कवि: एन डी निम्बावत
क्या होती है
चुटकी भर सिंदूर की कीमत
ये समझाने के लिए
करना पड़ा ऑपरेशन सिंदूर
बंद आँखें, लब खामोश
चेहरे पर कोई शिकन नहीं
मगर फिर भी देखो
कुछ कह रही है ये वीरांगना
माना कि
मिट गया मेरे माथे का सिंदूर
लेकिन
उड़ रहा है ये मेरे माथे का सिंदूर
आतंकियों की मौत बनकर
मार दिये गए सैकड़ों आतंकी
25 मिनिट के एक ही वार में
कलेजे को मिली कुछ ठंडक
जारी रहेगा ऑपेरशन सिंदूर
अब न आतंकी बचेंगे न उनके ठिकाने
घबरा गए एक ही रात में
आतंकियों के आका
उन्हें पता नहीं
अमिट है ये सिंदूर
मिटा रहा है ये
आतंकियों और आततायियों के गुरुर
एडवोकेट एन डी निम्बावत “सागर”
जोधपुर (राज.)




