास के राजेश कुमार सिन्हा , Stichting Maitry ( मैत्री) Vriendschap voor iedereen ‘ के संस्थापक डव सूरीनाम गिरमिटिया की चौथी पीढ़ी डॉ. दिनेश ननंन पांडे व अंतरराष्ट्रीय हिन्दी संगठन नीदरलैंड की अध्यक्ष डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पांडे ने कार्यक्रम को गरिमामय बना दिया…।
नीदरलैंड से डॉ. ऋतु ननंन पांडे की रिपोर्ट
बिहार फाउंडेशन नीदरलैंड (बीएफएनएल) की ओर से भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र गांधी सेंटर डेनहग में बिहार दिवस का आयोजन किया गया। भारत के इतिहास में “ बिहार “ राज्य अपना विशेष महत्व रखता है। प्राचीन काल में “बिहार” विशाल साम्राज्यों, शिक्षा केन्द्रों एवं संस्कृति का गढ़ था। नीदरलैंड में सूरीनामी प्रवासियों जो 151 पहले बिहार व उसके आसपास के राज्यों से सूरीनाम व सूरीनाम से नीदरलैंड में आए और भारत के बिहार प्रदेश से आए बिहार निवासियों की संख्या नीदरलैंड की जनसंख्या की 3% है। बिहार फ़ाउंडेशन नीदरलैंड के अध्यक्ष दयाशंकर कुमार, उपाध्यक्ष दर्शन राज आशुतोष द्वारा यह आयोजन किया गया।
इस अवसर पर भारतीय राजदूत डॉ. कुमार तुहिन और उनकी धर्म पत्नी श्रीमति तुहिन, फ़र्स्ट सेक्ट्री व भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक कृस गुप्ता, भारतीय दूतावास के राजेश कुमार सिन्हा , Stichting Maitry ( मैत्री) Vriendschap voor iedereen ‘ के संस्थापक डव सूरीनाम गिरमिटिया की चौथी पीढ़ी डॉ. दिनेश ननंन पाँडे व अंतरराष्ट्रीय हिन्दी संगठन नीदरलैंड की अध्यक्ष डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पांडे उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का आरंभ “ बिहार फ़ाउंडेशन “ के अध्यक्ष दया शंकर कुमार व उपाध्यक्ष दर्शनराज व जयंत शांडिल्य के साथ भारत के राजदूत डॉ कुमार तुहिन व उनकी धर्मपत्नी द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया गया। श्रीमती रुचि सौम्या द्वारा भगवान गणेश स्तुति की गई और इसके बाद राजदूत डॉ. कुमार तुहिन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सांस्कृतिक केन्द्र के सभागार में उपस्थित अतिथियों को बिहार की संस्कृति से परिचित कराया। साथ ही कहा कि आज के समय में बिहार एक तेज़ी से आधुनिक व प्रगतिशील राज्य के रूप में भारत व विदेशों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक विकास, कृषि, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल प्रशासन और जलवायु परिवर्तन जैसे बिन्दुओं पर भी प्रकाश डाला। बिहार को पर्यटन से जोड़ने और बिहार में विदेशी व आधुनिक नई-नई तकनीकों का आदान-प्रदान किस प्रकार किया जाए, व युवाओं की प्रतिभाओं को किस प्रकार बिहार को और ज़्यादा सशक्त बनाने में किस प्रकार उपयोग किया जाए इस पर भी ध्यान आकर्षित किया गया। उन्होंने बताया कि भारत के बिहार केवल बौद्ध सर्किट या संस्कृति तक ही सीमित नहीं है वहां राम सर्किट, सीता जन्मभूमि, नालंदा विश्वविद्यालय मधुबनी चित्रकला, टिकुलि, आदि चित्रकला यहां की शान है।
इस अवसर पर सूरीनाम से ऑनलाइन भारतीय दूतावास के राजदूत डॉ सुभाष प्रसाद गुप्ता ने भी इस अवसर पर बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की और अपने वक्तव्य में बताया कि पहला डाइसपोरा तो 151 साल पहले भारत से सूरीनाम आए भारतीयों द्वारा आरंभ हुआ । सूरीनाम के भारतीयों ने ही सही अर्थों में बिहार की संस्कृति को पाँच पीढ़ी से संजोए रखा है। मैं सूरीनाम में आ कर बिहार को भारत को बहुत ज़्यादा याद नहीं करता क्योंकि यहाँ सूरीनाम में एक छोटा बिहार बसता है।
मैथिली ठाकुर भी ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़ीं
इस अवसर पर बिहार की कोकिला मैथिली ठाकुर भी ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़ी। उन्होंने सभी को बिहार दिवस की शुभकामनाएं अपने एक गीत के साथ प्रेषित की। इस बीच आभासी पटल पर बिहार की सांस्कृतिक , साहित्यिक व शैक्षणिक संस्थानों के विषय में जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में भारतीय सूरीनामी कवि, गायक सतेफन रविनदर पिकार ने अपनी सरनामी हिन्दी में एक गीत “तीन देश तीन संस्कृति “ प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया ।इसके बाद डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे ने बिहार की संस्कृति पर आधारित कविता “पूरा विश्व हमारा आभारी है” ने सभागार में बैठे दर्शकों से भूरी भूरी प्रशंसा बटोरी ।
लोकगीत झिझरी को सुनाकर दाद लूटी
रंगारंग कार्यक्रम के अंतर्गत श्वेता वर्मा, रुचि सौम्या, सुनीता रॉय ने बिहार के प्रसिद्ध लोकगीत झिझरी को सुना कर पूरे सभागार को झूमने पर विवश कर दिया। इस समारोह में भारतीय राजदूत डॉ. कुमार तुहिन व भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक व बिहार फ़ाउंडेशन नीदरलैंड के सदस्यों के साथ “अंतरराष्ट्रीय हिन्दी संगठन नीदरलैंड “अध्यक्ष डॉ ऋतु शर्मा व Stichting Maitry मैत्री Vriendschap voor iedereen “ के संस्थापक व सूरीनाम भारतीयों की चौथी पीढ़ी डॉ दिनेश ननंन पाँडे “ रविन्द्रनाथ टैगोर विश्व विद्यालय द्वारा विश्व हिन्दी ओलंपियार्ड का विमोचन किया गया। साथ ही डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे की नीदरलैंड की संस्कृति पर आधारित लेखन में तीसरी पुस्तक “ नीदरलैंड की चर्चित कहानियाँ “ व काव्य संग्रह “संदुकची “ का लोकार्पण हुआ। भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केन्द्र में इन पुस्तकों सहित डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे की पाँच पुस्तकें रजिस्टर्ड कर दी गई हैं। सांस्कृतिक केन्द्र में मधुबनी चित्रकला की प्रदर्शनी भी लगाई गई । इस अवसर पर बच्चों के लिए एक ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी रखी गई। जिसके विजेताओं व कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों को कार्यक्रम के अंत में राजदूत द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद बिहार राज्य का राजकीय गीत गाया गया। कार्यक्रम का आभार ज्ञापन करते हुए कहा कि आज बिहार दिवस मनाने के पीछे एक बड़ा उद्देश्य नीदरलैंड में पीहर संस्कृति का प्रचार प्रसार करना है । हमें बिहार को भी यूरोप व अन्य विकसित देशों की सूची में लाने के लिए हमें ही प्रयास करने होंगे । हम सभी को समाज में परिवर्तन लाना है। जिसकी पहल हमें स्वयं से करनी होगी। बिहार के उत्पादन को विदेश में भी व्यवसायिक रूप में उतारना होगा। जितना ज़्यादा हो सके वर्तमान और आने वाली पीढ़ी तक अपनी संस्कृति और भाषा पहुँचाना हमारा ही कर्तव्य है। बिहार के निवासी जो नीदरलैंड में रह कर यहां के उत्पादन व आर्थिक विकास में सहयोग कर रहें हैं यह हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है । इसके बाद बिहार के लोकप्रिय व्यंजनों के आनन्द के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर सभी ने कहा कि गर्व से कहो हम बिहारी हैं। एक राजय नहीं, एक देश नहीं, पूरा विश्व हमारा आभारी हैं, गर्व से कहो हम बिहारी हैं।…।









